November 21, 2019

14.11.2019 (दरभंगा) : एक अच्छे मानव बनने के लिए हमें समाजिक बऩना परम आवश्यक है। छात्रों को अपने पाठ्यक्रम के प्रति गंभीर होना आवश्यक है, क्योंकि इससे उन्हें रोजी-रोटी मिलती है,पर एक अच्छे मानव बनने के लिए उन्हें सामाजिक होना उससे भी कहीं अधिक जरूरी है। छात्रों के क्रियाकलाप,व्यवहार तथा उनकी सामूहिक जीवन उन्हें अलग पहचान दिलाती है। एनएसएस छात्रों को सामाजिक होना सिखाता है तथा बताता है कि उन्हें एक-दूसरे के लिए क्या करना चाहिए। समाजसेवा की कोई निश्चित उम्र नहीं होती। आज कुछ छात्र पाठ्यक्रम के आधार पर डिग्रीधारी बन रहे हैं, परंतु मानसिक सोच के आधार पर भिखारी। उक्त बातें सी एम कॉलेज की एनएसएस इकाई 1 एवं 2 के संयुक्त तत्वावधान में बाल दिवस पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए प्रधानाचार्य डा मुश्ताक अहमद ने कहा।
उन्होंने कहा कि हमें हमेशा दूसरों के लिए कुछ न कुछ करना चाहिए। उन्होंने छात्रों को जीवन में आगे बढ़ने के लिए उनके चरित्र-निर्माण तथा व्यक्तित्व- विकास को महत्वपूर्ण बताया। इस अवसर पर भारतवर्ष से संबंधित आयोजित क्विज प्रतियोगिता में निर्णायक डॉ शंकर झा,डॉ सुरेश पासवान तथा डॉ प्रीति त्रिपाठी के अनुसार रोहित कुमार पटेल- प्रथम,मुकेश कुमार-द्वितीय तथा आयशा प्रवीण-तृतीय स्थान सहित जयप्रकाश साहू, पुरुषोत्तम कुमार चौधरी, रोहित कुमार, संतोष कुमार यादव, दीप शंकर, अमित कुमार शुक्ल तथा नारायण जी साहू को बेहतर प्रदर्शन हेतु प्रमाण पत्र तथा मेडल प्रदान कर सम्मानित किया गया, जबकि राष्ट्र-निर्माण में नेहरु का योगदान विषयक भाषण-प्रतियोगिता में निर्णायक डॉ आर. एन. चौरसिया, प्रोo अखिलेश राठौर तथा डॉ. प्रीति त्रिपाठी के अनुसार श्रेया कुमारी प्रथम, शशिकांत सिंह यादव द्वितीय तथा सुधांशु कुमार रवि-तृतीय सहित पुरुषोत्तम कुमार चौधरी, रिचा कुमारी, अतिका बद्र, जयप्रकाश कुमार साहू, अमित कुमार शुक्ला, दीप शंकर तथा आस्था निगम को बेहतर अंक लाने हेतु प्रमाण पत्र तथा मेडल प्रदान कर उत्साहवर्धन किया गया।
November 21, 2019

13.11.2019 (दरभंगा) : LNMU दरभंगा एवं यूनिसेफ, बिहार इकाई के संयुक्त तत्वाधान में एक तीन दिवसीय कार्यशाला (दिनांक 13 से 15 नवंबर 2019 ) तक विषय डेवलोपमेन्ट ऑफ कोर्स डिज़ाइन ऑन अकैडमिक लीडरशिप पर आयोजन किया गया। इस कार्यशाला को यूनीसेफ की शैक्षिक विशेषग प्रमिला मनोहरन, डॉ. एस. ए. मोईन, सरदार अरविंद सिंह , निदेशक दूरस्थ शिक्षा ने दीप प्रज्वलित कर इसकी सफलता की कामना की। अपने उद्धबोधन में निदेशक प्रो. सिंह ने कहा कि हमारी शिक्षा व्यवस्था पिरामिड आकृति में है जिसके आधार में प्राथमिक शिक्षा आती है अतः शुरुआत वहाँ से होनी चाहिये।
उन्होंने यूनिसेफ के गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में किये जा रहे प्रयासों की सराहना की। डॉ. एस ए मोईन ने कहा कि पूर्व में जो कार्यशाला एकेडमिक लीडरशिप केस स्टडी पर करायी गई थी। उसका उद्देश्य यह था कि हम कोर टीम के सदस्यों के साथ मिलकर एक ऐसे कोर्स का निर्माण करें जो सभी अधिकारियों, शिक्षकों एवं ज्ञानार्जन करने वाले के लिए मील का पत्थर साबित होगा। इस संदर्भ में यह जानलेना आवश्यक होगा कि सर्टिफिकेट इन अकैडमिक लीडरशिप (CAL) को विद्दत परिसद से अनुमोदन प्राप्त हो चुका है और जनवरी 2020 सत्र से दूरस्थ निदेशालय में इस ऑनलाइन सर्टिफिकेट कोर्स प्रारंभ होगा, और बिहार के प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा से जुड़े पदाधिकारी, प्रधानाध्यापक आदि का निबंधन आरंभ होगा। इसी हेतु तकनीकी विशेषज्ञों के साथ-साथ शिक्षा से जुड़े हुए संसाधन पुरुष इस त्री दिवसीय कार्यशाला में प्रयासरत है।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रमिला मनोहरण जो यूनिसेफ बिहार इकाई की शैक्षिक विशेषज्ञ है, ने कहा कि इस कोर्स के माध्यम से हम यह प्रयास कर रहे हैं कि शिक्षा से जुड़े उन तमाम लोगों तक यह ज्ञान बांटा जाए कि हमें विद्यालय में क्या करना है ? कैसे करना है ? ताकि हमारी शैक्षिक गुणवत्ता बढ़े। हमें छात्र की प्रगति को ध्यान केंद्रित कर अपने सारे क्रियाकलाप संपादित करने चाहिए। हमारा दृष्टिकोण हमेशा सकारात्मक होना चाहिए तभी हम लक्ष्य तक पहुंच सकते हैं। यूनिसेफ से आए डॉ. चंदन श्रीवास्तव ने इस तीन दिवसीय कार्यशाला की स्थिति रूपरेखा प्रस्तुत की।
November 21, 2019

12.11.2019 (दरभंगा) : LNMU के दशम दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए बिहार के राज्यपाल-सह-कुलाधिपति श्री फागू चौहान ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य है चरित्र निर्माण। मात्रा भौतिक प्रगति से कोई देश खुशहाल और गौरवशाली राष्ट्र नहीं बन सकता। शिक्षा केवल नौकरी के लिए ज़रूरी नहीं है अपितु इससे मनुष्य में संवेदनशीलता और नैतिकता का भी विकास होता है। समाज के वंचित, दलित और पिछड़े वर्ग को विकास की मुख्यधारा में लाना बहुत जरूरी है। श्री चौहान ने छात्र-छात्राओं को विडंबनाओं और विरोधाभासों से भरी हुई दुनिया में विवेकानंद का स्मरण दिलाया जिन्होंने एक मजबूत, न्यायपूर्ण, नैतिक मूल्यों से भरे हुए भारत का सपना देखा था। दूसरों की सेवा ही सच्ची सेवा और धर्म है। भारत की संस्कृति एवं परम्पराएं समृद्ध हैं।
जीवन में सफलता के लिए कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नहीं है। केवल दाखिला लेना, कक्षाओं में जाना और प्रमाण पत्र प्राप्त करना ही विश्विद्यालय और महाविद्यालय नहीं है। वास्तव में, यह वो जगह है जहाँ छात्र नए कौशल, आवश्यक डोमेन और ज्ञान प्राप्त कर वैज्ञानिक स्वभाव विकसित करते हैं। शिक्षक छात्रों को साहस और दृढ़ विश्वास के साथ जीवन की आगामी चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करते हैं। विश्वविद्यालय का प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए कुलपति प्रोo सुरेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि सभी सत्र नियमित हैं। स्नातक प्रथम खंड 2019-22 में नामांकन हेतु दो लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए। 370 स्थायी और 540 अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति कर शिक्षकों की कमी को काफी हद तक दूर कर दी गई है। महान खिलाड़ी ध्यानचंद के जन्मदिवस 29 अगस्त को खेल दिवस का आयोजन कर हमने एक नई परम्परा की शुरुआत की है। प्रोo सिंह ने कहा कि एम्प्लॉयबिलिटी लिंक्ड स्किलिंग प्रोग्राम्स के तहत जॉब ड्राइव चलाया जा रहा है।
विश्वविद्यालय के 29 अंगीभूत, 5 सम्बद्ध तथा 3 बीoएडo कॉलेजों का नैक से प्रत्यायन हो चुका है। दीक्षांत समारोह की शुरुआत डॉo नागेंद्र झा स्टेडियम में संगीतमय शैक्षणिक यात्रा से हुई। मिथिला पाग एवं अंगवस्त्रम में यह शोभायात्रा निराली छटा बिखेर रही थी जिसकी अगुवाई कुलसचिव कर्नल निशीथ कुमार रॉय कर रहे थे। इस अवसर पर महामहिम राज्यपाल-सह-कुलाधिपति ने पीoजीo सत्र 2017-19 के विभिन्न विषयों के 26 टॉपरों को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया। भौतिकी की आराधना कुमारी को जगदीश सिंह सर्वोत्कृष्ट स्नातकोत्तर स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। स्वर्ण पदक प्राप्त करने वालों में 15 छात्राएँ एवं 10 छात्र थे। पाग एवं अंगवस्त्रम में सजे छात्र-छात्राओं में सेल्फी लेने की होड़ थी। समारोह में प्रधानाचार्यों, स्नातकोत्तर विभाग के शिक्षकों समेत बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित थे।
दरभंगा जिला प्रशासन ने मुस्तैदी से विधि-वयवस्था बनाए रखा। कुलपति प्रोo सुरेन्द्र कुमार सिंह ने महामहिम राज्यपाल का तथा प्रति-कुलपति प्रोo जय गोपाल ने मुख्य वक्ता पद्मश्री विरेन्द्र सिंह चौहान एवं प्रधान सचिव ब्रजेश मेहरोत्रा का मिथिला की परम्परा के अनुसार पाग, चादर और प्रतीक चिन्ह से सम्मान किया। समारोह प्लास्टिक मुक्त परिवेश में हुआ। एनoसीoसीo के जवानों एवं एनoएसoएसo के कार्यकर्ताओं ने व्यवस्था में सहयोग किया। कार्यक्रम का संचालन कुलसचिव कर्नल निशीथ कुमार राय ने किया।
November 13, 2019

12.11.2019 (दरभंगा) : मिथिला कला रक्षा संकल्प हेतु आयोजित मिथिला चित्रकला प्रतियोगिता-2019 का आयोजन विद्यापति सेवा संस्थान द्वारा आयोजित 47वाँ मिथिला विभूति पर्व समारोह-2019 में हुआ। देश विदेश के मिथिलाप्रेमी और मिथिला चित्रकला प्रतियोगिता में भाग लेनेवाले प्रतिभागियों के समक्ष इसके परिणाम की घोषणा की गई। प्रथम पुरस्कार के रूप में 21000/- की राशि के साथ सम्मानपत्र मेहसौल, सीतामढ़ी के श्रीमती लक्ष्मी कुमारी को दिया गया। प्रथम पुरस्कार मैथिल मंच के संरक्षक श्री ताराकांत मिश्र , गोढ़ैला , बिशनपुर द्वारा अपने पिताजी स्व. सदानंद मिश्र जी की स्मृति में दिया गया। द्वितीय पुरस्कार के रूप में 11000/- की राशि के साथ सम्मानपत्र मिर्जापुर, दरभंगा के श्री भगवान ठाकुर को दिया गया। द्वितीय पुरस्कार डा. रानी झा, आरती झा, और कंचन झा संयुक्त रूप सँ अपन सासु माँ स्व. चन्द्रकला देवी की स्मृति में दिया गया। तृतीय पुरस्कार के रूप में 5100/- की राशि के साथ सम्मानपत्र पुणे, महाराष्ट्र की श्रीमती पूजा झा को दिया गया। तृतीय पुरस्कार मैथिल मंच के संरक्षक श्री हेमन्त झा अपने पिता स्व. राधाकांत मिश्र ग्राम गम्हरिया, बेनीपट्टटी मधुबनी की स्मृति में दिया गया। मिथिला विभूति पर्व में सृष्टि फाउंडेशन के कलाकारों ने भी समा बांधा।

कवि कोकिल विद्यापति के निर्वाण दिवस पर विद्यापति सेवा संस्थान, दरभंगा द्वारा आयोजित त्रि-दिवसीय मिथिला विभूति पर्व समारोह के समापन समारोह मे रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उड़ीसा तक में अपनी पहचान बना चुकी बिहार की प्रख्यात नृत्य संस्थान सृष्टि फाउंडेशन द्वारा नृत्य-नाटिका के रूप में "गीता" की प्रस्तुति की गई। इस ओडिसी नृत्य के माध्यम से गीता के उपदेश की प्रस्तुति हुई।
जिसके माध्यम से बताया गया कि एकादशी तिथि रविवार के दिन कुरुक्षेत्र की रणभूमि में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को लगभग 45 मिनट तक कर्तव्य व धर्म एवं ज्ञान की बातें सुनाए थे। जिसमें ज्ञान, भक्ति व कर्म-योग के मार्गों पर विस्तृत चर्चा की गई है। इन्हीं मार्गों पर चलकर व्यक्ति निश्चित रूप से परमपद का अधिकारी बन जाता है। नृत्य में भगवान श्री कृष्ण की भूमिका में सृष्टि फाउंडेशन के संस्थापक गुरु जयप्रकाश पाठक स्वयं, अर्जुन की भूमिका में नयन कुमार माझी, ब्रह्मा की भूमिका में सुबोध दास, तथा सोनाधारी सिंह, स्वर्णम उपाध्याय, रुबी गुप्ता, कोमल माझी, रितिका कुमारी ने अपनी प्रस्तुति से उपस्थित जनसमूह को भक्तिमय कर दिया। नृत्य नाटिका के माध्यम से यह भी बताया गया कि गीता का पावन ज्ञान सबसे पहले सुर्यदेव को प्राप्त हुआ था और गीता में भगवान श्री कृष्ण ने 574, अर्जुन ने -85, धृतराष्ट्र ने- 01 और संजय ने -40 श्लोक कहे थे ।
November 12, 2019

11.11.2019 (दरभंगा) : धड़ल्ले से हो रही वृक्षों की कटाई और जल संसाधन के पारंपरिक स्रोतों के संरक्षण में प्रशासनिक एवं सामाजिक स्तर पर हो रही अनदेखी के कारण जल संकट राष्ट्रीय स्तर पर भयावह रूप लेता जा रहा है और पग-पग पोखर की संस्कृति के लिए विश्वविख्यात मिथिला क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं रहा है। उक्त बातें तीन दिवसीय मिथिला विभूति पर्व समारोह के दूसरे दिन सोमवार को जल प्रबंधन मिथिला विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी में राजनीति विज्ञान के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ जितेंद्र नारायण ने कही। संगोष्ठी के संयोजक मणिकांत झा के संचालन में आयोजित संगोष्ठी की अध्यक्षता एमएलएसएम कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. विद्या नाथ झा ने की। जबकि महापौर वैजयंती देवी खेड़िया एवं विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने आगत अतिथियों के साथ दीप प्रज्ज्वलित कर संगोष्ठी का विधिवत शुभारंभ किया। उद्घाटन भाषण में महापौर श्रीमती खेड़िया ने विद्यापति सेवा संस्थान द्वारा इस ज्वलंत विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित किए जाने को उपयोगी और समयानुकूल बताते हुए संस्थान परिवार से सेमिनार में छनकर आनेवाले विचारों से नगर निगम को अवगत कराने का आग्रह किया। ताकि वह उसका अनुपालन कर जल संरक्षण के बेहतर निदान खोजने में सफल हो सकें। अपने संबोधन में उन्होंने निगम द्वारा जल संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की भी विस्तार से चर्चा की। विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव डॉ. बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने मिथिला क्षेत्र के पारंपरिक जल संरक्षण स्रोतों की विस्तार से चर्चा करते हुए इसके संरक्षण के लिए प्रशासन और समाज के लोगों को एक साथ कदम से कदम मिलाकर संकट का निदान खोजने की अपील की।
अपने संबोधन में उन्होंने इस बात का खासतौर पर जिक्र किया कि किस प्रकार मिथिला के पुरातन समाज ने पर्यावरण संरक्षण के लिए वृक्षों को धर्म से जोड़ कर इसके अस्तित्व की रक्षा के लिए कदम उठाए। उन्होंने पुरखों के बनाए नियमों के उल्लंघन पर चिंता जाहिर की। डीएमसीएच के वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. ओमप्रकाश ने जल प्रबंधन के चिकित्सकीय कारकों की विस्तार से चर्चा करते हुए जल बचत के अनेक उपाय सुझाए। वरिष्ठ पत्रकार विष्णु कुमार झा ने मानव जीवन में जल के महत्व की चर्चा करते हुए समुचित जल प्रबंधन के लिए भौतिकवादी एवं सुख-सुविधावादी सोच से परहेज करने की सलाह दी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. विद्या नाथ झा ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण मिथिला क्षेत्र में अनावृष्टि एवं अतिवृष्टि एक नई समस्या बनकर सामने आई है जिसके कारण वह कभी बाढ़ तो कभी सुखार का दंश झेलने को मजबूर हो रहा है। उन्होंने मिथिला के जल प्रबंधन की बदहाल स्थिति के लिए बांधों के निर्माण को महत्वपूर्ण बताते हुए जल को बांधने की नीति पर पुनर्विचार किए जाने को समय की जरूरत बताया। संगोष्ठी के लिए प्राप्त सभी आलेखों को पुस्तक आकार में कर कार्यक्रम में विमोचन किया गया। संगोष्ठी के लिए प्राप्त कुल 30 आलेखों में से करीब दो दर्जन आलेखों का वाचन प्रतिभागियों द्वारा किया गया।