November 29, 2024
29.11.2024 (DarbhangaOnline) (दरभंगा) : मिथिला माता जानकी की जन्मभूमि है। ज्ञान संस्कार दर्शन और यहां की संस्कृति के बारे में अब तक पढ़ती और सुनती आई थी लेकिन आज इस पावन धरती पर आकर ख़ुद को धन्य महसूस कर रही हूं। दरभंगा सांसद सह लोकसभा में पार्टी सचेतक डा गोपाल जी ठाकुर के आवासीय कार्यालय परिसर में आयोजित अपने सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमति निर्मला सीतारमण ने उपरोक्त विचार व्यक्त किए। वित मंत्री श्रीमति निर्मला सीतारमण ने माता सीता और प्रभु राम को अपना आराध्य बताते हुए कहा कि मैं अपने माता पिता को धन्यवाद देना चाहती हूं जिन्होंने मेरा नामांकरण सीता और राम दोनों को मिलाकर सीतारमण रखा।
केंद्रीय वित्त मंत्री ने सांसद डा ठाकुर के कर्मठता की चर्चा करते हुए कहा मिथिला की समस्याओं और मौलिक मुद्दों को लेकर इन्होंने लोकसभा में जितनी सक्रियता दिखलाते आए हैं वह इनकी क्षेत्र के प्रति सजगता का परिणाम है। उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि दरभंगा लोकसभा की जनता ने जिस विशाल मतों से सांसद डा ठाकुर को जीत दिलाई आज वह उत्साह सबके सामने जगजाहिर है।
मौके पर बिहार सरकार के मंत्री हरि सहनी मधुबनी सांसद डा अशोक यादव पूर्व मंत्री जीवेश मिश्रा नगर विधायक संजय सरावगी पूर्व विधायक अमरनाथ गामी क्षेत्रीय प्रभारी धीरेंद्र सिंह, लोकसभा प्रभारी उमेश कुशवाहा, लोकसभा सह प्रभारी प्रफुल्ल कुमार ठाकुर, प्रेम कुमार, रिंकू, कृष्ण, भगवान झा, पारसनाथ चौधरी, विकास, विवेक चौधरी, आशुतोष झा, पुरुषोत्तम सिंह, मीरा देवी आदि मौजूद थे।
November 28, 2024
28.11.2024 (DarbhangaOnline) (दरभंगा) : आगामी 14 दिसंबर 2024 को होने वाले राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारियों के साथ प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार श्री विनोद कुमार तिवारी ने समीक्षात्मक बैठक की। उन्होंने कहा की ऐसे सुलहयोग्य वाद जो ग्राम कचहरी में लंबित है और पक्षकारों के बीच सुलह समझौते की गुंजाइश है तो पक्षकारों को ग्राम कचहरी में बुलाकर प्रि-काउंसलिंग के जरिए समझौता कराने का प्रयास करें। समझौता पश्चात वाद को राष्ट्रीय लोक अदालत में निष्पादन के लिए तैयार करें।
उन्होंने कहा कि ग्राम कचहरियों के सभी प्रतिनिधि स्थानीय और सामाजिक होते हैं तथा मामले के सभी पहलुओं को भलीभांति समझते हैं। मामलों में स्थानीय पक्षकारों के होने से उनके बीच समझौता करना आसान होता है, इसलिए अधिक से अधिक मामलों में सुलह समझौता करायें। जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव रंजन देव ने कहा की ग्राम कचहरियों के माध्यम से राष्ट्रीय लोक अदालत का प्रचार-प्रसार करायें साथ ही लोगों को लोक अदालत के फायदों से अवगत करायें। उन्होंने निष्पादन योग्य सुलहनीय वादों की सूची जमा करने का भी निर्देश दिया।
November 28, 2024
28.11.2024 (DarbhangaOnline) (दरभंगा) : महाराजाधिराज डा. सर कामेश्वर सिंह जी का 117 वाँ जन्म दिवस महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाउंडेशन द्वारा कल्याणी निवास, दरभंगा में समारोह पूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर पिछले वर्षों की भाँति 'महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह स्मृति व्याख्यान' आयोजित किया गया। इस वर्ष का स्मृति व्याख्यान संस्कृत, हिन्दी और अंग्रेजी भाषाओं के प्रसिद्ध विद्वान एवं चिंतक प्रो.राधा वल्लभ त्रिपाठी ने "आधुनिक भारत की सारस्वत साधना : संस्कृत पाण्डित्य परम्परा के संदर्भ में" विषय पर दिया।
अपने सारस्वत उद्बोधन में प्रोफेसर त्रिपाठी ने भारतीय शास्त्र परम्परा को पांच चरणों में विभक्त करते हुए, इनकी विस्तार से व्याख्या की। इसका प्रथम चरण जिसे इसका उद्भव काल या मंत्रकाल भी कह सकते हैं , जो 5000 विक्रम पूर्व से 1000 विक्रम पूर्व का कालखंड है। इस काल में चारों वेदों और उनके वेदांगों का संकलन हुआ। दूसरा चरण उन्मेष काल है जो 1000 विक्रम पूर्व से विक्रमाविर्भाव वर्ष तक है और इस काल में सूत्र साहित्यों का प्रणयन हुआ और आगे तक चलता रहा। तीसरा चरण विकास काल है जो प्रथम शती वै. से 10 वीं शती वै. तक चला। इस कालखण्ड में पूर्व के पुस्तकों ( वेदों, वेदांगों, उपनिषदों) के भाष्य लिखे गए और भारतीय ज्ञान और दर्शन का सर्वाधिक विस्तार इसी कालखण्ड में हुआ। चौथा चरण विस्तार काल है जो ग्यारहवीं शती से अठारहवीं शती तक चला। इस कालखण्ड में दर्शन, विज्ञान, साहित्य आदि ज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में नवीन भाष्यों, टीकाएँ और मौलिक ग्रंथों का प्रणयन हुआ। अरबों एवं अन्य विदेशी विद्वानों के द्वारा भारतीय ग्रंथों का अपनी अपनी भाषाओं में अनुवाद हुआ और भारतीय ज्ञान परम्परा का विस्तार पूरे एशिया और यूरोपीय महाद्वीप में हुआ।
उन्नीसवीं से इक्कीसवीं शती भारतीय सारस्वत साधना का पांचवा चरण है जो अभी भी निरंतर चल रहा है। प्रोफेसर त्रिपाठी ने बतीस विद्याओं की चर्चा की, जिनमें भारतीय ज्ञान - दर्शन के साथ ही यवनमत (इस्लामी दर्शन) और देशादिधर्म की भी चर्चा इन बतीस विद्याओं में की।शास्त्र परम्परा की दस हजार वर्षों की इस सतत विकास यात्रा में बीसवीं शती में भी नवीन मौलिक ग्रंथों का प्रणयन हुआ। जिनमें परम्परागत विद्याओं और नवीन ज्ञान विज्ञान के ग्रंथ भी हैं। इनमें संस्कृत के वैचारिक साहित्य की श्रेष्ठ कृतियाँ भी हैं। वर्तमान विश्व के मूर्धन्य दार्शनिकों में परिगणित होने वाले विद्वान भी हैं। बीसवीं शती के मूर्धन्य दार्शनिक महामहोपाध्याय रामावतार शर्मा (1877 - 1928), जो इसी बिहार की धरती की उपज हैं, का परमार्थ दर्शन दर्शनीय है। इनका परमार्थदर्शनम् एक दार्शनिक कृति है।
इनका वैदुष्य पतंजलि और कुमारिल भट्ट के समकक्ष है। यह भारतीय दर्शन का नवीनतम क्षेत्र है। आधुनिक काल के पांच पुस्तकों की चर्चा की जिन पुस्तकों ने काफी हद तक आधुनिक पांडित्य को पूरे विश्व में प्रभावित किया है। पहली पुस्तक महानिर्वाणतंत्र है, जो 1775-1875 के बीच लिखी गई थी। इस पुस्तक में नागरिक, समाज, धर्मशास्त्र आदि विविध पक्षों की व्याख्या की है। इसमें पंचम वर्ण की व्यवस्था की और पांचों वर्णों को जातिप्रथा और छूआछूत से परे समाज के नव संगठन की चर्चा है। दूसरी पुस्तक शब्दार्थरत्नाकर है जो तारानाथ तर्कवाचस्पति की रचना है।
वस्तुतः यह वाक् का दर्शन है।आधुनिक फ्रांस में विकसित ग्रामोटोलाजी, पोस्ट माॅडर्निज्म और थ्योरी औफ डिस्ट्रक्शन (विखंडन का सिद्धांत) यहीं विकसित हुए हैं। तीसरी पुस्तक सनातन धर्मोद्धारोद्धार है। चौथी पुस्तक परमार्थ दर्शनम् है। और पांचवीं काव्यालंकार कारिका हैं। ये पांचों पुस्तक आधुनिक दर्शन, समाजिक विज्ञान, भाषा विज्ञान, तर्कशास्त्र आदि क्षेत्रों में नवीन ज्ञान को प्रतिपादित करने का श्रेय भारत को है। किन्तु पश्चिमी छल ने हम से हमरा ज्ञान तो लिया किन्तु हमें श्रेय नहीं दिया। समारोह की अध्यक्षता प्रो. श्रीश चन्द्र चौधरी (पूर्व प्राचार्य, अंग्रेजी विभाग, आई.आई.टी, चेन्नई) ने किया। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रोफेसर चौधरी ने मिथिला के पारम्परिक ज्ञान परम्परा की चर्चा की और यहाँ के लोगों द्वारा नवीन भाषा को सीखने की जिज्ञासा की व्याख्या की।
मनुष्य माता के गर्भ से सीखना प्रारम्भ कर देता है। विश्व की सभी भाषाओं में अक्षर बनने की प्रक्रिया लगभग एक ही है। पाणिनि ने बड़ा वैज्ञानिक व्याकरण बनाया जो दुनिया की किसी भी भाषा पर लागू किया जा सकता है। ग्रियर्सन ने मैथिली भाषा की विभिन्न बोलियों का रिकार्डिंग कराया था। एच एम वी ने इनका रिकार्डिंग किया था, जो आज भी उपलब्ध हैं। अंग्रेजी भाषा के छात्रों एवं शिक्षकों को अंग्रेजी अध्ययन - अध्यापन में होने वाली समस्याओं का विस्तार से निरूपण किया। अपने उद्बोधन के प्रथम भाग में उन्होंने नये अंग्रेजी सीखने वालों की समस्याओं एवं आकांक्षाओं की विस्तार से व्याख्या की। दूसरे भाग में अंग्रेजी भाषा सीखने से सम्बन्धित नवीन तकनीक की चर्चा की और अंत में समस्याओं को सुलझाने के लिए नवीन तकनीक और रास्तों की चर्चा की।
इस समारोह में फाउण्डेशन द्वारा 'कामेश्वर सिंह बिहार हेरिटेज सीरीज' के अन्तर्गत इस वर्ष अयोध्या प्रसाद 'बहार' रचित एवं स्व.प्रो.हेतुकर झा द्वारा सम्पादित "रियाज - ए - तिरहुत" के द्वितीय संस्करण का लोकार्पण हुआ। "रियाज-ए-तिरहुत" पहली बार 1868 में प्रकाशित होने के बाद करीब सौ वर्षों तक विद्वानों के नज़रों से ओझल रही, जिसे 1997 में महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह बिहार हेरिटेज सीरीज के अन्तर्गत प्रकाशित कर विद्वानों के समक्ष प्रस्तुत किया गया। पुस्तक परिचय डाक्टर मंजर सुलेमान ने प्रस्तुत किया। इस पुस्तक में दरभंगा शहर और आसपास की कई ऐसी जानकारियाँ हैं, जो अन्य किसी रिपोर्टों या पुस्तकों में नहीं मिलती हैं, इसलिए यह पुस्तक क्षेत्रीय इतिहास में रूचि रखनेवाले अध्येताओं और समाजिक विज्ञान के शोधार्थियों के लिए महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम की शुरुआत भगवती वंदना से हुई। सभी आगत अतिथियों ने महाराजाधिराज सर कामेश्वर सिंह के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धा सुमन अर्पित किया। इसके बाद फाउंडेशन के कार्यकारी पदाधिकारी श्रुतिकर झा ने सभी अतिथियों का परिचय सभा से कराया। स्वागत भाषण पंडित रामचंद्र झा ने दिया। धन्यवाद ज्ञापन डाक्टर जे. के. सिंह ने किया।
November 28, 2024
28.11.2024 (DarbhangaOnline) (दरभंगा) : आजादी के बाद दरभंगा की धरती पर केंद्रीय वित्त मंत्री के रूप में श्रीमति निर्मला सीतारमण जी का पहली बार आगमन हो रहा है जिसके माध्यम से इस जिला के 45 हजार लोगों को रोजगार उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस कार्यक्रम को ऐतिहासिक बनाने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। दरभंगा सांसद सह लोकसभा में भाजपा सचेतक डा गोपाल जी ठाकुर ने राजमैदान में प्रशासनिक अधिकारियों तथा बैंकिंग सेक्टर के पदाधिकारीयों के साथ वित्त मंत्री के कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा लेने के बाद उपरोक्त बातें कही।
सांसद डा ठाकुर ने कार्यक्रम को ऐतिहासिक होने का दावा करते हुए कहा की यह कार्यक्रम अपने आप में एक इतिहास रचेगा क्योंकि इतने व्यापक स्तर पर रोजगार सृजन का पहल किया गया है। सांसद डा ठाकुर ने वित्त मंत्री श्रीमति निर्मला सीतारमण को बहुआयामी व्यक्तित्व का धनी बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में इन्होंने विकास की जितनी लंबी लकीर खींची है वह अपने आप में एक उदाहरण है। सांसद डा ठाकुर ने केंद्रीय वित्त मंत्री के स्वागत में लाखों कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित होने का दावा करते हुए कहा कि जिले के हर कोने तथा हर पंचायत से पार्टी के नेता पदाधिकारी व कार्यकर्ता राजमैदान से बलभद्रपुर लहेरियासराय तक मंत्री के स्वागत में मौजूद रहेंगे।
सांसद डा ठाकुर ने वित्त मंत्री के कार्यक्रम को भाजपा तथा एनडीए गठबन्धन के साथ साथ सम्पूर्ण जिलावासियों के लिए एक सुखद अनुभूति बताते हुए कहा कि इस कार्यक्रम के माध्यम से मिथिला के आमजनों में रोजी रोजगार का संदेश भी दिया जाएगा। राजमैदान में तैयारियों का जायजा लेने के समय जिला के डीडीएम राजनंदिनी, बैंकिंग सेक्टर के अन्य अधिकारियों समेत समाजसेवी डा वैद्यनाथ चौधरी बैजू भाजपा के जिला उपाध्यक्ष सुजित मल्लिक भाजयुमो जिलाध्यक्ष बालेंदु झा सौरभ सुमन शशिभूषण चौधरी नेहरू प्रदीप सिंह आदि मौजूद थे।
November 28, 2024
28.11.2024 (DarbhangaOnline) (दरभंगा) : धार्मिक साधना और आस्था का केंद्र बिंदु है मिथिला क्षेत्र। यहां की धार्मिक मान्यताओं वेद पुराणों से लेकर पौराणिक ऐतिहासिक आख्यानों में भी उपलब्ध हैं। मां श्यामा माई न्यास परिषद् के तत्वावधान में आयोजित नौ दिवसीय नवाह यज्ञ समापन समारोह में भाग लेने के बाद स्थानीय सांसद सह लोकसभा में भाजपा के सचेतक डा. गोपाल जी ठाकुर ने उपरोक्त उदगार व्यक्त किए। सांसद डा ठाकुर श्यामा माई नवाह यज्ञ के समापन के अवसर पर आयोजन स्थल पर पहुंचे जहां माता का दर्शन करने के बाद आयोजक मंडली के द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में पहुंचे जहां न्यास परिषद् के अध्यक्ष डॉ एस एम झा उपाध्यक्ष डॉ जयशंकर झा सहित अन्य गणमान्य लोगों के द्वारा सांसद डा ठाकुर को माता की चुनरी भेंट कर सम्मानित किया।
सांसद डा ठाकुर ने आयोजक मंडली को साधुवाद देते हुए कहा की सनातन संस्कृति और सनातन धर्म के प्रचार प्रसार में श्यामा माई न्यास परिषद् के योगदानों की जितनी सराहना की जाए वह कम है। सनातन संस्कृति को विश्व का सर्वश्रेष्ठ दर्शन बताते हुए कहा की आदि काल से इतिहासकारों तथा विद्वानों ने इस धर्म में वैज्ञानिकता के आधार को माना है। मौके पर न्यास परिषद् के सदस्यों, भाजपा नेताओं तथा कार्यकर्ताओं के साथ हजारे श्रद्धालु उपस्थित थे।