June 17, 2017

10.06.17(दरभंगा) : प्रजापति ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्विद्यालय के स्थानीय सेवा केंद्र के तत्वाधान में " तनाव मुक्त खुशनुमा जीवन " विषय पर आधारित कार्यक्रम में शिरकत करते हुए मुख्य वक्ता के रूप में टाटानगर से आयी हुई राजयोगिनी अंजू दीदी ने ख़ुशी शब्द को बड़े विस्तार से वर्णन करते हुए कहा की हर इंसान के जीवन में ख़ुशी बहुत मायने रखती है। थोड़ी सी ख़ुशी मिल जाने के बाद ये समझना चाहिए की अब मंजिल मिल गयी , ये कहना मुनासिब न होगा। जरूरत है इसे हमेशा बरकरार रखने की, और ये तभी संभव है जब इंसान ये सोचे की " ख़ुशी मंजिल नहीं, यात्रा है "।
" तनावमुक्त खुशनुमा जीवन " कार्यक्रम की शुरुआत विधिवत लहेरियासराय स्थित लोहिया धर्मशाला में हुई। सबसे पहले मंच पर आसीन सभी अतिथियों का स्वागत ब्र.कु.आरती , ब्र.कु. दिशा , ब्र.कु. पूजा ने पुष्पगुच्छ व फूलों से किया। इसके बाद कार्यक्रम का उद्घाटन आर. के. खंडेलवाल , कमिश्नर , दरभंगा ने दीप प्रज्वलित कर किया। कुमारी साक्षी ने स्वागत नृत्य कर अतिथियों एवं श्रोताओं का मन मोह लिया ।
मुख्य वक्ता के रूप में टाटानगर से आयीं राजयोगनि अंजू दीदी ने प्रोजेक्टर के माध्यम से कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों को " तनावमुक्त खुशनुमा जीवन " के टिप्स दिए। उन्होंने कहा की तनावमुक्त खुशनुमा जीवन के लिए हमेशा मन में ख़ुशी होना अति आवश्यक है। ख़ुशी एक ऐसा जादू है जो अगर मन में हो तो कोई भी कार्य मुश्किल नहीं है। आज हर कोई ख़ुशी की तलाश में है , अध्यात्म से जुड़ कर मन के मालिक बन कर जीवन खुशनुमा बनाया जा सकता है। राजयोगिनी अंजू दीदी ने कहा की ख़ुशी हमारी आंतरिक चीज है , जिसे हम कहीं और तलाश करते हैं। ख़ुशी का मतलब सकारात्मक अपेक्षा, दिल से जुड़ाव। ये तभी संभव होगा जब आध्यात्मिकता के द्वारा Self Realisation करें । अपने Belief System को मजबूत करना होगा। उन्होंने कहा की हमारा Belief System हमारे जीवन की दिशा तय करता है। छोटे-छोटे कार्य भी अगर ख़ुशी-ख़ुशी करें तो अनंत ख़ुशी मिलेगी। हमारी दृष्टि पर निर्भर करती है खुशी। क्षमा करने की आदत डालनी चाहिए। अंदर से शांत अवस्था बाहर की जिंदगी खुश कर सकती है। जीवन में छोटी-छोटी गलतफहमियां भी बड़ी से बड़ी खुशियों को निगल लेती है। किसी का आभार व्यक्त करना भी एक बड़ा गुण है। इससे भी ख़ुशी की अनुभूति प्राप्त होती है। उन्होंने ने कहा की राजयोगा मेडिटेशन के माध्यम से जीवन को खूब बेहतर बनायें।
मंच संचालन करते हुए ब्र.कु. सुधाकर ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों से कहा की मेडिटेशन को जीवन में अपनाकर खुशनुमा जीवन का आनंद ले सकते हैं।
धन्यवाद ज्ञापन करते हुए ब्र.कु. आरती ने कहा की राजयोगा मेडिटेशन नियमित करने से जीवन को खुशनुमा एवं तनावमुक्त बना सकते हैं।
उक्त कार्यक्रम में वरीय उपसमाहर्ता रमेश चंद्र चौधरी, भाजपा जिलाध्यक्ष हरी सहनी , शहर के कई गणमान्य डॉक्टर, प्रोफेसर एवं बुद्धिजीवी वर्ग ने उपस्थित होकर कार्यक्रम का आनंद लिया।
October 06, 2024
03.10.2024 (DarbhangaOnline) (दरभंगा) : दरभंगा के गंगासागर तालाब के पास वर्षों से उपेक्षित अवस्था में पड़े ऐतिहासिक विंटेज रोड रोलर को जल्द ही संरक्षित किया जायेगा। दरभंगा सड़क निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता प्रेम कुमार ने यह आश्वासन इसमाद फांडेशन के प्रतिनिधिमंडल को दिया है। "सेव दरभंगा विंटेज रोड रोलर" मुहिम के तहत इसमाद फाउंडेशन की ओर से संतोष चौधरी के नेतृत्व में रवि प्रकाश और अभिनव सिन्हा ने गुरुवार को विभागीय सचिव के नाम ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में इस ऐतिहासिक रोड रोलर के संरक्षण की मांग की गई थी, जिसे "जॉन फाउलर" कंपनी द्वारा ब्रिटिश काल में निर्मित बताया गया है।
ज्ञापन में कहा गया की यह धरोहर वर्तमान में अत्यंत खराब स्थिति में है, और इसके कई महत्वपूर्ण पुर्जे पहले ही गायब हो चुके हैं। यदि इसका जल्द संरक्षण नहीं किया गया, तो इसके अन्य हिस्सों के चोरी होने का भी खतरा है। इसमाद फाउंडेशन ने विभाग को पटना में स्थित एक अन्य विंटेज रोड रोलर के सफल संरक्षण की जानकारी भी दी, जिसे अब एक प्रमुख धरोहर के रूप में देखा जाता है। उसी तर्ज पर दरभंगा के इस विंटेज रोड रोलर को संरक्षित करने का आग्रह किया गया। ज्ञापन स्वीकार करते हुए कार्यपालक अभियंता प्रेम कुमार ने कहा की हम इस महत्वपूर्ण धरोहर के संरक्षण के लिए शीघ्र आवश्यक कदम उठाएंगे। विभागीय आदेश के अनुसार कार्यवाही जल्द शुरू की जाएगी, ताकि इस रोड रोलर को सुरक्षित रखा जा सके।
दरभंगा की जनता और धरोहर संरक्षण में रुचि रखने वाले सभी लोगों ने इस कदम का स्वागत किया है। इसमाद फाउंडेशन को उम्मीद है की इस रोड रोलर का संरक्षण कर इसे दरभंगा की ऐतिहासिक धरोहरों की सूची में सम्मिलित किया जाएगा, जिससे आने वाली पीढ़ियाँ इससे प्रेरणा ले सकेंगी। धरोहर के संरक्षण के लिए काम करनेवाली संस्था इसमाद फाउंडेशन के अथक प्रयास से ही लोहट चीनी मिल में उपेक्षित पड़े रेल इंजन को भी दरभंगा रेलवे स्टेशन पर संरक्षित किया जा चुका है।