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16.08.2026 (DarbhangaOnline) (दरभंगा) : पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की आठवीं पुण्य तिथि के अवसर पर विद्यापति सेवा संस्थान के तत्वावधान में रविवार को श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। मौके पर अटल बिहारी वाजपेयी के चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। संस्थान के प्रधान कार्यालय में अध्यक्ष-सह- पूर्व कुलपति, कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय प्रो शशिनाथ झा की अध्यक्षता में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में मैथिली अकादमी के पूर्व अध्यक्ष पं कमला कांत झा ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी को मिथिला और मैथिली के प्रति विशेष लगाव था।

उनके दिलो दिमाग पर यह भाव जगाने में मिथिला के वरद् पुत्र एवं पूर्व सांसद आचार्य सुरेंद्र झा सुमन का विशेष योगदान था। अटल वचन, अटल धर्म, अटल मर्म और अटल कर्तव्य के अटल अनुयायी अटल बिहारी वाजपेयी के मैथिली को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने में उनके योगदान को मिथिलावासी कभी नहीं भुला सकते। उन्होंने कहा कि वाजपेयी के सपनों का मिथिला बनाने के लिए संगठित होकर मिथिला-मैथिली के विकास की मांगों को सही प्लेटफार्म पर रखा जाना समय की जरूरत है। जबकि अष्टम अनुसूची में शामिल मैथिली भाषा के अधिकारों का गहन चिंतन करते हुए मिथिला को विकास की पटरी पर लाने के लिए हमें एकजुट होकर प्रयास करना होगा। कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. बुचरू पासवान ने मिथिला मैथिली के विकास में वाजपेयी के योगदानों की चर्चा करते कहा कि जब हमें संवैधानिक अधिकार मिले हैं, तो प्राथमिक शिक्षा में मैथिली की पढ़ाई, धरोहर लिपि मिथिलाक्षर के संरक्षण व संवर्धन सहित राजकाज की भाषा मैथिली निश्चित रूप से बनेगी।

लेकिन इसके लिए हमें समय रहते अपने अधिकार एवं कर्तव्य का बोध करना होगा। उन्होंने अपने संबोधन में बदले हालातों में मिथिला ने क्या खोया और क्या पाया, इस विषय पर विचार विमर्श करने की जरूरत पर बल दिया। विश्वविद्यालय मैथिली विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. रमेश झा ने अपने संबोधन में खंडित मिथिला को एक सूत्र में बांधने के लिए कोसी नदी पर महासेतु के निर्माण और वाजपेयी के मिथिला, मैथिली व मैथिल से प्रेम व लगाव की विस्तार से चर्चि की। डॉ. उदय कांत मिश्र ने मिथिला एवं मैथिली की विकास यात्रा को रेखांकित करते हुए वाजपेयी जी को इसके विकास का पैरोकार बताया। विनोद कुमार झा ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने नाम के अनुरूप विकट आंधी-तूफान जन्य परिस्थितियों से जूझ कर देश के मान-प्रतिष्ठा तथा संस्कृति की रक्षा की। श्रद्धांजलि सभा का संचालन करते हुए संस्थान के मीडिया संयोजक प्रवीण कुमार झा ने मिथिला मैथिली के विकास में स्व. वाजपेयी के योगदानों की चर्चा करते हुए उन्हें मिथिला-मैथिली का सच्चा हितैषी बताया। उन्होंने कहा कि अटल जी की सरकार ने करोड़ों मिथिलावासी के माँ की भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कर एवं वर्षों से दो भाग में विभक्त होने का दंश झेल रहे मिथिला को एक करने का गौरवशाली उपहार प्रदान किया।

अपने संबोधन में उन्होंने अटल के सपनों का मिथिला बनाने के लिए पृथक मिथिला राज्य के गठन को जरूरी बताया। प्रो चंद्रशेखर झा बूढाभाई ने स्व वाजपेयी को भारतीय दर्शन एवं सांस्कृतिक चेतना को समर्पित व्यक्तित्व बताते हुए मिथिला को सब कुछ देने की चाहत रखने वाला महान व्यक्ति बताया। अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. शशिनाथ झा ने मातृभाषा मैथिली के प्रति मिथिला के लोगों में कम हो रहे भावनात्मक आकर्षण के प्रति चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि प्रतिभा के धनी इस क्षेत्र के लोगों को पढ़ाई, दवाई और कमाई के लिए आज भी पलायन करना पड़ रहा है, यह गंभीर चिंतन का विषय है। मौके पर आशीष चौधरी, नन्द कुमार झा, आदि ने भी अपने विचार रखे।