September 24, 2024
24.09.2024 (DarbhangaOnline) (दरभंगा) : कवि कोकिल बाबा विद्यापति भारतीय साहित्य और संस्कृति के न केवल सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक पहचान है बल्कि सगुण भक्तिमार्ग मार्ग के जिस परंपरा को उन्होंने स्थापित किया आज भी हर सनातन धर्मावलंबियों के लिए एक उदाहरण है।
संसद के सेंट्रल हॉल में कवि कोकिल बाबा विद्यापति के तैल चित्र लग जानें से साढ़े आठ करोड़ मिथिलावासियों का जहां सम्मान बढ़ेगा वहीं सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की भावना भी मज़बूत बनेगी। दरभंगा के भाजपा सांसद तथा लोकसभा में पार्टी के सचेतक डा. गोपाल जी ठाकुर ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से भेंट कर इस सम्बंध में आग्रह करने के बाद उपरोक्त विचार व्यक्त किए। सांसद डा. ठाकुर ने बिहार विधानसभा के अध्यक्ष नंदकिशोर यादव के साथ संयुक्त रूप से लोकसभा अध्यक्ष श्री बिरला से भेंट कर उन्हे मिथिला की संस्कृति और परंपरा के अनुसार मखान की माला पाग तथा अंगवत्र से सम्मानित भी किया। सांसद डा ठाकुर ने लोकसभा अध्यक्ष को कवि कोकिल विद्यापति के बारे में बताते हुए कहा की वे न केवल कवि और संगीतकार थे बल्कि धर्म साहित्य न्याय दर्शन तथा कर्मकांड के महान् ज्ञाता थे जीनका यश और कीर्ति सम्पूर्ण विश्व में विख्यात है।
बाबा विद्यापति को भक्ति परंपरा का महान् साधक बताते हुए कहा की उनकी भक्ति भावना से प्रसन्न होकर त्रिलोकनाथ भगवान शिव स्वयं उनके यहां चाकरी करने के बहाने उनके सानिध्य मे बने रहने का अवसर प्राप्त किए थे और उनके अंत समय में मां गंगा उनके समीप आकर उन्हे अपने अंदर समाहित कर ब्रह्मलीन की थी। सांसद डा. ठाकुर ने लोकसभा अध्यक्ष को अनुरोध करते हुए कहा की संसद में विद्यापति के तैल चित्र लग जानें से सम्पूर्ण मिथिला क्षेत्र के लोगों का भावनात्मक सम्मान बढ़ेगा तथा मिथिला की संस्कृति देश के केंद्र बिंदु संसद में स्थापित होगी।