November 27, 2023

27.11.2023 (दरभंगा) : बिहार सरकार के जल संसाधन तथा सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री संजय कुमार झा ने दरभंगा में सोमवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि आज मिथिला के लिए एक बड़ा दिन है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने डीएमसीएच को पुनर्विकसित करने की ₹2742.04 करोड़ की योजना के तहत दरभंगा में 2500 बेड का नया हॉस्पीटल दिया है। साथ ही मुख्यमंत्री जी ने फिर स्पष्ट कर दिया है कि दरभंगा एम्स शोभन में ही बनेगा। इसके लिए उन्होंने विभागीय अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश भी दे दिये हैं। संजय कुमार झा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने डीएमसीएच परिसर में 400 बेड के नवनिर्मित सर्जरी ब्लॉक के भवन का उद्घाटन किया है, जिसमें कुछ दिनों में ही इलाज शुरू हो जाएगा। इसके अलावा उन्होंने 2100 बेड के नये अस्पताल के साथ-साथ प्रतिवर्ष 250 नामांकन के मेडिकल कॉलेज भवन का शिलान्यास किया।
अब पटना के पीएमसीएच के बाद दरभंगा का डीएमसीएच संभवत: बिहार का दूसरा सबसे बड़ा अस्पताल हो जाएगा। इस बड़ी सौगात के लिए हम सभी मिथिलावासियों की ओर से माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार और माननीय उपमुख्यमंत्री सह स्वास्थ्य मंत्री श्री तेजस्वी यादव के प्रति आभार प्रकट करते हैं। संजय कुमार झा ने कहा कि दरभंगा में एम्स बनेगा, यह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तय किया था। इस वर्ष जनवरी में समाधान यात्रा के दौरान उन्होंने एम्स के लिए शोभन-एकमी बाईपास के निकट चिह्नित भूमि की स्थल पर जाकर समीक्षा करने के बाद उसकी स्वीकृति दी थी। बिहार सरकार एम्स निर्माण के लिए 151.17 एकड़ जमीन मुफ्त जमीन देने के साथ-साथ उसमें मिट्टी भराई के लिए भी 309 करोड़ से अधिक रुपये कैबिनेट से मंजूर कर कार्य का टेंडर जारी कर चुकी थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने उक्त भूमि को लो लैंड बताते हुए वहां एम्स निर्माण से इनकार कर दिया था।
मुख्यमंत्री बार-बार कह चुके हैं कि शोभन में चिह्नित भूमि में मिट्टी भराने और वहां तक फोरलेन कनेक्टिविटी देने सहित उस भूमि के विकास के लिए जो भी काम जरूरी होगा, राज्य सरकार अपने संसाधनों से करायेगी। बिहार सरकार की तरफ से उपमुख्यमंत्री सह स्वास्थ्य मंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मांडविया जी को जून और अगस्त माह में पत्र लिख कर आवंटित भूमि की विशेषताओं की जानकारी दी थी। अब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से दरभंगा एम्स के संबंध में पत्र मिला है। उसमें कहा गया है कि बिहार सरकार कोई दूसरी भूमि प्रस्तावित करे या शोभन में प्रस्तावित भूमि में मिट्टी भरा कर और वहां तक सड़क बना कर दे।
हमलोग पहले से कह रहे थे कि प्रस्तावित भूमि में यह काम कराएंगे। अप्रैल 2023 में ही केंद्रीय टीम आई थी, यदि उसी समय चिट्ठी दे देते कि ये सब काम करा दीजिए तो अब तक मिट्टी भराई हो गई होती। केंद्र के पत्र के जवाब में बिहार सरकार फिर बताएगी कि वहां मिट्टी भराने और फोरलेन कनेक्टिविटी देने के लिए तैयार हैं। केंद्र यदि इसे स्वीकार कर लेता है तो यह काम तेजी से करा दिया जाएगा। बिहार सरकार का स्पष्ट मानना है कि शोभन के पास एम्स बनेगा तो दरभंगा शहर का नया विस्तार होगा और क्षेत्र में तेजी से विकास होगा।
संजय कुमार झा ने कहा कि केंद्र सरकार ने दरभंगा में 750 बेड के एम्स निर्माण की करीब 1200 करोड़ की योजना मंजूर की, जिसके लिए मुफ्त जमीन देने, मिट्टी भराई और सड़क निर्माण का काम राज्य सरकार को कराना है। जबकि राज्य सरकार ने डीएमसीएच को पुनर्विकसित करने की ₹2742.04 करोड़ की योजना के तहत दरभंगा में 2500 बेड का नया हॉस्पीटल दिया है। दोनों का निर्माण हो जाने के बाद दरभंगा इलाज का बड़ा केंद्र बन जाएगा। इस मौके पर बिहार सरकार के मंत्री, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग ललित कुमार यादव, बेनीपुर के विधायक विनय कुमार चौधरी और जदयू के दरभंगा जिलाध्यक्ष गोपाल मंडल भी मौजूद थे।
November 27, 2023

27.11.2023 (दरभंगा) : बिहार की गठबंधन के मुखिया नीतीश कुमार जनता की आंखों में धूल झोंककर सिर्फ शिलापट्ट की राजनीति करते है। उक्त बातें दरभंगा सांसद डॉ गोपाल जी ठाकुर ने सीएम नीतीश कुमार के दरभंगा दौरे को लेकर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डीएमसीएच की जिस आधे अधूरे निर्मित सर्जिकल भवन का आनन फानन में शुभारंभ किए है, दरअसल में वह भाजपा की देन है और इसका शिलान्यास भाजपा के स्वास्थ्य मंत्री द्वारा रखा गया था। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री 2024 चुनाव को देखते हुए आधा अधूरा निर्मित सर्जिकल भवन का शुभारंभ कर मिथिला के करोड़ों जनता की आंख में धूल झोंकने का कार्य किए है।
उन्होंने कहा कि इस भवन में अभी तक पानी सहित अन्य मूलभूत चीजे नही पहुंची है, ओटी और वार्ड का निर्माण अधूरा है, ऐसे में यहां मरीजों का इलाज संभव नहीं है तो सीएम द्वारा इसका शुभारंभ करना सिर्फ एक राजनीतिक स्टंट है। उन्होंने कहा कि पुराने सर्जिकल भवन के जर्जर होने जाने के बाद इस नए सर्जिकल भवन का निर्माण प्रारंभ किया गया था। सांसद ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शिलापट्ट लगाने के शौकीन है, इनके शिलान्यास का आलम यह है कि उनके सरकार द्वारा दरभंगा के बहेड़ी में 100 बेड वाले हॉस्पिटल के निर्माण हेतु 2009 में ही शिलान्यास किया गया था और 14 वर्ष बीत जाने के बाद भी आज तक वहां एक ईट भी नही लग सका है। जब 2010 में वह बेनीपुर से विधायक बने तब जाकर 30 बेड वाले अस्पताल का निर्माण करवाए। वही हाल बेनीपुर अनुमंडलीय अस्पताल का हुआ, जहां चार वर्षों तक ताला लगा रहा, बाद में वह अपने विधायक काल में अश्विनी चौबे को बुलाकर कर अस्पताल का शुभारंभ करवाए तब जाकर वहां मरीजों का इलाज प्रारंभ हो सका। सांसद डॉ ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा डीएमसीएच के पुनर्विकास की बात सिर्फ दरभंगा एम्स को अटकाने, लटकाने और भटकाने का एक राजनीतिक एजेंडा है।
उन्होंने कहा कि अगर इनको डीएमसीएच का इतना फिक्र होता तो बीते तैंतीस वर्ष से अधिक समय से बिहार में घमंडिया गठबंधन के लालू और नीतीश की सरकार है। साठ वर्ष पहले डीएमसीएच में 1050 बेड लगाने को स्वीकृति दी गई थी परंतु छः दशक से अधिक बीत जाने के बाद भी आज तक 300 बेड लगाने का कार्य अधूरा पड़ा है। सांसद ने कहा कि उनके अथक प्रयास से दरभंगा एम्स निर्माण हेतु बिहार सरकार द्वारा डीएमसीएच की 300 एकड़ जमीन में से 200 एकड़ जमीन भारत सरकार को कैबिनेट के माध्यम से हस्तांतरित किया गया था। प्रथम चरण में 81 एकड़ जमीन स्टांप पेपर पर हस्तांतरित करने के बाद इस स्थल पर पूर्व से मौजूद डॉक्टर्स क्वार्टर सहित कई अन्य ढांचा को ध्वस्त किया गया वहीं कई विभागों को अन्यत्र शिफ्ट किया गया था।
उन्होंने कहा कि लगभग 14 करोड़ की लागत से इस भूभाग पर मिट्टी भराई का कार्य भी संपन्न हो गया था लेकिन बिहार सरकार अपने एम्स विरोधी मंशा के कारण जानबूझकर डीएमसीएच को विस्तार करने का झूठा प्रोपोगेंडा फैलाकर एम्स के निर्माण में रोड़ा अटकाने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि बिना कोई रोडमैप बनाए हुए डीएमसीएच के पुनर्विकास की बात करना जनता के साथ छलावा है। सांसद ने कहा कि नीतीश कुमार अपने पूरे कार्यकाल में डीएमसीएच में न्यूरो, हर्ट, कैंसर सहित अन्य कोई सुपर स्पेशलिटी सुविधा उपलब्ध नहीं करा पाए यहां तक कि एक नाला निर्माण भी इनके कार्यकाल में डीएमसीएच में नही हो सका। सांसद डॉ ठाकुर ने कहा कि कल तक बिहार सरकार के मुख्यमंत्री और मंत्री, दरभंगा एम्स के स्थल चयन को लेकर भारत सरकार से पत्र की मांग कर रहे थे। उनके मंत्री कहते थे कि भारत सरकार आज पत्र दे तो बिहार सरकार कल से प्रस्तावित स्थल पर मिट्टी भराई का कार्य प्रारंभ कर देगी, परंतु भारत सरकार द्वारा 200 एकड़ अविवादित जमीन, बिजली, पानी, फोर लेन सड़क सहित अन्य बुनियादी सुविधा उपलब्ध कराने हेतु बीते आठ वर्षों से पत्र भेज रही है और बीते 10 नवंबर को पुनः पत्र भेज कर एक समय सीमा निर्धारित करने का अनुरोध किया है और उक्त पत्र भेजने के15 दिन से अधिक बीत जाने के वाबजूद बिहार सरकार कुंभकर्णी निद्रा में सोई हुई है। वहीं आज जब पत्रकार ने सीएम से दरभंगा एम्स को लेकर सवाल किया तो वह समय सीमा बताने के बजाय गोल मटोल जवाब दे रहे है, जो उनके एम्स विरोधी मानसिकता को जाहिर करता है।
उन्होंने कहा की मुख्यमंत्री श्री कुमार डीएमसीएच की 73 एकड़ अतिक्रमित जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने के मुद्दे पर एक शब्द भी नहीं बोले, जो उनकी सरकार और जमीन माफिया के बीच सांठ गांठ को दर्शाता है। भाजपा सांसद ने बिहार के स्वास्थ्य मंत्री तेजस्वी यादव द्वारा दरभंगा एम्स पर दिए गए बयान को शर्मनाक बताते हुए कहा कि अल्प ज्ञान होने का यही हश्र होता है। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव को यह बताना चाहिए कि किस किस राज्य में एम्स 500 करोड़ में निर्माण हुआ है। उन्होंने कहा कि क्या तेजस्वी यादव अपने राजनीतिक फायदे के लिए करोड़ों मिथिलावासी की स्वास्थ्य और जान माल का सौदा करना चाहते है।
सांसद ने कहा कि एम्स के निर्माण से शुभारंभ होने तक भारत सरकार इस परियोजना पर कई हजार करोड़ रुपया खर्च करेगी और एम्स के चालू हो जाने के पश्चात डॉक्टर, स्टाफ, मशीन, दवाई, रिसर्च सहित अन्य रख रखाव पर हजारों करोड़ रुपए सालाना खर्च करती है। परंतु इन्हे एम्स का क्रेडिट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को जाने का डर सता रहा है। अब इन्हे कौन समझाए की पीएम मोदी लोगों के दिल में निवास करते है। सांसद ने कहा कि बिहार सरकार का एम्स विरोधी चेहरा और एम्स विरोध का कारण अब खुलकर जनता के सामने आ गया है। आने वाले चुनाव में मिथिला की जनता इसका पूरा हिसाब करेगी।
November 27, 2023

27.11.2023 (दरभंगा) : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2742.04 करोड़ रुपये की लागत से दरभंगा चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल, दरभंगा को पुनर्विकसित करने की योजना अंतर्गत प्रति वर्ष 250 नामांकन के शैक्षणिक भवन एवं 2100 शैय्या के अस्पताल तथा राजकीय महारानी रामेश्वरी भारतीय चिकित्सा विज्ञान संस्थान, मोहनपुर, दरभंगा के निर्माण का फीता काटकर एवं शिलापट्ट अनावरण कर शिलान्यास किया। साथ ही मुख्यमंत्री ने 194.08 करोड़ रुपये की लागत से 400 शैय्या के सर्जिकल ब्लॉक सहित विभिन्न योजनाओं का फीता काटकर एवं शिलापट्ट अनावरण कर उद्घाटन किया। मुख्यमंत्री ने सर्जरी ब्लॉक में "दीदी की रसोई" का भी फीता काटकर शुभारंभ किया। इसके पश्चात् सर्जरी ब्लॉक एवं प्रसव कक्ष का मुख्यमंत्री ने मुआयना किया। अस्पताल परिसर के मुआयना के क्रम में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि वर्षा के मौसम में भी यहाँ जलजमाव की स्थिति उत्पन्न न हो, इसका ध्यान में रखते हुए निर्माण कार्य सुनिश्चत कराएं। ड्रेनेज सिस्टम को बेहतर बनाएं ताकि पानी की निकासी में दिक्कत न हो।
आज 2100 शैय्या के अस्पताल तथा राजकीय महारानी रामेश्वरी भारतीय चिकित्सा विज्ञान संस्थान का शिलान्यास कर दिया गया है, इसका निर्माण कार्य जल्द से जल्द शुरु कराएं। जब इसका निर्माण कार्य शुरु होगा तो उस समय पुनः हम यहां देखने आयेंगे। निर्माण कार्य पूर्ण हो जाने पर लोगों को इलाज में काफी सहूलियत होगी। जब हम सांसद थे और बाहर जब जाते थे तो हर जगह पी.एम.सी.एच. और डी.एम.सी.एच. के डॉक्टर मिल जाते थे। उन्होंने कहा कि दरभंगा में एम्स स्थापित करने के लिए शोभन काफी अच्छी जगह है, जिसको हमलोगों ने चिन्हित किया है। वहां आवागमन के लिए बेहतर कनेक्टविटी है, जहां लोग आसानी से पहुंच सकते हैं।
शोभन में एम्स बनने से दरभंगा शहर का विस्तारीकरण भी होगा। स्थानीय जन प्रतिनिधियों, जिला प्रशासन एवं दरभंगा मेडिकल कॉलेज तथा हास्पीटल प्रबंधन द्वारा मुख्यमंत्री को पुष्प गुच्छ देकर उनका अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री-सह-स्वास्थ्य मंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव, वित्त, वाणिज्यकर एवं संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी, जल संसाधन-सह-सूचना एवं जन-संपर्क मंत्री संजय कुमार झा, भवन निर्माण मंत्री अशोक चौधरी, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री ललित कुमार यादव, विधायक संजय सरावगी, विधायक अमन भूषण हजारी, विधायक विनय कुमार चौधरी, पूर्व केंद्रीय मंत्री अली अशरफ फातमी, पूर्व विधान पार्षद दिलीप चौधरी, स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, मुख्यमंत्री के सचिव अनुपम कुमार, दरभंगा प्रमंडल के आयुक्त डॉ. मनीष कुमार, दरभंगा प्रक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक विनय कुमार, दरभंगा के डीएम राजीव रौशन सहित अन्य वरीय अधिकारी एवं दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के चिकित्सकगण, कर्मीगण एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
कार्यक्रम के पश्चात् पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल का और विस्तार हमलोग कर रहे हैं। इसमें पहले से 400 बेड का अस्पताल बना हुआ है। यहां जब 2500 बेड का अस्पताल बन जाएगा तो यहां इलाज और बेहतर ढंग से होगा साथ ही मेडिकल की पढ़ाई भी बेहतर ढंग से होगी। यह बहुत महत्वपूर्ण जगह भी है, इसलिए इस मेडिकल कॉलेज में पढ़नेवालों की संख्या और बढ़ेगी। सुपर स्पेशयलिटी हॉस्पिटल भी बनकर तैयार है। डी.एम.सी.एच. को ही हम पहले एम्स बनाना चाह रहे थे। केंद्र के लोग पहले एग्री कर गए थे लेकिन फिर बाद में किसी कारण बस नहीं बन पाया।
दरभंगा एम्स बनाने को लेकर जनवरी में हमको जगह दिखाया गया। अब शोभन में एम्स बनाने को लेकर केंद्र से मंजूरी आ गई है। केंद्र सरकार की ओर से दरभंगा एम्स की ऊॅचाई जो पहले से निर्धारित थी उसको और बढ़ाने के लिए कहा गया है, हम उसको और बढ़ा रहे हैं। फोर लेन का निर्माण भी करा रहे हैं, इससे शहर का काफी विस्तार भी हो जाएगा। पटना के बाद बिहार में दूसरा एम्स दरभंगा में बनेगा जिसके लिए शोभन में जमीन चिह्नित कर ली गई है।
November 27, 2023

27.11.2023 (दरभंगा) : बिहार राज्य डाटा इंट्री/कंप्यूटर ऑपरेटर संघ के आवाह्न पर सेवा समायोजन की माँग को लेकर 28 एवं 29 नवम्बर 2023 को राज्यव्यापी दो दिवसीय हड़ताल के आवाहन के पूर्व संध्या पर 27 नवम्बर को मशाल जुलूस निकाला गया। मशाल जुलूस का प्रदर्शन पोलो फील्ड से आरंभ होकर आयुक्त कार्यालय, आई.जी कार्यालय, व्यवहार न्यायालय होते हुए लहेरियासराय टावर पर सभा आयोजित किया गया। जिसकी अध्यक्षता जय प्रकाश मेहता ने किया तथा प्रदर्शन का नेतृत्व बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के जिला मंत्री फूल कुमार ने किया। सभा को संबोधित करते हुए डाटा इंट्री ऑपरेटर संघ के जिलाध्यक्ष जय प्रकाश मेहता ने कहा कि हम लोग 20 वर्षों से लगातार सरकार की सेवा संविदा आधार पर कार्य कर रहे हैं। डाटा इंट्री ऑपरेटर प्रखंड कार्यालय से लेकर जिला एवं राज्य स्तरीय कार्यालय में अपना सेवा दे रहा है। राज्य सरकार द्वारा हमारा सेवा का समायोजन नहीं किया जा रहा है, इसलिए बाध्य होकर राज्य कमिटी ने राज्य सरकार का ध्यान आकृष्ट करने हेतु यह सांकेतिक हड़ताल है। यदि सरकार हमारी मांगे पर ध्यान नहीं दिया तो, हम लोग अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए बाध्य होंगे। इस अवसर पर कर्मचारी महासंघ के जिला मंत्री ने कहा कि संविदा, ठेका, मान्यदेय, आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को सरकारी सेवक घोषित करते हुए नियमित वेतन मान में समायोजन का संघर्ष राष्ट्रीय स्तर पर चल रहा है, हम एकबध्य होकर आंदोलन तेज करेंगे। इस अवसर पर मीडिया प्रभारी मनीष कुमार आनन्द ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि 28 एवं 29 को आयोजित हड़ताल को हमलोग पूर्ण सफल बनाएंगे तथा राज्य कमिटी के निर्णय के आलोक में आंदोलन तेज किया जाएगा।
November 27, 2023

26.11.2023 (दरभंगा) : विश्वविद्यालय राजनीति विज्ञान विभाग में विभाग के वरीय शिक्षक डॉ. मुकुल बिहारी वर्मा की अध्यक्षता में राष्ट्रीय सेवा योजना के संयुक्त तत्वावधान में संविधान दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। बतौर सामाजिक विज्ञान संकायाध्यक्ष प्रो. प्रभाष चंद्र मिश्रा ने कहा कि कोई भी देश या संस्था कानून से चलता है। इस कड़ी में लोकतंत्र व संविधान का अपना खासा महत्व है। बिना लोकतंत्र व संविधान के आप सभ्य व मर्यादित देशों की सूची में शुमार नहीं हो सकते हैं। अब करीब-करीब दुनिया के सभी देशों ने संविधान को स्वीकार किया है। अगर किसी भी देश में संविधान न हो तो वहां वजीर से लेकर प्यादा तक सब निरंकुश हो जाता है।
मजबूत लोग, कमजोर व समाज के अंतिम पंक्ति में बैठे लोगों को दबा देंगे। जिससे मानवाधिकार खतरे में आ जाता है। संविधान सभी मनुष्यों को समानता व बराबरी के साथ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ जीने का अधिकार प्रदान करता है। इसीलिए सिर्फ राजनीति विज्ञान व विधि के छात्रों को ही नहीं बल्कि सभी विषयों के विद्यार्थियों के साथ-साथ देश के हर नागरिकों को अपने संविधान की अनिवार्य रूप से जानकारी होनी चाहिये और इसे पढ़ना चाहिये। संविधान सिर्फ संसद, राजनेताओं व अधिवक्ताओं तक ही सीमित नहीं होना चाहिये। इसके लिये आम जनता को भी आगे आना चाहिये और संविधान को ज्यादा से ज्यादा जानने के प्रति जागरूकता लाना चाहिये। इससे देश को सशक्त होने में बल मिलता है। आज ही के दिन 26 नवंबर 1949 को भारतीय संविधान को बाबा साहब ने देश को समर्पित किया था जो कि 26 जनवरी 1950 को पूरे देश में लागू हुआ। हम अपनी ओर से इस अवसर पर सभी देशवासियों को बधाई व शुभकामनाएं प्रेषित करते हैं
। इस कार्यक्रम में बतौर विशिष्ट अतिथि मिथिला विश्वविद्यालय के उप-परीक्षा नियंत्रक (तकनीकी व व्यावसायिक शिक्षा) सह विभाग के युवा प्राध्यापक डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि पूरे विश्व में मानव सभ्यता के विकास के क्रम में आज तक जितने तंत्र हुए उसमें लोकतंत्र का अहम व शीर्ष स्थान है। लोकतंत्र शासन प्रणाली का सबसे सुगम व पारदर्शी तंत्र है। इस तंत्र में समाज के अंतिम पंक्ति में बैठे लोगों तक विकास व समानता की किरण पहुंचती है। राजतंत्र में यह तय होता था कि राजा का बेटा ही राजा होगा भले वो अयोग्य व अक्षम ही क्यों न हो लेकिन लोकतंत्र में भारतीय संविधान ने इसे मिथक को तोड़कर यह साबित करता आ रहा है कि अब रंक का समाज के अंतिम पंक्ति में बैठा बेटा भी राजा बन सकता है अगर वह सक्षम और योग्य है।
आजादी पूर्व देश के व्यापक क्षेत्र में राजतंत्र था। अंग्रेजी शासन के सदियों के कैद से मुक्त होने के बाद भारत ने अपने नयी उड़ान के लिये उस सभी प्रणाली को अपनाने का काम किया जिससे कि हिंदुस्तान के लोकतंत्र को विश्व पटल पर शीर्ष स्थान मिले। इसी को ध्यान में रखते हुए भारत ने लोकतंत्र में आस्था दिखाते हुए संविधान लागू करने का निर्णय लिया। संविधान मतलब कि ऐसा विधान जो सभी पर समान रूप से लागू होता हो और जिसके दायरे में वजीर से लेकर प्यादा तक को समानता व बराबरी का हक मिले। इसी क्रम में 2 वर्ष 11 माह 18 दिन के अथक प्रयास के बाद भारत ने 26 नवंबर 1949 को विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान लांच कर देश को समर्पित कर दिया। उस समय बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर नहीं होते तो हिंदुस्तान में संविधान की कल्पना करना मुश्किल था। कुछ तो बात है बाबा साहब के द्वारा लिखित संविधान में, तब तो आज हिंदुस्तान विश्वगुरु बनने की कतार में अग्रसर है। आज पूरे विश्व के किसी भी कोने में चले जाएं।
आपको सब कुछ मिल जायेगा लेकिन दूसरा हिंदुस्तान नहीं मिलेगा क्योंकि विविधताओं में एकता भारतीय संविधान व लोकतंत्र की सबसे बड़ी खूबसूरती है। हिंदुस्तान सर्वधर्म सम्भाव में विश्वास रखने वाला विश्व का अनूठा व एकमात्र धर्मनिरपेक्ष देश है। जहां सर्वधर्म का सम्मान करते हुए देश का सबसे पवित्र व हर धर्म का प्राथमिक ग्रन्थ संविधान को माना गया है और लोकतंत्र की पारदर्शी शासनप्रणाली अपनाई गई है जिसमें शासन कौन करेगा व शासक कौन होगा? यह जनता के वोटों के आधार पर तय होता है।संवैधानिक मूल्यों के प्रति भारत के विविध धर्मों व पंथों में विश्वास रखनेवाले 140 करोड़ भारतीयों में सम्मान की भावना व कानून के प्रति जागरूकता लाने के लिये पीएम मोदी ने वर्ष 2015 में संविधान निर्माता सह संविधान जनक बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के 125 वीं जयंती के अवसर पर इस दिन को संविधान दिवस के रूप में अपनाने का निर्णय लिया जिस पर सामाजिक न्याय और आधिकारिता मंत्रालय ने अपनी मुहर लगा दी।
साथ ही आज का दिन इस मामले में और भी पावन दिन माना जाता है क्योंकि राष्ट्रीय कानून दिवस भी आज ही मनाया जा रहा है। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में विभाग के वरीय शिक्षक डॉ. मुकुल बिहारी वर्मा ने भारतीय संविधान के विशेषताओं पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि आज हर हिंदुस्तानी को बाबा साहब द्वारा निर्मित इस संविधान पर गर्व है। हिंदुस्तान के पावन दिनों में 15 अगस्त भारत के आजादी के लिये, 26 जनवरी देश में गणतंत्र के स्थापना के लिये व 26 नवंबर देश को अपना संविधान मिलने के लिये सबसे पावन दिनों में शुमार है।
कुछ विद्यार्थी और शोधार्थी का बराबर यह जिज्ञासा रहता है कि जब संविधान 26 नवंबर 1949 को तैयार हुई तो इसे क्यों 2 महीने बाद 26 जनवरी 1950 से लागू किया गया? तो इसका कारण यह है कि 19 दिसंबर 1929 को कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में पंडित नेहरू को कांग्रेस का नया अध्यक्ष चुना गया और पूर्ण स्वराज की मांग की गई और इसी अधिवेशन में यह फैसला लिया गया कि जनवरी के आखिरी रविवार को देश का स्वतंत्रता दिवस मनाया जायेगा।
संयोग से यह तारीख 26 जनवरी 1930 निकली। इसीलिए इस दिन लाहौर के रावी नदी के किनारे पंडित नेहरू ने तिरंगा झंडा फहराया। इसीलिए इस दिन को पावन दिन माना गया। इसीलिए जब 26 नवंबर 1949 को भारत का संविधान तैयार हुआ तो उसे आगामी 26 जनवरी 1950 को देश में लागू किया गया और तब से 26 जनवरी को हमलोग गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते हैं। संविधान की असली प्रति प्रेम बिहारी नारायण रायजदा के द्वारा कैलीग्राफी के जरिये इटैलिक अक्षरों में लिखी गयी है। इसके हर पन्ने को कोलकाता के शांतिनिकेतन के दो कलाकार राममनोहर सिन्हा व नंदलाल बोस ने सजाया था। इस हस्तलिखित संविधान को आज भी देश के संसद के पुस्तकालय में हीलियम में रखा गया है ताकि ये खराब न हो सके।
251 पृष्ठों का यह संविधान 16 इंच चौड़ी, 22 इंच लंबे चर्मपत्र सीटों पर पांडुलिपि में लिखी गयी है। इसकी असली प्रति आज भी इंग्लिश और हिंदी दो प्रमुख भाषाओं में सुरक्षित है। संविधान दिवस के इस कार्यक्रम में मिथिला विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना समन्वयक डॉ. विनोद बैठा व महाराजा लक्ष्मेश्वर सिंह मेमोरियल महाविद्यालय, दरभंगा के राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम पदाधिकारी सुबोध कुमार यादव और शोध छात्र राम कृपाल ने भी शिरकत की और अपने-अपने विचार रखे। मंच संचालन विभाग के शिक्षक रघुवीर कुमार रंजन ने और अतिथियों का स्वागत आशुतोष पांडेय जबकि धन्यवाद ज्ञापन मिथिला विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना समन्वयक डॉ. विनोद बैठा ने किया।