December 06, 2019

28.11.2019 (दरभंगा) : महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाउंडेशन के द्वारा महाराजा कामेश्वर सिंह का 112वां जन्मदिवस कल्याणी निवास में मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पटना विश्वविद्यालय के प्रोफेसर भारती एस कुमार ने की। शुरुआत भगवती वंदना से हुई, तथा महाराजा कामेश्वर सिंह के चित्र पर आगत अतिथियों द्वारा माल्यार्पण किया गया। इस अवसर पर आयोजित महाराजा कामेश्वर सिंह मेमोरियल लेक्चर प्रोफेसर महेश रंगराजन, पूर्व निदेशक जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल संग्रहालय एवं पुस्तकालय, नयी दिल्ली ने "नेचर एण्ड नेशन : इकोलॉजी, सोसाइटी एण्ड हिस्ट्री इन कंटेम्पररी इंडिया" विषय पर दिया।
प्रोo महेश रंगराजन ने कहा कि "प्रकृति और राष्ट्र के बीच का संबंध सर्वव्यापी है, किन्तु अवधारणा की दृष्टि से कम भी है। आज राष्ट्र और प्रकृति दोनों संक्रमण की दौड़ से गुजर रहे हैं। दोनों एक-दूसरे पर आज अधिक आश्रित हैं। इतिहास हमें यह संबंध समझने में इसके रहस्यों को सुलझाने में सहायक है। प्रर्यावरण प्रकृति के विज्ञान को समझने की कोशिश है। प्रकृति के लिए राष्ट्र की सीमा बेमानी होती है। बीस एशियाई देशों की मानसून की गति को समझने के लिए हिन्द महासागर एवं प्रशान्त महासागर की जलवायु को समझना होगा। राष्ट्र की सीमा हमें अलग करती है, किन्तु प्रकृति एक दूसरे से जोड़ती है। उन्होंने कहा की द्वितीय विश्व युद्ध में एशिया के तीन हजार हाथियों को भी झोंक दिया, हाथियों के अलावे असंख्य घोड़े एवं खच्चरों को भी झोंका गया। कुदरत को विकास का दुश्मन मान लिया गया और हरित क्रांति के दौर में सबसे ज्यादा जंगल और जानवर नष्ट हुए। अब यही विकास हमारे विनाश का कारण बनता जा रहा है। बहुत से राष्ट्र-राज्यों के अपने अपने राष्ट्रीय पशु, पक्षी, पर्वत या नदी उनके राष्ट्रीय पहचान के प्रतीक हैं।
किन्तु जब ये राष्ट्रीय प्रतीक दूसरे लोगों या राष्ट्रों से बांटे जाते हैं तो इनमें काफी आपसी संघर्ष भी होते हैं। उदाहरण के लिए बाघ छः एशियाई देशों के राष्ट्रीय पशु है, अमरीकी इतिहास में "सेव बिशन मिशन" ने भी काफी गति पकड़ा। अमाजोन का क्षेत्र, जो कई लैटिन अमेरिकी देशों में फैला हुआ है, का ब्राजील के लिए विशेष महत्व है। अब प्रश्नों पर गौर करें, क्या राष्ट्र-राज्य प्रकृति को शान्ति के समय सुरक्षित रखते हैं या उसे अपनी आवश्यकतानुसार घेरते जा रहे हैं। या फिर, प्रकृति को घेरने की साज़िश है। या फिर, राष्ट्र के लिए संरक्षित प्रकृति के संघर्ष में हारने वाले भी हैं।
कार्यक्रम के आरंभ में पद्मश्री मानस बिहारी वर्मा ने आगत अतिथियों का स्वागत किया। महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह बिहार हेरिटेज सीरीज के अधीन स्वर्गीय प्रोफेसर राधाकृष्ण चौधरी की कालजई अप्रकाशित ग्रंथ "पोलिटिकल एण्ड कल्चरल हेरिटेज ऑफ़ मिथिला" का लोकार्पण किया गया और इस पुस्तक को समाज के समक्ष प्रोफेसर कृष्ण कुमार मंडल, इतिहास विभाग, भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर ने प्रस्तुत किया। प्रोo मंडल ने कहा कि मिथिला का वैज्ञानिक इतिहास तब तक नहीं लिखा जा सकता है, जब तक कि हम प्रोo राधाकृष्ण चौधरी के इतिहास लेखन के पैमाने का अनुसरण नहीं करते हैं। इस पुस्तक ने मिथिला के इतिहास के कई विवादास्पद तिथियों को स्पष्ट किया है।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में पटना विश्वविद्यालय के प्रोफेसर भारती एस. कुमार ने दरभंगा राज के विस्तृत सांस्कृतिक और राजनीतिक आर्थिक अवदानों पर प्रकाश डाला। प्रोo कुमार ने दिवंगत प्रोo हेतुकर झा जी को याद किया और मिथिला के बौद्धिक एवं सांस्कृतिक इतिहास पर प्रकाश डाला। अध्यक्ष महोदया ने मंच से सरकार से मांग की कि मिथिला को धरोहर घोषित किया जाय।आगत अतिथियों के प्रति आभार कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो रामचंद्र झा ने प्रकट किया।
December 06, 2019

28.11.2019 (दरभंगा) : केएसडीएसयू में आयोजित सातवें दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करते हुए सूबे के महामहिम कुलाधिपति सह राज्यपाल माननीय फागू चौहान ने गुरुवार को कहा कि भारत को फिर से जगतगुरु के रूप में प्रतिष्ठा दिलानी है तो संस्कृत का विकास जरूरी है। संस्कृत ज्ञान के अभाव में हम न तो भारत की सांस्कृतिक सम्पन्नता और विपुल ज्ञान सम्पदा से परिचित हो पाएंगे और न ही अपने राष्ट्र की भावनात्मक एकता को सुरक्षित रख पाएंगे। संस्कृत की संवृद्धि के लिए उसकी बहुमूल्य पांडुलिपियों के संरक्षण एवम उसके डिजिटाइजेशन पर बल दिया।
विश्व के ज्ञान विज्ञान के सम्पूर्ण विषय संस्कृत साहित्य में सुरक्षित है। उन्होंने संस्कृत को विश्व की सर्वश्रेष्ठ भाषा बताया। अपने सम्बोधन के क्रम में महामहिम ने संस्कृत विश्वविद्यालय के संस्थापक महाराजाधिराज डॉ. सर कामेश्वर सिंह के प्रति श्रद्धा निवेदन किया और उनके संस्कृत शिक्षा प्रेम को भी नमन किया। उन्होंने कहा कि उपाधि ग्रहण करने वाले छात्रों के लिए आज का दिन उनके जीवन का स्वर्णिम अवसर है क्योंकि आज उन्हें अपनी साधना व परिश्रम का मधुर फल प्राप्त हुआ है। महामहिम ने सभी छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए आशा जताई कि विश्वविद्यालय से अर्जित ज्ञान व संस्कार का उपयोग वे अपने जीवन के साथ साथ सम्पूर्ण मानवता के व्यापक कल्याण के लिए करेंगे। इस अवसर पर राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान , नई दिल्ली के कुलपति प्रो0 पी0एन0 शास्त्री ने कहा कि इन दिनों संस्कृत भाषा के प्रति कई जानी- अनजानी भ्रांतियां समाज मे फैल गयी हैं। इससे देववाणी को नुकसान हो रहा है। इसलिए जरूरत है संस्कृत में प्रतिपादित मौलिक विचारों को जनमानस तक पहुंचाने की। ताकि व्याप्त भ्रांतियां व आशंकाएं निर्मूल हो सके और संस्कृत भी निर्वाध गति से फल फूल सके।
साथ ही उन्होंने कहा कि संस्कृत में हो रहे शोध कार्यों से निकले नए नए तथ्यों को विभिन्न माध्यमों के जरिये देश-विदेशों में प्रचारित-प्रसारित करने की नितांत जरूरत है। इन माध्यमों में दूरदर्शन, इंटरनेट, पत्र पत्रिकाएं समेत अन्य संसाधनों का भरपूर उपयोग किया जा सकता है। अपने दीक्षांत भाषण को आगे बढ़ाते हुए प्रो0 शास्त्री ने संस्कृत विश्वविद्यालय को एक महत्वपूर्ण सुझाव यह दिया कि यहां से उपाधि प्राप्त करने वाले छात्रों के लिए कम से कम एक पांडुलिपि के संशोधन, प्रकाशन, मुद्रण या फिर सम्पादन की अनिवार्यता सुनिश्चित कर देना चाहिए। इस प्रयास से दुर्लभ ग्रन्थों का प्रकाशन हो सकेगा और जो पांडुलिपियाँ पंडितों के घरों में, पेटियों में, पुस्तकालयों में जैसे तैसे पड़ी हुईं हैं या कैद हैं उसे पुनर्जीवन मिलेगा। इस समारोह के अवसर पर संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 सर्व नारायण झा ने विकास प्रतिवेदन पेश करते हुए कई उपलब्धियां गिनायीं और कहा कि समुचित विकास के लिए यहां रोज नए प्रयोग व प्रयास जारी है।
सत्र नियमित करने, छात्र हित में सुलभ छात्रवृत्ति के नियमों में सुधार, समय पर छात्र संघ का चुनाव, करीब दो दर्जन संगोष्ठीव कार्यशाला आयोजित करने, एनएसएस के विविध कार्यक्रमों को सम्पादित करने, शास्त्रार्थ सभा का आयोजन होने, शिक्षकों की नियुक्ति, विद्वानों के विशेष व्याख्यानों को यूट्यूब पर अपलोड करने, पवन एवम तर्पण विधि पर लाइव कार्यक्रम कर जनमानस के लिए इसे उपलब्ध कराने, उपाकर्म विधि पर पुस्तक का प्रकाशन कर निःशुल्क वितरण करने, नैड में पंजीयन कराने समेत ढेर सारे किये गए कार्यों को गिनाया। इसी क्रम में कुलपति ने बताया कि दीक्षांत समारोह पहले समावर्तन संस्कार के नाम से प्रसिद्ध था। उस समय मे ही जो उपदेश दिए जाते थे वही आज भी दिए जा रहे हैं। मानना तो यह है कि इस संकल्प से , वर्णभेद, आतंकवाद, वर्गभेद, क्षेत्रभेद, भ्रष्टाचार विरोधी भावना को दूर करने में मदद मिलती है।
उक्त जानकारी देते हुए पीआरओ श्री निशिकांत ने बताया कि प्रतिकुलपति प्रो0 चन्द्रेश्वर प्रसाद सिंह ने संस्कृत में आगत सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन किया। गौतलब है कि महामहिम कुलाधिपति ने करीब दो दर्जन भर कार्यों के लिए आधारशिला रखी।
November 25, 2019

24.11.2019 (दरभंगा) : बहादुरपुर थाना क्षेत्र के पंडासराय ग्राम मेँ सरकारी भूमि पर माले समर्थकों द्वारा किये जा रहे झोपडी निर्माण कार्य को डीएम डॉ. त्यागराजन एस.एम के निर्देश पर रोक लगा दिया गया हैं। माले के नेताओं द्वारा भी आगे वहां पर कोई नया निर्माण कार्य नहीं करने का वचन दिया हैं। गौरतलब हैं कि पिछले दो दिनों से पंडासराय मेँ सरकारी भूमि पर भूमिहीन लोंगो के जत्थे द्वारा अवैध निर्माण कार्य को अंजाम दिया जा रहा था। डीएम के संज्ञान मेँ यह बात आते ही सदर अनुमंडल पदाधिकारी को कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया। डीएम के निर्देशानुसार आज सदर अनुमंडल पदाधिकारी, सदर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के साथ दल बल के साथ उक्त स्थल पर पहुंच कर अवैध निर्माण कार्य पर रोक लगा दिया गया। सदर एसडीओ राकेश गुप्ता ने बताया हैं कि सीओ बहादुरपुर को सरकारी एवं संस्थान की भूमि की मापी कराने का निर्देश दिया गया हैं, उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। माले समर्थित आंदोलनकारियों ने भी जमीन की मापी कराने तक कोई निर्माण कार्य नहीं किये जाने पर सहमति जताया हैं।
November 25, 2019

21.11.2019 (पटना) : डीएम कुमार रवि ने आज बिहार चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स के सभागार में पटना जिला अन्तर्गत सभी आँगनवाड़ी केन्द्र पर ICDS-CAS लागू करने हेतु पटना सदर-1 के आँगनवाड़ी केन्द्र संख्या-06 के आँगनवाड़ी सेविका के मोबाईल फोन में ICDS-CAS सॉफ्टवेयर पर एक परिवार का सर्वे डालते हुए ICDS-CAS पटना का विधिवत् शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने ICDS-CAS के शुभारंभ से संबंधित विनाइन चित्र का अनावरण भी किया।
इस अवसर पर उन्होंने बताया कि ICDS-CAS को पूरी तैयारी के साथ पटना जिले के प्रत्येक आँगनवाड़ी केन्द्र हेतु लागू किया जा रहा है। इसके माध्यम से आँगनवाड़ी केन्द्रों की Real Time Monitoring करना सुविधाजनक होगा।डीएम ने सभी मास्टर ट्रेनर को अपने-अपने सेक्टर के सभी आँगनवाड़ी सेविकाओं को बेहतर तरीके से प्रशिक्षित करने हेतु प्रोत्साहित किया। पटना जिले के सभी स्वीकृत 5261 आँगनवाड़ी केन्द्रों हेतु एंड्राइड मोबाईल फोन की आपूर्ति की गई है। इन सभी मोबाईल फोन को आई0सी0डी0एस0 निदेशालय के निदेशानुसार ICDS-CAS के क्रियान्वयन हेतु तैयार कर दिया गया है। साथ ही साथ पटना जिले के तेईस प्रखंडों के कुल 198 सेक्टर हेतु चयनित कुल 198 मास्टर ट्रेनर का प्रथम फेज का प्रशिक्षण कराया गया है। इन्हें अब जिले के सभी आँगनवाड़ी सेविकाओं को प्रशिक्षित करना है।
आई0सी0डी0एस0 बच्चों, गर्भवती एवं धात्री माताओं के समग्र पोषण आवश्यकताओं को पूर्ण करने हेतु एक महत्वकांक्षी कार्यक्रम है, जिसे सुदृढ़ करने हेतु महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने Information Communication Technology (ICT) द्वारा आई0सी0डी0एस0 सेवाओं की प्रदायता की Real Time Monitoring हेतु एक Common Application Software (CAS) का शुभारम्भ ICDS-CAS के नाम से किया गया है। इस वेब आधारित सॉफ्टवेयर ने आई0सी0डी0एस0 की सेवाओं की गुणवत्ता एवं पर्यवेक्षण तथा मूल्यांकन को Digitized कर दिया है, जिससे वास्तविक समय में निगरानी (Real Time Monitoring) के आधर पर डाटा संकलन करना, किसी विशिष्ट गाँव के पोषण स्थिति की मैपिंग करना तथा पोषण स्थिति के अंतराल को भरने हेतु त्वरित निर्णय लेना सम्भव हो जाता है।
उन्होंने बताया कि आई0सी0डी0एस0 के प्रारम्भ से अब तक के इतिहास में सर्वप्रथम ICDS-CAS के सहयोग से डाटा का सटीक संकलन एवं उसका त्वरित विश्लेषण संभव हो पाया है। ICDS-CAS का उद्देश्य अद्यतन तकनीकों का उपयोग कर सेविका के कार्य क्षमता को सुदृढ़ करना, सेवा प्रदायता हेतु वास्तविक समय में निगरानी कर बच्चों के विकास एवं पोषण स्तर में सुधार हेतु ससमय आवश्यक कदम उठाना, एक विशेष क्षेत्र की पोषण एवं भौगोलिक स्थिति के आधार पर प्राथमिकता निर्धारित करना, आई0सी0डी0एस0 पंजियों का ऑनलाइन संधारण करना एवं लाभुकों तक सीधे पहुँच बनाना है। सभी आँगनबाड़ी केन्द्रों पर सेविकाओं को ICDS-CAS साॅफ्टवेयर पर परिवार का सर्वे एवं Real Time Monitoring हेतु एंड्रॉयड मोबाईल दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि सभी आँगनबाड़ी सेविकाएँ CAS पर खुद डाटा इन्ट्री करें। उन्होंने कहा की उन्हें पूरा विश्वास है किअपरे हुनर एवं इच्छाशक्ति से सभी आँगनबाड़ी सेविकाएँ सफल होंगी तथा गुणवत्तापूर्ण सेवाएँ देंगी।
November 25, 2019

21.11.2019 (दरभंगा) : डीएम डॉ. त्यागराजन एस.एम. द्वारा शिक्षा विभाग की मासिक समीक्षात्मक बैठक में समग्र शिक्षा अभियान एवं मध्याह्न भोजन योजना की गहन समीक्षा की गई। बैठक में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, समग्र शिक्षा अभियान द्वारा बताया गया कि वर्ग 09वीं की कक्षा संचालन हेतु अतिरिक्त वर्ग कक्ष का निर्माण कार्य विभिन्न मध्य विद्यालयों में प्रारंभ हो गया है। जिले के 194 सभी कोटि के उत्क्रमित/माध्यमिक/उच्च माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापक/प्रधानाध्यापिका एवं विद्यार्थियों को स्मार्ट क्लास के माध्यम से अध्ययन की शुरूआत की जा चुकी है। उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय, लोआम, दरभंगा सदर में स्मार्ट क्लास के लिए क्रय किया गया टेलीविजन सेट के चोरी हो जाने की जानकारी दी गई है। जिस पर डीएम द्वारा उक्त विद्यालय के प्रधानाध्यापक पर प्राथमिकी दर्ज करने का निदेश दिया गया है। डी.पी.ओ. ने बताया कि परियोजना बा.उ.वि., बघांत, मनीगाछी के द्वारा स्मार्ट क्लास प्रारंभ नहीं किया गया है। डीएम द्वारा इसे अत्यंत गंभीरता से लिया गया और उन्होंने परियोजना बा.उ.वि., बघांत के प्रधानाध्यापक को निलंबित करने का निदेश दिया है। असैनिक संभाग अन्तर्गत विभिन्न योजनाओं की समीक्षा में 79 स्कूलों में वर्ष 2005-06 से वर्ष 2017-18 की कई योजनाएँ लंबित पाई गई।
बताया गया कि उक्त विद्यालयों के प्रधानाध्यापक द्वारा योजना की राशि निकाल ली गई है, लेकिन निर्माण कार्य नहीं कराया है। ऐसे कई प्रधानाध्यपक सेवानिवृत भी हो गये है, लेकिन शिक्षा विभाग द्वारा इनके विरूद्ध अभी तक कोई अनुशासनिक कार्रवाई नहीं की गई है। यह अत्यंत गंभीर मामला है। डीएम द्वारा उक्त सभी 78 विद्यालयों के डिफाॅल्टर प्रधानाध्यापक चाहे वह सेवा में हो अथवा सेवानिवृत हो गये है, के विरूद्ध सुसंगत धाराओं के अन्तर्गत तुरंत प्राथमिकी दर्ज कर प्रतिवेदन करने का निदेश दिया गया है। डीएम ने कहा कि यह विशुद्ध रूप से गबन का मामला लग रहा है। उन्होंने डी.पी.ओ. सर्व शिक्षा अभियान को उक्त विद्यालयों के प्रधानाध्यापक के विरूद्ध एक सप्ताह के अन्दर नीलाम पत्रवाद दायर कर राशि की वसुली की कार्रवाई करने का निदेश दिया है। असैनिक संभाग की समीक्षा में पाया गया कि कई योजना का एम.बी. बुक नहीं हुआ है। डीएम ने संबंधित तकनीकी अभियंताओं के विरूद्ध कार्रवाई का प्रस्ताव भेजने का निदेश दिया है।
मध्याह्न भोजन योजना की समीक्षा में पाया गया कि कतिपय कारणों से कुछ विद्यालयों में मध्याह्न भोजन योजना का संचालन अभी बंद है। डीएम द्वारा कुछ विद्यालयों में मध्याह्न भोजन योजना के बंद रहने पर सख्त नाराजगी व्यक्त किया गया। उन्होंने डी.पी.ओ. सर्व शिक्षा अभियान को खाद्यान्न की वैकल्पिक व्यवस्था कर एम.डी.एम. बंद विद्यालयों में तुरंत एम.डी.एम. प्रारंभ कराने का निदेश दिया। उन्होंने हिदायत दिया कि किसी भी परिस्थति में एक भी विद्यालय में मध्याह्न भोजन योजना बंद नहीं होनी चाहिए। आगे से इस तरह की कोई शिकायत प्राप्त होगी तो संबंधित अधिकारियों की जबावदेही तय कर उनके विरूद्ध अनुशासनिक कार्रवाई की जायेगी। बताया गया कि दरभंगा जिला में एकता शक्ति फाउन्डेशन नामक एक स्वंय सेवी संस्था द्वारा विभिन्न विद्यालयों में मध्याह्न भोजन की आपूत्र्ति की जा रही है। डीएम ने पूर्वी चंपारण जिला में पिछले दिनों घटी घटना का जिक्र करते हुए कहा कि इस जिले में कार्यरत स्वयं सेवी संस्था का नियमित रूप से निरीक्षण एवं जाँच किया जाय। उन्होंने दरभंगा जिला में संचालित सभी आवासीय कस्तुरबा बालिका विद्यालयों की भी नियमित जाँच करने का निदेश दिया।
जिला शिक्षा पदाधिकारी एवं जिला प्रोग्राम पदाधिकारी, सर्व शिक्षा अभियान द्वारा अनुरोध किये जाने पर डीएम ने सभी कस्तुरबा बालिका विद्यालय के नियमित जाँच हेतु एक टीम का गठन करने का निदेश दिया। इस टीम में जिला स्तरीय प्रशासनिक पदाधिकारी भी शामिल रहेंगे। यह टीम हरेक सप्ताह कस्तुरबा बालिका विद्यालयों का औचक निरीक्षण कर डीएम को प्रतिवेदन समर्पित करेंगी। बैठक में बताया गया कि अनुसूचित जाति/जनजाति/पिछड़े वर्ग के मैट्रिक उत्तीर्ण विद्यार्थियों को सरकार द्वारा छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। इस हेतु राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (एन.एस.पी.) पर संबंधित विद्यार्थियों द्वारा ऑनलाइन आवेदन किया जाना है। बताया गया कि दरभंगा जिला में एन.एस.पी. पोर्टल पर कुल 25105 आवेदन निबंधन किया गया। जिसमें से 11,773 आवेदन आवश्यक जाँचोपरांत स्वीकृत कर दिया गया है। 3,387 आवेदन की जाँच संबंधित संस्थाओं के द्वारा अपेक्षित सहयोग नहीं प्रदान किये जाने के चलते लंबित है। डीएम द्वारा उक्त संस्थानों एवं संबंधित विश्वविद्यालय को उनके स्तर से पत्र भेजने का निदेश दिया गया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के हक में सरकार की यह अत्यंत लाभकारी योजना है। इसका लाभ दिलाने के लिए हर संभव प्रयास जारी रखी जाय।