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राज्य सरकार से अनुरोध करता हूं कि एम्स को राजनीति का अड्डा न बनाएं - सम्राट चौधरी

November 30, 2023
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28.11.2023 (दरभंगा) : भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष सम्राट चौधरी द्वारा दरभंगा में जिला कार्यालय में प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि डी.एम.सी.एच सर्जिकल भवन का लोकार्पण कर जनता को आंख में धूल झोंकने का कार्य किया है चाचा भतीजा के सरकार ने, जबकि यह भवन भाजपा के स्वास्थ्य मंत्री के द्वारा स्वीकृत किया हुआ है। प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि एक ओर आधे अधूरे भवन का लोकार्पण हो रहा है वही दूसरी ओर दो वर्षो से तैयार सुपर स्पेशलिटी जहां करोड़ों की मशीन और उपकरण में जंग लग रहा है पानी के अभाव के कारण एव वाहन पड़ाव के कारण लोकार्पण अटका पड़ा है, जबकि पानी की भी व्यवस्था दरभंगा सांसद के ऐच्छिक कोष से उच्च स्तरीय पंप लगाकर करवा दिया गया है।

डॉक्टर की नियुक्ति भी हो चुकी है जहां हार्ट, कैंसर विभाग में प्रतिदिन सैकड़ों मरीजों की जान बच सकती है। सरकार उदासीन है। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि 15-16 के बजट में एम्स की स्वीकृति हुई, सरकार को 200 एकड़ जमीन उपलब्ध कराने को कहा गया, उस समय चाचा भतीजा की सरकार थी। चार वर्ष तक एम्स नहीं बनने को लेकर सभी हथकंडा अपनाते हुए कोई पत्र का जवाब देना भी मुनासिब नहीं समझा और आज मुख्यमंत्री जी एम्स बनने के पहले इसका श्रेय लेने को बेताब है। स्वास्थ मंत्री का ब्यान जो एम्स को लेकर दिया गया है वह घमंडिया गठबंधन के सोच और मानसिकता को दर्शाता है कि आखिर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार क्यों आठ वर्षो से दरभंगा एम्स को लटकाए हुए है वह नहीं चाहते की विकास का पर्याय बन चुके यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के हाथों इसका शिलान्यास हो। उपमुख्यमंत्री को बताना चाहिए कि देश के किस राज्य में 500 करोड़ में एम्स बना है, किसी भी एम्स के सिर्फ ढांचागत निर्माण और उपकरण पर हजारों करोड़ रुपया खर्च करती है और बाद में डॉक्टर, स्टाफ, दवाई, मशीन, रिचर्च, सहित दैनिक रख रखाव पर हजारों करोड़ सलाना खर्च करती है।

सरकार अगर आज जमीन मुहैया करवा दे तो हमलोग प्रधानमंत्री से मिलकर शिलान्यास भी करवा देंगे। 2020 में 1264 करोड़ के स्वीकृत के साथ डायरेक्टर भी नियुक्ति हो चुका है। जनता देख चुकी है की 300 एकड़ जमीन राज्य कैबिनेट के माध्यम से सरकार को हस्तांतरित किया था और स्थल पर मिट्ठी भराई, पूर्व से अवस्थित भवन को तोड़कर समतलीकरण किया गया और जब एम्स निर्माण प्रारंभ होना था तो जमीन वापस ले लिया। एम्स के अतिक्रमित भूमि को मुक्त करवाने का क्या प्रयास किया जनता जानना चाह रही है। बिहार सरकार की दरभंगा एम्स को लटकाने अटकाने और भटकाने वाली नीति के विरुद्ध 02 अक्टूबर को सांसद गोपाल जी ठाकुर द्वारा बिहार सरकार द्वारा प्रस्तावित नए 30 फीट गड्डे वाले स्थल पर अनशन भी किया गया था।

केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री एस पी सिंह बघेल ने राज्य सरकार से 200 एकड़ अविवादित और उपयुक्त जमीन देने का अनुरोध किया था लेकिन राज्य सरकार उसी जमीन देने को लेकर अड़ी हुई है। मैं राज्य सरकार से अनुरोध करता हूं कि एम्स को राजनीति का अड्डा न बनाएं। एम्स का लाभ कई पीढ़ी को मिलता है मिथिला को यह सौभाग्य आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा दिया गया है। बिहार सरकार इसमें रोड़ा नहीं अटकाए और जल्द से जल्द एम्स के मानक के अनुरूप 200 एकड़ अविवादित और उपयुक्त जमीन, बिजली, पानी, फोरलेन सड़क सहित अन्य सुविधा सहित भारत सरकार को हस्तांतरित करे ताकि दरभंगा एम्स का निर्माण कार्य जल्द प्रारंभ हो सकें।

नरेंद्र मोदी शब्दो से बने नेता नहीं है वह कर्मो से बने एक नेता है जो कहते है अवश्य करते है। 40 में 40 सीट भाजपा गठबंधन की जीत सुनिश्चित है तब तक जो करना है कर लें दरभंगा में ही एम्स बनेगा । हमारी लोकतांत्रिक पद्धति को नष्ट होने से बचाना है। शिक्षक जो हिंदू है उनके पर्व त्योहार में कटौती और एक वर्ग के छुट्टी में बढ़ोतरी आखिर सरकार क्या साबित करना चाह रहा है भाजपा इसका विरोध करेगी यह जनभावना के साथ छल है।

इस प्रेस वार्ता में दरभंगा के सांसद गोपाल जी ठाकुर, नेता प्रतिपक्ष हरि सहनी, पूर्व मंत्री सह जाले विधायक जीवेश मिश्रा, नगर विधायक संजय सरावगी, केवटी विधायक डॉ मुरारी मोहन झा, हायाघाट विधायक रामचंद्र प्रसाद, विधान पार्षद सुनील चौधरी , जिलाध्यक्ष जीवछ सहनी, जिला प्रभारी अरुण कुशवाहा आदि उपस्थित थे।

महाराजा कामेश्वर सिंह जी के जन्मदिवस के अवसर पर कामेश्वर सिंह स्मृति व्याख्यान का आयोजन किया गया

November 30, 2023
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28.11.2023 (दरभंगा) : आज महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाउंडेशन के तत्वावधान में हर वर्ष की भांति महाराजा कामेश्वर सिंह जी के जन्मदिवस के अवसर पर कामेश्वर सिंह स्मृति व्याख्यान कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति पं. डा. शशि नाथ झा की अध्यक्षता में आयोजित की गई। इस वर्ष जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रख्यात समाजशास्त्री प्रोफेसर आनन्द कुमार ने "स्वराज-रचना और राष्ट्रनिर्माण का गांधी मार्ग" विषय पर व्याख्यान दिया। प्रोफेसर आनन्द कुमार ने अपने भाषण में गांधीजी के राष्ट्रनिर्माण की अवधारणा को विस्तार से रखा। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत में जाति, भाषा और धर्म की विविधता के बावजूद भारत का नवनिर्माण बखूबी होता गया। जब यह देश आजाद हुआ था तो विदेशियों एवं कतिपय भारतीय नेताओं ने भी भारत का एक राष्ट्र के रूप में स्थायित्व संदिग्ध था।

भारत के नवनिर्माण में भारतीय संविधान ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा किया। किन्तु लोकतंत्र का विकास संविधान से सुरक्षित और सम्पोषित होता रहा। वहीं भारतीय लोकतंत्र को चुनाव और उसका धनतंत्र सर्वाधिक प्रभावित करने लगा। समाजवादी ने जाति तोड़ो से अभियान शुरू किया और आज जाति जोड़ो का राग आलाप रहे हैं। आज राष्ट्रवाद से उपजा लोकतंत्र परिवार वाद में बदलकर रह गया।भारतीय समाज आज भी लिंग भेद और जाति भेद से ग्रस्त है। आज भी स्त्रियों को न तो सुरक्षा प्राप्त है और न स्वतंत्रता, परिवार और परिवार के बाहर वो सबसे असुरक्षित है। आज भी भारत में सामाजिक और आर्थिक असमानता जारी है।

भारत के समक्ष धर्म और राजनीति का सम्बन्ध सबसे उलझा प्रश्न है। राष्ट्र निर्माण का आर्थिक पक्ष भी काफी महत्वपूर्ण है। ठोस आर्थिक नीति के अभाव में कोरोना काल में भारत की राष्ट्रीयता खंडित हुई। गांधीजी के लिए सिद्धांत हीन राजनीति सबसे बड़ा पाप है। भारतीय राष्ट्र के नवनिर्माण के सभी पक्षों पर गांधीजी के विचार काफी विचारणीय और समीचीन हैं। गांधीजी ने स्वतंत्रता प्राप्ति को एक सीमित राजनीतिक सफलता बताया और सचेत किया कि स्वराज के आर्थिक, सामाजिक और नैतिक पक्ष को पूरा करने का कठिन काम बाकी है। इसके बिना 'पूर्ण स्वराज' का संकल्प साकार नहीं होगा। भारत के नवनिर्माण के लिए आर्थिक समानता, साम्प्रदायिक एकता, ग्राम - स्वराज, दरिद्रता और बेरोजगारी निर्मूलन, स्त्री पुनरुत्थान, स्वच्छता - स्वास्थ्य - शिक्षा सुधार, भाषा स्वराज, विकेन्द्रीकरण एवं देश - दुनिया में शांति के लिए प्रभावशाली कदम उठाना भारत की नयी जिम्मेदारी है। इसलिए स्वतंत्रता के इस अमृत वर्ष के अवसर पर इन नौ सूत्रीय जिम्मेदारी के बारे में आत्म मूल्यांकन आवश्यक है। गांधीजी की हत्या के ठीक तीसरे दिन प्रकाशित उनकी 'वसीयतनामा' के बारे में राष्ट्रपति डाॅ राजेन्द्र प्रसाद ने लिखा कि हमने जो स्वतंत्रता प्राप्त की है उसके फलस्वरूप हमारे ऊपर गंभीर जिम्मेदारियां आ गयी हैं, हम चाहें तो भारत का भविष्य बना सकते हैं और चाहें तो बिगाड़ सकते हैं।

गांधीजी ने स्वराज को एक निर्गुण आदर्श से सगुण सच बनाने में छः दशकों के दौरान विचार और कर्म के स्तर पर असाधारण योगदान दिया। उनके सपनों, प्रयासों और शिक्षा ने न केवल स्वतंत्रता का मार्ग प्रशस्त किया अपितु राष्ट्र निर्माण की एक रुपरेखा भी प्रस्तुत किया। यहाँ उल्लेखनीय है कि उनके व्यक्तित्व और चिंतन के निर्माण में हिन्दू, इस्लाम और ईसाई धर्मों का समभाव प्रभाव रहा है। उनके विचार एशिया, अफ्रीका और यूरोप के समकालीन इतिहास का संगम है। गांधी विचार के विशेषज्ञ "हिन्द - स्वराज" और उनकी आत्मकथा को सर्वाधिक महत्वपूर्ण कृति मानते हैं, जबकि गांधीजी स्वयं गीता आधारित "अनासक्ति योग" महत्वपूर्ण मानते थे। गांधीजी मूलतः आध्यात्मिक प्रवृत्ति के थे और राजनीति के आध्यात्मिकरण उनका विश्व समाज को सबसे महत्वपूर्ण योगदान है। सत्य और अहिंसा उनके जीवन दर्शन का मूल आधार रहा और ईश्वर में उनकी असीम आस्था थी, यही कारण है कि "आत्मसाक्षात्कार" को अपना अभिष्ट मानते थे।

गांधीजी बाजार शक्ति और राज्यसत्ता की तुलना में समुदाय शक्ति को श्रेष्ठ मानते थे और यही कारण है कि राष्ट्रनिर्माण के लिए लोकशक्ति के आधार पर रचनात्मक कार्यक्रम को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। स्वावलम्बी समुदाय निर्माण को स्वराज का पर्यायवाची बनाया। तमाम आशंकाओं और आलोचनाओं के बावजूद गांधीजी की मृत्यु के बाद सत्य, अहिंसा, स्वराज, स्वदेशी, सर्वोदय, सत्याग्रह आधारित विमर्श विकास की निरंतरता दुनिया में विस्मयकारी रुप से सच साबित हुई। कितने ही परवर्ती नेता वो मार्टिन लूथर किंग हों या नेल्सन मंडेला, दलाई लामा हों या बिनोवा भावे, या फिर जयप्रकाश जैसे मार्क्सवादी समाजवादी हों, गांधी दर्शन से अभिभूत दिखते हैं।

बिनोवा भावे का भूदान आन्दोलन और जयप्रकाश का "सहभागी लोकतंत्र" और "सम्पूर्ण क्रांति" तो गांधीजी के दर्शन और विचारों का मूर्तरूप हैं। गांधीजी का मानना था कि परस्पर सहयोग के जरिये जीवन निर्वाह की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए विकेन्द्रित उत्पादन प्रक्रिया के अन्तर्गत शरीर-श्रम जीवन का प्रथम नैतिक नियम है। इससे धरती पर मानव अस्तित्व का निर्वाह होगा और राष्ट्र - राज्यों द्वारा निर्मित आधुनिक बाधाओं के बावजूद स्वराज और समता आधारित मानव सभ्यता संभव हो सकेगी। हिंसा आत्मरक्षा का सही उपाय नहीं है, इससे हथियारों की होड़ को बढ़ावा मिलता है। इसके विपरीत अहिंसक तरीके को अपनाने से समुदायों में आत्मसुरक्षा की क्षमताओं में वृद्धि हो सकेगी और अल्पसंख्यक भी अपने को सुरक्षित महसूस करेंगे।

इस प्रकार स्वतंत्रता हर समुदाय को दूसरे समुदाय के समक्ष सुरक्षित करेगी। गांधीजी के दर्शन के दो प्रमुख प्रवृत्तियाँ हैं, एक आत्मसमीक्षा और इससे जुड़े आंतरिक सुधार और व्यवस्था गत परिवर्तन और दूसरा समस्या की तात्कालिक तस्वीर और सत्य आधारित इसका समाधान। गांधीजी की कार्यपद्धति की विशेषता थी कि अपने किसी विचार और सुझाव को व्यवहार में लाने के लिए नयी संस्था बनाने के बजाय उपलब्ध संगठनों को ही असरदार माध्यम बनाते थे। अगर नयी संस्था आवश्यक भी हुआ तो उसे किसी पूर्व संगठन के अन्तर्गत निर्मित करते थे, जिससे अनुकूल परिवेश निर्मित हो सके। किसी प्रसंग पर अपना विचार बहुत सोच समझकर व्यक्त करते थे और अपने वक्तव्य और विचार पर अडिग रहते थे। लेकिन असहमत व्यक्ति से बहुत दूर नहीं होते थे।

'मतभेद' को 'मनभेद' और 'सम्बन्ध विच्छेद' नहीं बनने देते थे। आलोचनाओं और भ्रांतियों के बावजूद विरोधियों से संवाद करना उनकी खासियत थी। यही कारण था कि मोतीलाल नेहरू, सुभाषचंद्र बोस सरीखे नेता उनके विरोध के बावजूद उनके विचारों के कायल थे। स्वतंत्रता संग्राम में सविनय अवज्ञा, अहिंसा, सत्याग्रह, खादी, स्वच्छता, नशा विरोध, स्त्री शिक्षा, रचनात्मक कार्यों को जोड़कर समाज के हर वर्ग और समुदाय को इसके लिए प्रेरित किया। वस्तुतः भारतीय स्वतंत्रता संग्राम 1920 के बाद गांधीजी के आन्दोलनों की सफलता - असफलता से प्रभावित होता रहा। गांधीजी के लिए स्वराज के विमर्श को निरंतर विस्तार देना सत्य साधना का अनिवार्य अंग था।

उनकी पुस्तक 'हिन्द - स्वराज' उनकी अद्भुत रचना है। भारत की हर समस्याओं का हल यहाँ उपलब्ध है। गांधीजी को अपनी संस्कृति, धर्म, देश और इतिहास पर अपार गर्व था। किन्तु इस संस्कृति में उभरे ऊंच नीच, छुआछूत, गुलामी, गरीबी, साम्प्रदायिक मतभेद, स्त्रियों की दुर्दशा, नशा खोरी आदि महादोषों से ग्लानि का अनुभव करते थे और इन दोषों से मुक्ति को अनिवार्य मानते थे। समाज सुधार उनके लिए सबसे अनिवार्य कार्य था, बिना स्वस्थ और समृद्ध समाज के सशक्त भारत की कल्पना वो नहीं करते थे। उनके विचार में आदर्श गांव ही सशक्त भारत का निर्माण कर सकता था।

गांधीजी के लिए गांवों की आत्मनिर्भरता आवश्यक थी, समुदायों की आत्मनिर्भरता आवश्यक थी, हर गांव में स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार आदि की व्यवस्था आवश्यक थी। वे विकेंद्रित आर्थिक व्यवस्था के सम्पोषक थे। उन्नत गाँव ही उन्नत भारत का निर्माण करेगा यह उनकी मूल संकल्पना थी। अपने अध्यक्षीय भाषण में प्रोफेसर शशि नाथ झा ने प्रोफेसर आनन्द कुमार के भाषण को विलक्षण बताया और फाउंडेशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक की महत्ता पर प्रकाश डाला। प्रोफेसर झा ने अपना अध्यक्षीय भाषण मैथिली भाषा में दिया। 1956 के अकाल के समय में महाराज कामेश्वर सिंह के लोकोपकार की विस्तृत जानकारी दी। स्वागत भाषण फाउंडेशन के मानद सदस्य प्रोफेसर रामचंद्र झा जी ने दिया। अपने स्वागत भाषण में प्रोफेसर रामचंद्र झा जी ने प्रोफेसर आनन्द कुमार का विस्तृत परिचय दिया और मिथिला के वर्तमान शैक्षिक परिदृश्य में फाउंडेशन के कार्यों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की शुरुआत भगवती वंदना और महाराज के चित्र पर माल्यार्पण से हुई। धन्यवाद ज्ञापन पद्मश्री डाॅ. जे.के. सिंह ने किया। डॉ. सिंह फाउंडेशन के मानद सदस्य भी हैं।

मंच संचालन फाउंडेशन के कार्यपालक पदाधिकारी श्री श्रुतिकर झा ने किया। पिछले वर्षों की भांति इस वर्ष कामेश्वर सिंह बिहार हेरिटेज सिरीज़ के तहत चौविसवीं पुस्तक के रूप में स्वर्गीय शशिनाथ चौधरी कृत "मिथिला दर्शन" नामक मैथिली पुस्तक का लोकार्पण हुआ। मूल मैथिली भाषा की इस पुस्तक का संपादन और हिन्दी अनुवाद मिथिला के प्रतिष्ठित इतिहासकार और मैथिली के समालोचक - साहित्यकार डाॅ० शंकरदेव झा ने किया। यह मैथिली भाषा में मिथिला का प्रथम समग्र इतिहास है, जो प्रथमतः 1931ई० में छपी थी और विगत चार दशकों से अनुपलब्ध थी। यह पुस्तक मिथिला में उभरे पुनर्जागरण के काल में लिखी गई थी, इसलिए भी इस पुस्तक का काफी महत्व है। मैथिल समाज में उभरे सामाजिक दोषों को रेखांकित करने एवं इन्हें दूर करने के उपायों पर अपने विचार रखे। इस लिहाज से भी यह पुस्तक पठनीय और संग्रहनीय है।

गुरु नानक जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाया गया

November 27, 2023
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27.11.2023 (दरभंगा) : मिर्जापुर स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु नानक सिंह सभा में गुरु नानक जी का 554वां जन्म दिवस साध सांगत एवं प्रबंधक कमिटी द्वारा हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर दिनांक 25.11.23 से अखंड पाठ की शुरुआत की गयी और आज दिनांक 27.11.23 तक लगातार पाठ करके समाप्ति की गयी। इसके पश्चात शब्द कीर्तन बच्चों,महिलाओं एवं ग्रंथि जी के द्वारा किया गया। इस अवसर पर बच्चों को सम्मानित भी किया गया तथा इसके उपरान्त गुरु घर में अटूट लंगर बांटा गया जिसमे श्रद्धालुओं ने भी हर्षोल्लास के साथ हिस्सा लिया।

अब डीएमसीएच में 250 छात्रों का होगा नामांकन - मंत्री-पी.एच.ई.डी.

November 27, 2023
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27.11.2023 (दरभंगा) : मंत्री लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग, ललित कुमार यादव ने जिला अतिथि गृह में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एवं उप मुख्यमंत्री सह स्वास्थ्य मंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव द्वारा आज दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल को 2742.04 करोड़ रुपये की लागत से पुनर्विकसित करने की योजनान्तर्गत प्रतिवर्ष 250 नामांकन के शैक्षणिक भवन एवं 2100 शैय्या के अस्पताल तथा राजकीय महारानी रामेश्वरी भारतीय चिकित्सा विज्ञान संस्थान मोहनपुर दरभंगा के लिए भवन, 194.08 करोड़ की लागत से 400 शैय्या के सर्जिकल ब्लॉक इस क्षेत्र के लिए सौगात प्रदान किया गया। उन्होंने कहा कि पहले डीएमसीएच में 100 नामांकन होता था, अब यहाँ प्रतिवर्ष 250 नामांकन किया जाएगा।

शोभन के पास एम्स बनेगा तो दरभंगा शहर का नया विस्तार होगा और क्षेत्र में तेजी से विकास होगा

November 27, 2023
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27.11.2023 (दरभंगा) : बिहार सरकार के जल संसाधन तथा सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री संजय कुमार झा ने दरभंगा में सोमवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि आज मिथिला के लिए एक बड़ा दिन है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने डीएमसीएच को पुनर्विकसित करने की ₹2742.04 करोड़ की योजना के तहत दरभंगा में 2500 बेड का नया हॉस्पीटल दिया है। साथ ही मुख्यमंत्री जी ने फिर स्पष्ट कर दिया है कि दरभंगा एम्स शोभन में ही बनेगा। इसके लिए उन्होंने विभागीय अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश भी दे दिये हैं। संजय कुमार झा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने डीएमसीएच परिसर में 400 बेड के नवनिर्मित सर्जरी ब्लॉक के भवन का उद्घाटन किया है, जिसमें कुछ दिनों में ही इलाज शुरू हो जाएगा। इसके अलावा उन्होंने 2100 बेड के नये अस्पताल के साथ-साथ प्रतिवर्ष 250 नामांकन के मेडिकल कॉलेज भवन का शिलान्यास किया।

अब पटना के पीएमसीएच के बाद दरभंगा का डीएमसीएच संभवत: बिहार का दूसरा सबसे बड़ा अस्पताल हो जाएगा। इस बड़ी सौगात के लिए हम सभी मिथिलावासियों की ओर से माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार और माननीय उपमुख्यमंत्री सह स्वास्थ्य मंत्री श्री तेजस्वी यादव के प्रति आभार प्रकट करते हैं। संजय कुमार झा ने कहा कि दरभंगा में एम्स बनेगा, यह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तय किया था। इस वर्ष जनवरी में समाधान यात्रा के दौरान उन्होंने एम्स के लिए शोभन-एकमी बाईपास के निकट चिह्नित भूमि की स्थल पर जाकर समीक्षा करने के बाद उसकी स्वीकृति दी थी। बिहार सरकार एम्स निर्माण के लिए 151.17 एकड़ जमीन मुफ्त जमीन देने के साथ-साथ उसमें मिट्टी भराई के लिए भी 309 करोड़ से अधिक रुपये कैबिनेट से मंजूर कर कार्य का टेंडर जारी कर चुकी थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने उक्त भूमि को लो लैंड बताते हुए वहां एम्स निर्माण से इनकार कर दिया था।

मुख्यमंत्री बार-बार कह चुके हैं कि शोभन में चिह्नित भूमि में मिट्टी भराने और वहां तक फोरलेन कनेक्टिविटी देने सहित उस भूमि के विकास के लिए जो भी काम जरूरी होगा, राज्य सरकार अपने संसाधनों से करायेगी। बिहार सरकार की तरफ से उपमुख्यमंत्री सह स्वास्थ्य मंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मांडविया जी को जून और अगस्त माह में पत्र लिख कर आवंटित भूमि की विशेषताओं की जानकारी दी थी। अब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से दरभंगा एम्स के संबंध में पत्र मिला है। उसमें कहा गया है कि बिहार सरकार कोई दूसरी भूमि प्रस्तावित करे या शोभन में प्रस्तावित भूमि में मिट्टी भरा कर और वहां तक सड़क बना कर दे।

हमलोग पहले से कह रहे थे कि प्रस्तावित भूमि में यह काम कराएंगे। अप्रैल 2023 में ही केंद्रीय टीम आई थी, यदि उसी समय चिट्ठी दे देते कि ये सब काम करा दीजिए तो अब तक मिट्टी भराई हो गई होती। केंद्र के पत्र के जवाब में बिहार सरकार फिर बताएगी कि वहां मिट्टी भराने और फोरलेन कनेक्टिविटी देने के लिए तैयार हैं। केंद्र यदि इसे स्वीकार कर लेता है तो यह काम तेजी से करा दिया जाएगा। बिहार सरकार का स्पष्ट मानना है कि शोभन के पास एम्स बनेगा तो दरभंगा शहर का नया विस्तार होगा और क्षेत्र में तेजी से विकास होगा।

संजय कुमार झा ने कहा कि केंद्र सरकार ने दरभंगा में 750 बेड के एम्स निर्माण की करीब 1200 करोड़ की योजना मंजूर की, जिसके लिए मुफ्त जमीन देने, मिट्टी भराई और सड़क निर्माण का काम राज्य सरकार को कराना है। जबकि राज्य सरकार ने डीएमसीएच को पुनर्विकसित करने की ₹2742.04 करोड़ की योजना के तहत दरभंगा में 2500 बेड का नया हॉस्पीटल दिया है। दोनों का निर्माण हो जाने के बाद दरभंगा इलाज का बड़ा केंद्र बन जाएगा। इस मौके पर बिहार सरकार के मंत्री, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग ललित कुमार यादव, बेनीपुर के विधायक विनय कुमार चौधरी और जदयू के दरभंगा जिलाध्यक्ष गोपाल मंडल भी मौजूद थे।
   होली  क्रॉस स्कूल - 31वाँ दो दिवसीय वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता
                    दरभंगा प्रेस क्लब का उद्घाटन - 2025
                             बिहार पुलिस सप्ताह 2025
              पुलिस पुरस्कार समारोह (दरभंगा) - 2024
SN Sarraf Hospital Darbhanga
SN Sarraf Hospital Darbhanga Press Conference
         दरभंगा मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल - पुरस्कार समारोह

23.02.2024 23.02.2024 (दरभंगा) छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से खचाखच भरे ऑडिटोरियम में 90 यूजी और 24 पीजी गोल्ड मेडल बांटे गए। डॉ आसिफ शाहनवाज के नेतृत्व में पूरी तरह से गढ़े हुए आयोजन मैं छात्रों और विभागों के उम्मीदें परवान चढ़ती हुई नजर आई। दिन रात की परिश्रम को सोने के मेडल में बदलते हुए देखकर छात्रों के दिल उछल गए। विभागाध्यक्षों और स्पॉन्सर की मौजूदगी में प्राचार्य और अधीक्षक द्वारा गोल्ड मेडल प्रदान किया गया।
                      मिथिला हाट - अररिया संग्राम
                      होली क्रॉस स्कूल समारोह - 2022
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डॉ त्यागराजन एस एम चैंपियन डीएम बने

10.08.2021 (दरभंगा) : सीएम नीतीश कुमार द्वारा बिहार में 01 जुलाई से 06 माह में 06 करोड़ वयस्कों को लगेगा टीका टीकाकरण महाअभियान चलाया जा रहा है। दरभंगा जिला में डीएम डॉ. त्यागराजन एस.एम की निगरानी एवं अनुश्रवण में चलाए जा रहे टीकाकरण महाअभियान दरभंगा में 06 माह में लगेगा 26 लाख वयस्कों को टीका के तहत दरभंगा जिले के सभी प्रखण्डों एवं शहरी स्थाई टीकाकरण केन्द्र ने सारे रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार अब तक दरभंगा के 9 लाख से अधिक लोगों का टीकाकरण किया जा चुका है। स्वास्थ्य विभाग, बिहार द्वारा कोविड-19 टीकाकरण महाअभियान की राज्य स्तरीय समीक्षा में कोविड 19 वैक्सीनेशन प्रोग्राम में सर्वाधिक उत्कृष्ट कार्य के लिए दरभंगा के डीएम डॉ. त्यागराजन एस.एम को चैंपियन डीएम के ख़िताब से नवाजते हुए प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। उल्लेखनीय है कि पटना व पूर्वी चंपारण के डीएम को भी चैंपियन डीएम के ख़िताब से नवाजा गया है।
डीएम को कोविड-19 टीकाकरण में शानदार प्रदर्शन एवं सफल संचालन हेतु मिला प्रमाण पत्र

10.08.2021 (पटना) : डीएम डॉ चंद्रशेखर सिंह को कोविड-19 टीकाकरण के सुगम, सुचारू एवं सफल संचालन करने तथा शानदार प्रदर्शन करने हेतु स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव द्वारा प्रशंसा पत्र प्रदान किए गए हैं। जिला के इस महत्वपूर्ण एवं शानदार उपलब्धि के लिए अधिकारियों कर्मियों मीडिया कर्मियों एवं बुद्धिजीवियों ने उन्हें बधाई दी है तथा उनके द्वारा किए गए कार्य को अद्वितीय एवं अविस्मरणीय बताया गया। दूसरी ओर डीएम ने इसे अधिकारियों कर्मियों एवं जिलावासियों के समन्वित प्रयास तथा पूरी टीम का सम्मान एवं प्रतिफल बताया है।
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04.07.2019 (दरभंगा): दिल्ली में दरभंगा के सांसद गोपाल जी ठाकुर ने केंद्रीय रेल और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात कर दरभंगा सहित मिथिलांचल के सर्वांगीण विकास हेतु विभिन्न ज्ञापन सौंप रेल मंत्री का ध्यान आकृष्ट किया।
                        बिहार पुलिस सप्ताह - 2019
दरभंगा : एसएसपी बाबू राम के नेतृत्व में बिहार पुलिस सप्ताह 22 फरवरी से 27 फरवरी के अंतर्गत कई कार्यक्रम आयोजित किये गए। जिसमे स्कूली बच्चों द्वारा रन फॉर पीस, पेंटिंग प्रतियोगिता, ऑटो चालकों के द्वारा जागरूकता रथ आदि। सभी कार्यक्रम का थीम था नशामुक्त हो समाज, ट्रैफिक नियमों का पालन करें।
Lalit Narayan Mithila University
                          गणतंत्र दिवस - 2019
                        स्वतंत्रता दिवस समारोह - 2018
विशेष प्रोफ एस. के. सिंह, कुलपति, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय
द्वारा : मनीष कुमार सिन्हा
प्रोफेसर एस के सिंह ने दरभंगा ऑनलाइन के साथ शिक्षक प्रशिक्षण के लिए यूनिसेफ के साथ समझौता ज्ञापन हस्ताछर और विश्वविद्यालय दूरस्थ शिक्षा में डिजिटल मोड के माध्यम से सामग्री के वितरण के बारे मे बात की.
                             पटना एसएसपी मनु महाराज


पटना एसएसपी मनु महाराज - साइकिल एक तरफ जहां स्वास्थ के लिए अच्छा है वहीं एक आम आदमी के भेष मे होने से बहुत सारी ऐसी बातों का पता लगता हैं जिससे की पोलिसिंग बेहतर करने मे मदद मिलती है.
                 मानस बिहारी वर्मा को पद्मश्री सम्मान


दरभंगा के निवासी, मानस बिहारी वर्मा, तेजस के पूर्व कार्यक्रम निदेशक, भारत के पहले स्वदेशी बहु-भूमिका सुपरसोनिक लड़ाकू विमान को उनके योगदान के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया गया।.
विशेष मिथिला लोक उत्सव २०१७ - दुखी राम रसिया द्वारा मनमोहक प्रदर्शन
द्वारा : मनीष कुमार सिन्हा
                        स्वतंत्रता दिवस समारोह - 2017
   विग्रहपुर मे बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रम मे जिला पदाधिकारी


28.04.2017 (पटना):विग्रहपुर मोहल्ले मे बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रम मे भाग लेने पहुँचे जिला पदाधिकारी डॉ संजय कुमार अग्रवाल ने बच्चों को शिखा के लिए प्रोत्साहित किया. जिला पदाधिकारी की उपस्थिति ने बच्चों का हौसला बढ़ाया और बच्चे काफी उत्साहित हुए.
                        बिहार प्रदेश मारवाड़ी सम्मलेन


23.04.2017 (पटना):बिहार प्रादेशिक मारवाड़ी सम्मलेन एक ऐसी संस्था है जो समाज कल्याण की बिभिन्न क्षेत्रों में भी सक्रिय है. इस संस्था को दहेज़ प्रथा उन्मूलन, नशा उन्मूलन आदि बिभिन्न सामाजिक कल्याण के कार्योँ में भी अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए - महामहिम राम नाथ कोविंद ने स्थानीय बिहार चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स के सभागार में आयोजित बिहार प्रादेशिक मारवाड़ी सम्मलेन के खुले अधिवेशन को मुख अतिथि के रूप में सम्बोधित करते हुआ उक्त विचार व्यक्त किये.
         महात्मा गाँधी सत्याग्रह सताब्दी वर्ष का आयोजन


गांधीजी के सत्य और अहिंसा के सिद्धांत की पहली वास्तविक प्रयोगशाला बनने का सौभागय बिहार की चम्पारण की धरती को प्राप्त है. सत्य और अहिंसा के प्रयोग को आज आचरण में उतारने की आवश्यकता है. जातीयता , धार्मिक रूढ़ियाँ, बाह्याडम्बर, क्षेत्रबाद, संकीर्णता आदि से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानना ही चम्पारण सत्याग्रह के सताब्दी आयोजन की सही सार्थकता होगी. - महामहिम राज्यपाल श्री राम नाथ कोविंद।