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27.11.2023 (दरभंगा) : बिहार की गठबंधन के मुखिया नीतीश कुमार जनता की आंखों में धूल झोंककर सिर्फ शिलापट्ट की राजनीति करते है। उक्त बातें दरभंगा सांसद डॉ गोपाल जी ठाकुर ने सीएम नीतीश कुमार के दरभंगा दौरे को लेकर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डीएमसीएच की जिस आधे अधूरे निर्मित सर्जिकल भवन का आनन फानन में शुभारंभ किए है, दरअसल में वह भाजपा की देन है और इसका शिलान्यास भाजपा के स्वास्थ्य मंत्री द्वारा रखा गया था। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री 2024 चुनाव को देखते हुए आधा अधूरा निर्मित सर्जिकल भवन का शुभारंभ कर मिथिला के करोड़ों जनता की आंख में धूल झोंकने का कार्य किए है।

उन्होंने कहा कि इस भवन में अभी तक पानी सहित अन्य मूलभूत चीजे नही पहुंची है, ओटी और वार्ड का निर्माण अधूरा है, ऐसे में यहां मरीजों का इलाज संभव नहीं है तो सीएम द्वारा इसका शुभारंभ करना सिर्फ एक राजनीतिक स्टंट है। उन्होंने कहा कि पुराने सर्जिकल भवन के जर्जर होने जाने के बाद इस नए सर्जिकल भवन का निर्माण प्रारंभ किया गया था। सांसद ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शिलापट्ट लगाने के शौकीन है, इनके शिलान्यास का आलम यह है कि उनके सरकार द्वारा दरभंगा के बहेड़ी में 100 बेड वाले हॉस्पिटल के निर्माण हेतु 2009 में ही शिलान्यास किया गया था और 14 वर्ष बीत जाने के बाद भी आज तक वहां एक ईट भी नही लग सका है। जब 2010 में वह बेनीपुर से विधायक बने तब जाकर 30 बेड वाले अस्पताल का निर्माण करवाए। वही हाल बेनीपुर अनुमंडलीय अस्पताल का हुआ, जहां चार वर्षों तक ताला लगा रहा, बाद में वह अपने विधायक काल में अश्विनी चौबे को बुलाकर कर अस्पताल का शुभारंभ करवाए तब जाकर वहां मरीजों का इलाज प्रारंभ हो सका। सांसद डॉ ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा डीएमसीएच के पुनर्विकास की बात सिर्फ दरभंगा एम्स को अटकाने, लटकाने और भटकाने का एक राजनीतिक एजेंडा है।

उन्होंने कहा कि अगर इनको डीएमसीएच का इतना फिक्र होता तो बीते तैंतीस वर्ष से अधिक समय से बिहार में घमंडिया गठबंधन के लालू और नीतीश की सरकार है। साठ वर्ष पहले डीएमसीएच में 1050 बेड लगाने को स्वीकृति दी गई थी परंतु छः दशक से अधिक बीत जाने के बाद भी आज तक 300 बेड लगाने का कार्य अधूरा पड़ा है। सांसद ने कहा कि उनके अथक प्रयास से दरभंगा एम्स निर्माण हेतु बिहार सरकार द्वारा डीएमसीएच की 300 एकड़ जमीन में से 200 एकड़ जमीन भारत सरकार को कैबिनेट के माध्यम से हस्तांतरित किया गया था। प्रथम चरण में 81 एकड़ जमीन स्टांप पेपर पर हस्तांतरित करने के बाद इस स्थल पर पूर्व से मौजूद डॉक्टर्स क्वार्टर सहित कई अन्य ढांचा को ध्वस्त किया गया वहीं कई विभागों को अन्यत्र शिफ्ट किया गया था।

उन्होंने कहा कि लगभग 14 करोड़ की लागत से इस भूभाग पर मिट्टी भराई का कार्य भी संपन्न हो गया था लेकिन बिहार सरकार अपने एम्स विरोधी मंशा के कारण जानबूझकर डीएमसीएच को विस्तार करने का झूठा प्रोपोगेंडा फैलाकर एम्स के निर्माण में रोड़ा अटकाने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि बिना कोई रोडमैप बनाए हुए डीएमसीएच के पुनर्विकास की बात करना जनता के साथ छलावा है। सांसद ने कहा कि नीतीश कुमार अपने पूरे कार्यकाल में डीएमसीएच में न्यूरो, हर्ट, कैंसर सहित अन्य कोई सुपर स्पेशलिटी सुविधा उपलब्ध नहीं करा पाए यहां तक कि एक नाला निर्माण भी इनके कार्यकाल में डीएमसीएच में नही हो सका। सांसद डॉ ठाकुर ने कहा कि कल तक बिहार सरकार के मुख्यमंत्री और मंत्री, दरभंगा एम्स के स्थल चयन को लेकर भारत सरकार से पत्र की मांग कर रहे थे। उनके मंत्री कहते थे कि भारत सरकार आज पत्र दे तो बिहार सरकार कल से प्रस्तावित स्थल पर मिट्टी भराई का कार्य प्रारंभ कर देगी, परंतु भारत सरकार द्वारा 200 एकड़ अविवादित जमीन, बिजली, पानी, फोर लेन सड़क सहित अन्य बुनियादी सुविधा उपलब्ध कराने हेतु बीते आठ वर्षों से पत्र भेज रही है और बीते 10 नवंबर को पुनः पत्र भेज कर एक समय सीमा निर्धारित करने का अनुरोध किया है और उक्त पत्र भेजने के15 दिन से अधिक बीत जाने के वाबजूद बिहार सरकार कुंभकर्णी निद्रा में सोई हुई है। वहीं आज जब पत्रकार ने सीएम से दरभंगा एम्स को लेकर सवाल किया तो वह समय सीमा बताने के बजाय गोल मटोल जवाब दे रहे है, जो उनके एम्स विरोधी मानसिकता को जाहिर करता है।

उन्होंने कहा की मुख्यमंत्री श्री कुमार डीएमसीएच की 73 एकड़ अतिक्रमित जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने के मुद्दे पर एक शब्द भी नहीं बोले, जो उनकी सरकार और जमीन माफिया के बीच सांठ गांठ को दर्शाता है। भाजपा सांसद ने बिहार के स्वास्थ्य मंत्री तेजस्वी यादव द्वारा दरभंगा एम्स पर दिए गए बयान को शर्मनाक बताते हुए कहा कि अल्प ज्ञान होने का यही हश्र होता है। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव को यह बताना चाहिए कि किस किस राज्य में एम्स 500 करोड़ में निर्माण हुआ है। उन्होंने कहा कि क्या तेजस्वी यादव अपने राजनीतिक फायदे के लिए करोड़ों मिथिलावासी की स्वास्थ्य और जान माल का सौदा करना चाहते है।

सांसद ने कहा कि एम्स के निर्माण से शुभारंभ होने तक भारत सरकार इस परियोजना पर कई हजार करोड़ रुपया खर्च करेगी और एम्स के चालू हो जाने के पश्चात डॉक्टर, स्टाफ, मशीन, दवाई, रिसर्च सहित अन्य रख रखाव पर हजारों करोड़ रुपए सालाना खर्च करती है। परंतु इन्हे एम्स का क्रेडिट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को जाने का डर सता रहा है। अब इन्हे कौन समझाए की पीएम मोदी लोगों के दिल में निवास करते है। सांसद ने कहा कि बिहार सरकार का एम्स विरोधी चेहरा और एम्स विरोध का कारण अब खुलकर जनता के सामने आ गया है। आने वाले चुनाव में मिथिला की जनता इसका पूरा हिसाब करेगी।