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14.01.2023 (दरभंगा) : सांसद डॉ. गोपाल जी ठाकुर ने अपने आवास पर मीडिया को सम्बोधित करते हुए कहा की आप सभी को ज्ञात है कि प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना अंतर्गत देश के यशस्वी प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी जी 8 करोड़ मिथिलावासी, सहित नेपाल के 14 जिला, पश्चिम बंगाल के 6 जिला एवं पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों के करोड़ों लोगों की स्वास्थ्य व्यवस्था को देखते हुए मिथिला के केंद्र दरभंगा में बिहार के दूसरे एम्स की स्थापना को मंजूरी प्रदान किए थे। और इसमें आप सभी प्रेस बंधुओं का भी सहयोग अविस्मरणीय है।

केंद्र की मोदी सरकार द्वारा वर्ष- 2015-16 के आम बजट में दरभंगा एम्स निर्माण हेतु प्रस्ताव पारित किया गया था। परंतु राज्य सरकार द्वारा उचित सहयोग नहीं मिलने के कारण इसका निर्माण ठंडा बस्ते में पड़ा रहा। वर्षों बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा डी०एम०सी०एच० को अधिग्रहण कर एम्स में परिवर्तित करने का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा गया। जिस पर केंद्र सरकार द्वारा सुझाव दिया गया कि अगर डी०एम०सी०एच० को रखते हुए एम्स का निर्माण होगा तो यहां के लोगों को दो-दो स्वास्थ्य संस्थानों का लाभ मिलेगा। परंतु राज्य के मुख्यमंत्री इसको अधिग्रहण करने पर अरे रहे। राज्य सरकार द्वारा उचित सहयोग नहीं मिलने के पश्चात भारत सरकार इस एम्स को अन्यत्र जगह शिफ्ट करने का विचार करने लगी। इस बीच मैं स्वयं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलकर उन स्वास्थ्य से जुड़े सबसे बड़े संस्थान दरभंगा एम्स के निर्माण हेतु डी०एम०सी०एच० की 200 एकड़ जमीन देने का आग्रह किया एवं इस पर विस्तारपूर्वक चर्चा किया। जिसके पश्चात मुख्यमंत्री डीएमसीएच के खाली पड़े 200 एकड़ जमीन दरभंगा एम्स को देने पर सहमति प्रदान किये। इसके पश्चात मैंने लोकसभा के माध्यम से दरभंगा एम्स निर्माण के मुद्दे को प्रमुखता से उठाने का कार्य किया एवं स्वास्थ्य मंत्री, गृहमंत्री एवं प्रधानमंत्री जी से मिलकर इसे कैबिनेट स्वीकृति देने का अनुरोध किया। जिसके बाद दिनांक- 20 सितंबर 2020 को प्रधानमंत्री जी के अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट द्वारा 1264 करोड़ की लागत से 750 बेड वाले एम्स निर्माण को स्वीकृति प्रदान की गई।

इसके पश्चात स्वास्थ्य मंत्रालय भारत सरकार द्वारा राज्य सरकार को इस निर्माण हेतु जमीन सहित अन्य संस्थान जल्द से जल्द उपलब्ध कराने हेतु कई बार पत्र एवं अन्य माध्यम से सूचना प्रेषित किया गया। परंतु राज्य सरकार के मुख्यमंत्री के उदासीन रवैया के कारण एक वर्ष से अधिक समय तक जमीन उपलब्ध नहीं कराया गया। महीनों बीत जाने के पश्चात में मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान जमीन राज्य कैबिनेट से स्वीकृत कर भारत सरकार को भेजने का अनुरोध किया। इसमें तत्कालीन राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री के विशेष परिश्रम के बाद नवंबर 2021 में राज्य कैबिनेट से डी०एम०सी०एच० की 200 एकड़ भूमि एम्स निर्माण हेतु भारत सरकार को सौंपने हेतु स्वीकृति प्रदान करते हुए केंद्र सरकार को कागजात भेजा गया। बिहार सरकार के तत्कालीन भाजपा कोटे से उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री के विशेष सहयोग से मैं इस जमीन पर मिट्टी भराई का कार्य लगभग 14 करोड़ की लागत से स्वीकृति दी गई। विदित हो कि मैं केंद्र सरकार के विभिन्न वरिष्ठ मंत्रियों एवं प्रधानमंत्री मिलकर दरभंगा एम्स के कार्यों में तेजी लाने हेतु निदेशक के जल्द नियुक्ति का आग्रह किया, और प्रधानमंत्री जी ने त्वरित संज्ञान लेते हुए एम्स निदेशक की नियुक्ति हेतु स्वीकृति प्रदान किए।

निदेशक एम्स ने 14 अगस्त 2022 को दरभंगा में अपना योगदान देते हुए एम्स को गति देने हेतु विभिन्न पहलुओं पर कार्य करने लगे। दिनांक- 6-9-2022 को डीएम, दरभंगा की अध्यक्षता में 81 एकड़ जमीन का भौतिक दखल कब्जा हस्तांतरण भी कर दिया गया। एवं आश्वासन दिया गया कि अगले कुछ महीनों में शेष जमीन हस्तांतरित कर दिया जाएगा। जमीन हस्तांतरण एवं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के दबाव के पश्चात इस भूमि पर मौजूद पुराने भवनों को तोड़कर ग्रीन फील्ड जमीन में परिवर्तन करने का कार्य प्रारंभ किया गया जो लगभग अंतिम चरण में है। फेज- 5 के तहत उसके उसके बाद स्वीकृत और सभी एम्स का कार्य लगभग पूरा होने की स्थिति में है। जिसमें भटिंडा एम्स कार्य पूर्ण, गुवाहटी एम्स- 71% कार्यपूर्ण, बिलासपुर-98% कार्यपूर्ण, सांभा-60% कार्यपूर्ण, अवंतीपुरा कार्यपूर्ण हो चुका है। परंतु दरभंगा एम्स का निर्माण राज्य सरकार द्वारा दिए जाने के वाले भूमि के अभाव में आज तक लंबित है। सांसद ने कहा की कुछ नेता एवं अन्य लोग प्रारंभ से ही दरभंगा में एम्स निर्माण नहीं हो इसको लेकर कई प्रकार के षड्यंत्र एवं कुचक्र रचते रहे हैं। आज जो लोग डीएमसीएच बचाओ की मांग करते हैं। यह लोग उस समय कहां थे जब मुख्यमंत्री जी पूरे डीएमसीएच को ही एम्स में परिवर्तित करने का मांग किये थे। पिछले 6 वर्षों से 200 एकड़ जमीन एम्स निर्माण हेतु उपलब्ध नहीं करा सके। क्या यह 8 करोड़ मिथिलावासियों के साथ एक साजिश नहीं है।

डीएमसीएच के 200 एकड़ जमीन एम्स को हस्तांतरित करने का फैसला नितीश कुमार जी का है। क्या यह अपने फैसले को पलटेंगे। क्या वह इतने असहाय हो गए हैं कि अपने अध्यक्षता में लिए गए फैसले को लागू करवाने में असमर्थ हो गए हैं। अथवा उन्हें 8 करोड़ मिथिलावासी के स्वास्थ्य का कोई फिक्र नहीं है। सांसद ने कहा की मुख्यमंत्री जी डीएमसीएच के 300 एकड़ जमीन को कब तक अतिक्रमण मुक्त करवा देंगे। महागठबंधन के एक नेता द्वारा अशोक पेपर मिल पर दिए गए बयान पर उन्होंने पूछा कि क्या राज्य कैबिनेट द्वारा लिया जाने वाला फैसला, कैबिनेट सुकृति से पहले ही लिक हो गया है, अथवा किसी साजिश के तहत सरकार द्वारा ही प्रयोजन रचा गया है। क्या बिहार कैबिनेट से 200 एकड़ जमीन को स्वीकृति प्रदान करने के महीनों बीत जाने के बावजूद भी उन्हें स्थल परिवर्तित करने का ख्याल आया है?

क्या मुख्यमंत्री जी आठ करोड़ मिथिला वासी सहित नेपाल, पश्चिम बंगाल एवं पूर्वोत्तर राज्य के लगभग 15 करोड़ लोगों के जान से खिलवाड़ करने का कसम खाकर बैठे हैं। क्या मुख्यमंत्री जी इस बात से अज्ञात हैं कि डीएमसीएच का परिसर में जो मिट्टीकरण हेतु वह स्वीकृति प्रदान किए हैं वह एम्स निर्माण हेतु नहीं है। क्या वह इस बात से अनजान थे कि पुराने भवनों को ध्वस्त करके एम्स नहीं खेल मैदान बनाया जाना प्रस्तावित है। क्या सरकार शोभन एवं अशोक पेपर मिल जैसे विवादित भूमि के नाम पर एम्स निर्माण को बाधित करेगी अथवा डीएमसीएच में हस्तांतरित जमीन पर निर्माण में सहयोग देगी।

सांसद ने कहा की मैं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से अनुरोध करता हूं कि जन स्वास्थ्य से जुड़े सबसे बड़े संस्थान दरभंगा एम्स के निर्माण में बाधा उत्पन्न नहीं करें। कुछ चंद लोगों के बहकावे में आकर करोड़ों बिहारवासी के जीवन के साथ खिलवाड़ ना करें। दरभंगा एम्स निर्माण हेतु प्रस्तावित 200 एकड़ जमीन सभी संसाधन सहित जल्द से जल्द केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को उपलब्ध करा दें ताकि एम्स निर्माण का कार्य जल्द प्रारंभ हो सके और लोगों को अतिशीघ्र बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल सके।