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25.04.2026 (DarbhangaOnline) (दरभंगा) : सीता नवमी के पावन अवसर पर शनिवार को विद्यापति सेवा संस्थान के तत्वावधान में " जानकी पूजनोत्सव सह मैथिली दिवस " समारोह का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन संस्थान के प्रधान कार्यालय परिसर स्थित मिथिला भवन के सभागार में हुआ, जहां जनप्रतिनिधियों, विद्वानों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही। कार्यक्रम का उद्घाटन सांसद डॉ. गोपाल जी ठाकुर, बेनीपुर विधायक प्रो. विनय कुमार चौधरी, केवटी विधायक डॉ. मुरारी मोहन झा, दरभंगा ग्रामीण विधायक ईश्वर मंडल, कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पांडेय सहित कई गणमान्य अतिथियों ने संयुक्त रूप से किया।

इस अवसर पर वक्ताओं ने मां जानकी के जीवन और उनके आदर्शों पर विस्तार से प्रकाश डाला। सांसद डॉ. गोपाल जी ठाकुर ने कहा कि मिथिला में मां जानकी का जन्म होना हम सभी के लिए गर्व की बात है। उन्होंने पुनौरा धाम में भव्य मंदिर निर्माण को लेकर भी खुशी जाहिर की। बेनीपुर विधायक विनय कुमार चौधरी ने जानकी नवमी के आयोजन को और भव्य बनाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि रामनवमी की तरह ही मां जानकी के जन्मोत्सव को भी व्यापक स्तर पर मनाया जाना चाहिए। वहीं, केवटी विधायक डॉ. मुरारी मोहन झा ने मां जानकी को नारी सशक्तिकरण का सशक्त प्रतीक बताया।

दरभंगा ग्रामीण विधायक ईश्वर मंडल ने जानकी नवमी को राष्ट्रीय पर्व घोषित करने की दिशा में प्रयास करने का संकल्प लिया। कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पांडेय ने मां जानकी को त्याग, समर्पण और आदर्श नारीत्व का सर्वोत्तम उदाहरण बताते हुए मिथिला की संस्कृति और संस्कार की महिमा को रेखांकित किया। कार्यक्रम में पूर्व कुलपतियों और विद्वानों ने भी मां जानकी के जीवन दर्शन पर अपने विचार रखे। अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. शशिनाथ झा ने मां जानकी को मिथिला की सांस्कृतिक धरोहर बताते हुए उनके चरित्र को विश्व के लिए अनुकरणीय बताया। इस दौरान डॉ. चंद्रमणि झा की पुस्तक ‘द लीडरः नरेंद्र डी. मोदी’ का विमोचन भी किया गया।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों में कलाकारों ने गीत-संगीत के माध्यम से समां बांधा। कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित जानकी सम्मेलन में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया और जानकी नवमी को घर-घर मनाने का आह्वान किया। इस मौके पर विभिन्न प्रतिभाओं को ‘जानकी सम्मान’ और ‘मैथिली गौरव सम्मान’ से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह मां सीता की प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा और विधिवत पूजा-अर्चना से हुई। आगत अतिथियों का स्वागत करते हुए विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव डा बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने कहा कि मां जानकी मिथिला के लोगों के रंग-रग में बसी हुई है।

लेकिन यह सबसे बड़ी त्रासदी है कि मिथिला के लोगों को आज भी मां जानकी की तरह कदम कदम पर अग्निपरीक्षा के दौर से गुजरना पड़ता है। मौके पर संस्थान की ओर से प्रस्ताव रखते हुए मैथिली अकादमी के पूर्व अध्यक्ष पं कमला कांत झा ने जनहित में यूजीसी बिल को वापस लिए जाने एवं बिहार गौरव गीत में मिथिला को शामिल किए जाने सहित लोक उत्सव में बाहरी कलाकारों को थोपने की बजाय स्थानीय कलाकारों को विशेष अवसर दिए जाने की ओर सभी का ध्यान केंद्रित किया।

सभागार में उपस्थित लोगों ने करतल ध्वनि से इस प्रस्ताव का स्वागत किया। आयोजन में शहर के कई गणमान्य लोग और बुद्धिजीवी उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और मां जानकी के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का संदेश दिया।