September 26, 2023

25.09.2023 (दरभंगा) : लक्ष्मीश्वर विलास पैलेस के सामने स्थित महाराजा लक्ष्मीश्वर सिंह की प्रतिमा पर इसमाद के सदस्यों ने माल्यार्पण कर उनकी जयंती मनाई। इसमाद के कार्यक्रम संयोजक अभिनव सिन्हा ने कहा कि भारत के महान राष्ट्रवादी, समाज सुधारक, नारी शिक्षा के समर्थक, भारत के पहले जन प्रतिनिधि और गौ रक्षा आंदोलन के जनक महाराजा लक्ष्मीश्वर सिंह जी की जयंती पर जहां दरभंगा समेत समूचे देश में धूम धाम से कार्यक्रम आयोजित होना चाहिए था वही देश तो छोड़िए दरभंगा में लगी उनकी प्रतिमा कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय में उपेक्षित रखी गई थी। इसमाद हर वर्ष की भाँति इस वर्ष भी राष्ट्रवादी चेतना के धनी व्यक्तित्व को उनके जयंती पर नमन करने के लिए माल्यर्पण का कार्य करता आ रहा है और आज इसी कड़ी में उनकी प्रतिमा को साफ कर उस पर पुष्पांजलि अर्पित की।
संतोष चौधरी ने माल्यार्पण के पश्चात विश्वविद्यालय में आए आगन्तुकों को प्रतिमा के नीचे महाराजा की जीवनी से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि आधुनिक युग में मिथिला प्रदेश की परिकल्पना का श्रेय महाराज लक्ष्मीश्वर सिंह को देना अतिशयोक्ति नहीं होगी। भाषा के रूप में ’मैथिली’ नामकरण भी लक्ष्मीश्वर सिंह ने ही किया। उन्नीसवीं शताब्दी के अंत तक भाषा के लिए ’मैथिली’ का प्रयोग नहीं होता था, उसे "तिरहुतिया भाषा" कहा जाता था। महाराजा ने अपने समयावधि में दरभंगा को जो दिया वो वर्तमान में किसी स्मार्ट सिटी की परिकल्पना से भी ऊपर है। उनकी देनों में राज स्कूल, गोशाला, बोटेनिकल गार्डेन, रेल लाइन, पुस्तकालय सहित कई छोटे बड़े लोहे के पुलों का भी निर्माण कराया ताकि राज दरभंगा की नदियों पर नेविगेशन की सुविधा हो सके। जनोपयोगी कार्यों के साथ-साथ उन्होंने दरभंगा सहित देश भर के शैक्षणिक संस्थानों को वित्तीय सहायता प्रदान की तथा चिकित्सा सहायता में भी योगदान दिया। गरीबों की सेवा के लिए खोला गया दो सौ बेड का दरभंगा में अस्पताल तत्कालीन बंगाल राज्य का दूसरा सबसे बड़ा चिकित्सालय था।
इसमाद के दरभंगा प्रभारी राहुल कुमार ने कहा कि हम सब के लिए यह चिंता का विषय है कि इतने महान व्यक्तित्व के जयंती पर उनकी प्रतिमा को उपेक्षित रखने के साथ साथ किसी भी तरह का कोई सरकारी कार्यक्रम आयोजित नहीं होना। यदि इसी तरह से उपेक्षा का भाव रखा गया तो आने वाली पीढ़ी मिथिला के शिल्पकार महाराजा लक्ष्मीश्वर सिंह के राष्ट्रवादी विचार से वंचित हो जाएगी। इस कार्यक्रम के दौरान कई आगन्तुकों ने मिथिला नरेश की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया जिनमें, अभिषेक, रौशन, संजीव, कुलदीप आदि मौजूद थे।