April 15, 2021

15.04.2021 (दरभंगा) : स्वास्थ्य विभाग, बिहार सरकार द्वारा द्वारा लिए गए निर्णय के आलोक में नोबेल कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों का निजी चिकित्सा संस्थानों में ईलाज हेतु जिलावार वर्गीकरण एवं श्रेणीवार दर का निर्धारण किया गया है। स्वास्थ विभाग द्वारा शहरों एवं जिला को तीन श्रेणी में बाँटा गया है। इसमें श्रेणी-ए में पटना, श्रेणी- बी में भागलपुर, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, गया एवं पूर्णिया तथा श्रेणी- सी में शेष अन्य जिले को रखा गया है। इसके साथ ही सरकार द्वारा कोविड-19 संक्रमित मरीजों का ईलाज कर रहे विभिन्न अधिकृत निजी चिकित्सालयों हेतु दर का निर्धारण किया गया है। स्वास्थ विभाग द्वारा जिलों के निजी अस्पतालों में कोविड-19 पॉजिटिव मरीजों के चिकित्सा हेतु 03 भागों में अस्पतालों का वर्गीकरण करते हुए निम्नवत् शुल्क निर्धारित की गई है।
01. श्रेणी-ए के एन.ए.बी.एच मान्यता प्राप्त अस्पताल में सामान्य रूप से बीमार (आइसोलेशन बेड ऑक्सीजन के साथ सपोर्टिव केयर) 10 हजार रुपये, गंभीर रूप से बीमार (वेंटिलेटर के बगैर आई.सी.यू में देखभाल) हेतु 15 हजार एवं अति गंभीर रूप से बीमार (वेंटिलेटर के साथ आई.सी.यू में देखभाल) हेतु 18 हजार रुपये निर्धारित की गई है। वहीं श्रेणी-ए के अस्पताल जो एन.ए.बी.एच मान्यता प्राप्त नहीं है, को सामान्य रूप से बीमार (आइसोलेशन बेड ऑक्सीजन के साथ सपोर्टिव केयर) 08 हजार रुपये, गंभीर रूप से बीमार (वेंटिलेटर के बगैर आई.सी.यू में देखभाल) हेतु 13 हजार एवं अति गंभीर रूप से बीमार (वेंटिलेटर के साथ आई.सी.यू में देखभाल) हेतु 15 हजार रुपये निर्धारित की गई है।
02. श्रेणी-बी के जिले में स्थित श्रेणी- ए के निजी अस्पतालों के दरों का क्रमशः 80% अधिकतम शुल्क निर्धारित किया गया है। जिसमें एन.ए.बी.एच मान्यता प्राप्त अस्पताल में सामान्य रूप से बीमार (आइसोलेशन बेड ऑक्सीजन के साथ सपोर्टिव केयर) 08 हजार रुपये, गंभीर रूप से बीमार (वेंटिलेटर के बगैर आई.सी.यू में देखभाल) हेतु 12 हजार एवं अति गंभीर रूप से बीमार (वेंटिलेटर के साथ आई.सी.यू में देखभाल) हेतु 14 हजार 400 रुपये निर्धारित की गई है। वहीं श्रेणी-बी के अस्पताल जो एन.ए.बी.एच मान्यता प्राप्त नहीं है, को सामान्य रूप से बीमार (आइसोलेशन बेड ऑक्सीजन के साथ सपोर्टिव केयर) 06 हजार 400 रुपये, गंभीर रूप से बीमार (वेंटिलेटर के बगैर आई.सी.यू में देखभाल) हेतु 10 हजार 400 एवं अति गंभीर रूप से बीमार (वेंटिलेटर के साथ आई.सी.यू में देखभाल) हेतु 12 हजार रुपये निर्धारित की गई है।
03. श्रेणी-सी के जिले में स्थित श्रेणी- ए के निजी अस्पतालों के दरों का क्रमशः 60% अधिकतम शुल्क निर्धारित किया गया है। जिसमें एन.ए.बी.एच मान्यता प्राप्त अस्पताल में सामान्य रूप से बीमार (आइसोलेशन बेड ऑक्सीजन के साथ सपोर्टिव केयर) 06 हजार रुपये, गंभीर रूप से बीमार (वेंटिलेटर के बगैर आई.सी.यू में देखभाल) हेतु 09 हजार एवं अति गंभीर रूप से बीमार (वेंटिलेटर के साथ आई.सी.यू में देखभाल) हेतु 10 हजार 800 रुपये निर्धारित की गई है।
वहीं श्रेणी-सी के अस्पताल जो एन.ए.बी.एच मान्यता प्राप्त नहीं है, को सामान्य रूप से बीमार (आइसोलेशन बेड ऑक्सीजन के साथ सपोर्टिव केयर) 04 हजार 800 रुपये, गंभीर रूप से बीमार (वेंटिलेटर के बगैर आई.सी.यू में देखभाल) हेतु 07 हजार 800 एवं अति गंभीर रूप से बीमार (वेंटिलेटर के साथ आई.सी.यू में देखभाल) हेतु 09 हजार रुपये निर्धारित की गई है।
April 15, 2021

15.04.2021 (दरभंगा) : मुख्य सचिव, गृह विभाग, बिहार, पटना एवं डीएम, दरभंगा द्वारा दिनांक 09 अप्रैल 2021 को कोरोना के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए जिले के सभी स्कूल, कॉलेज, कोचिंग संस्थान 18 अप्रैल 2021 तक बंद रखने, सभी दुकाने/प्रतिष्ठानों को 30 अप्रैल 2021 तक संध्या 7:00 तक की खुले रखने एवं अन्य विस्तृत आदेश निर्गत आदेश किया गया था। उसी परिपेक्ष्य में पुनः डीएम डॉ. त्यागराजन एस. एम द्वारा आदेश निर्गत करते हुए सभी शॉपिंग मॉल, दुकानों, सार्वजनिक वाहनों (बस, टैक्सी, ऑटो) में परिचालन कर्मियों/ चालकों और ग्राहकों/सवारियों के द्वारा मास्क का प्रयोग अनिवार्य किया गया है तथा संबंधित प्रतिष्ठानों/वाहनों के मालिकों एवं कर्मियों/चालकों के लिए आवश्यक होगा कि वे बिना मास्क वालों का प्रवेश वर्जित रखें। यदि जिला प्रशासन/पुलिस के द्वारा जाँच के क्रम में इसका उल्लंघन पाया जाता है तो आदेशोल्लंघन के लिए दोषी शॉपिंग मॉल, दुकान/ व्यवसायिक प्रतिष्ठानों अथवा वाहन (बस/टैक्सी/ऑटो सहित) का परिचालन बंद करा दिया जाएगा। आदेशों का अनुपालन नहीं करने वाले शॉपिंग मॉल/दुकानों/ सार्वजनिक वाहनों (बस/टैक्सी/ऑटो) में परिचालन कर्मियों/ चालकों और ग्राहकों/सवारियों पर कार्रवाई करने यथा- शॉपिंग मॉल/दुकानों को बंद करने, वचनक को जप्त करने/जुर्माना लगाने आदि के लिए डीएम द्वारा सभी अनुमंडल पदाधिकारी, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, अपर अनुमंडल पदाधिकारी, उप नगर आयुक्त, नगर प्रबंधक, नगर निगम के सभी टैक्स कलेक्टर, भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद, बेनीपुर, सभी पुलिस निरीक्षक, सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी, सभी अंचलाधिकारी, सभी थानाध्यक्ष एवं थाना के सभी पुलिस पदाधिकारी को जिला में अपने-अपने क्षेत्र के लिए प्राधिकृत किया गया है।
सदर अनुमंडल का भौगोलिक क्षेत्र बड़ा होने के कारण दो वरीय उप समाहर्त्ता यथा - गौरव शंकर एवं कंचन झा को उपरोक्त कार्य हेतु अगले आदेश तक प्रतिनियुक्त एवं प्राधिकृत किया गया है। साथ ही निर्देश दिया गया है कि वह अपने कार्यों के अतिरिक्त अनुमंडल पदाधिकारी, सदर के निर्देशानुसार कार्य करना सुनिश्चित करेंगे। जिला परिवहन पदाधिकारी, मोटरयान निरीक्षक, सभी थानाध्यक्ष एवं थाना के अन्य पुलिस पदाधिकारी को एम.भी. एक्ट की धारा - 179 को उपरोक्त कार्य हेतु प्रयोग करने हेतु प्राधिकृत किया गया है। मुख्य सचिव के आदेश के आलोक में उपरोक्त तीनों प्रमुख कार्यों तथा एम.भी. एक्ट के तहत जुर्माना वसूली हेतु थानाध्यक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण है और कोरोना संक्रमण की रोकथाम हेतु सभी थानाध्यक्ष का संवेदीकरण एवं निगरानी हेतु डीएम द्वारा एसएसपी एवं नगर पुलिस अधीक्षक दरभंगा से अनुरोध किया गया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से कोरोना संक्रमण काल तक लागू रहेगा, तत्पश्चात यह स्वत: विलोपित माना जाएगा।
April 15, 2021

14.04.2021 (दरभंगा) : अग्निशमन सेवा सप्ताह के अंतर्गत दरभंगा के श्यामा माई मंदिर के समीप अवस्थित जिला अग्निशमन कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में 1944 ई0 में 14 अप्रैल के ही दिन मुंबई बंदरगाह पर जहाज में अकस्मात आग लग जाने के दौरान फायर फाइटिंग करते हुए वीरगति को प्राप्त 66 अग्निशामक शहीदों की याद में 2 मिनट का मौन धारण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गयी। इस अवसर पर जिला समादेष्टा सह जिला अग्निशामक पदाधिकारी, दरभंगा मनोज कुमार नट, अग्निशमालय पदाधिकारी, दरभंगा शशि भूषण सिंह सहायक अग्निशमालय पदाधिकारी रमेश कुमार, प्रधान चालक सुदामा राम, अग्नि चालकों एवं अग्नि कर्मियों के साथ मीडिया के कर्मी भी उपस्थित थे।
सभी लोगों को जिला अग्निशामक पदाधिकारी द्वारा पिन व फ्लैग लगाया गया। जिला समादेष्टा सह जिला अग्निशमन पदाधिकारी, दरभंगा द्वारा अग्नि सेवा सप्ताह के संबंध में बताया गया कि यह कार्यक्रम कोविड-19 को ध्यान में रखते हुए पंपलेट, हैंडबिल, मॉक ड्रिल, फायर ऑडिट, माइकिंग एवं मीडिया के माध्यम से शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में आग से सुरक्षा एवं बचाव हेतु क्या करें क्या ना करें? के संबंध में चर्चा की गई। इस हेतु जिला अंतर्गत कार्यरत सभी अग्निशामालय पदाधिकारी, प्रभारी अग्निशामक पदाधिकारी को आग से बचाव हेतु मुहिम चलाकर आम जनों को जागरुक करने का निर्देश दिया गया। यह भी कहा गया कि covid-19 के संबंध में सरकार द्वारा निर्गत दिशा निर्देश का पूर्ण अनुपालन किया जाए। अग्निशामालय पदाधिकारी, दरभंगा शशि भूषण सिंह द्वारा बताया गया की सरकार एवं राज्य अग्निशमन के स्तर से निर्गत दिशा निर्देश के अनुसार शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों को अग्नि से बचाव व सुरक्षा को लेकर जागरूक किया जा रहा है। औद्योगिक एवं व्यवसायिक प्रतिष्ठानों का लगातार फायर ऑडिट एवं मॉक ड्रिल किया जा रहा है। चेंबर ऑफ कॉमर्स से लगातार समन्वय स्थापित कर आग से बचाव हेतु जागरूक किया जा रहा है। फायर ऑडिट एवं मॉक ड्रिल को प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से लगातार प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में कोविड-19 के लिए सरकार द्वारा निर्गत दिशा निर्देश का भी अनुपालन किया जा रहा है।
April 12, 2021

12.04.2021 (दरभंगा) : डी.एम.सी.एच की स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर करने के लिए डीएम डॉ. त्यागराजन एस.एम ने उप विकास आयुक्त तनय सुल्तानिया, नगर आयुक्त मनेश कुमार मीणा, सहायक समाहर्ता अभिषेक पलासिया एवं स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारियों के साथ डी.एम.सी.एच के सभी विभागों एवं सभी वार्डों का मुआयना किया तथा वहां की व्यवस्था एवं कार्य प्रणाली का बारीकी से अवलोकन किया। डीएमसीएच में बन रहे नए आई.सी.यू का भी उन्होंने निरीक्षण किया और इसे हर हाल में शुक्रवार यानी 16 अप्रैल तक चालू कर देने का निर्देश दिया। डीएम श्री त्यागराजन द्वारा डी.एम.सी.एच के अधीक्षक के कार्यालय प्रकोष्ठ में डी.एम.सी.एच के प्राचार्य, अधीक्षक, सिविल सर्जन, सभी विभागाध्यक्ष, चिकित्सकों, डी.पी.एम एवं स्वास्थ्य प्रबंधकों के साथ बैठक की गयी।
बैठक में उन्होंने डीएमसीएच की व्यवस्था दुरुस्त करने को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने वहाँ के पदाधिकारियों को कहा कि अगर कोई मरीज डीएमसीएच में ईलाज के लिए आता है तो उसे हर हाल में 5 मिनट के अंदर भर्ती कर ली जाए। अगर आई.सी.यू के लिए कोई मरीज आता है, तो उसे सीधे आई.सी.यू में भर्ती किया जाए और कागजी कार्रवाई बाद में की जाये। उन्होंने चिकित्सा अधिकारियों को डी.एम.सी.एच की चिकित्सा व्यवस्था में व्यापक सुधार लाने का निर्देश दिया। कहा कि प्रत्येक वार्ड में चिकित्सक भ्रमण करते रहें। उन्होंने डी.एम.सी.एच में प्रतिनियुक्त 8 स्वास्थ्य प्रबंधकों में से 4 स्वास्थ्य प्रबंधकों की ड्यूटी 8-8 घंटे का राउंड दी क्लॉक लगाने का निर्देश दिये। साथ ही सभी गार्डों की ड्यूटी रोस्टर बनाकर पालिवार राउंड-द-क्लॉक लगाने को कहा गया। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर किसी भी प्रकार की लापरवाही/शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अगर किसी के द्वारा लापरवाही बरती जाती है, तो संबंधित के विरुद्ध सीधे कार्रवाई की जाएगी।
April 12, 2021

12.04.2021 (दरभंगा) : "स्ट्रीट चिल्ड्रन इन इंडिया" विषय पर अपराधिकी अनुसंधान एवं विकास संगठन, भारत CRDO INDIA द्वारा दो दिवसीय ई-संगोष्ठी का आयोजन (CRDO) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ऋषभ श्रीवास्तव की अध्यक्षता में किया गया, जिसका विषय भारत में सड़क पर रहने वाले बच्चो से जुड़ा था। इस ई-संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य समाज को सड़क पर रहने वाले बच्चों के प्रति सहानभूति की भावना जागृत करने तथा इनसे जुड़ी कानूनों से अवगत करना था। सम्बंधित विषय से जुड़े कई विशेषज्ञों ने ई-संगोष्ठी में भाग लेते हुए कई गंभीर विषयो पर चर्चा की। एन० आई० सी० एफ० एस०, दिल्ली की पूर्व रीडर डॉ. शुभ्रा सान्याल ने स्ट्रीट चिल्ड्रन को परिभाषित करते हुए कार्यक्रम को आरंभ किया। जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान संकाय के प्रोफेसर डॉ. नवेद इक़बाल ने सड़क पर रहने वाले बच्चो के सामाजिक तथा मानसिक स्थिति से अवगत करवाते हुए उनमे सुधार लाने जैसे विषयो पर चर्चा की।
किशोर न्याय बोर्ड, उत्तर प्रदेश के सदस्य तथा जी० एल० ए०, विश्वविद्यालय, मथुरा के विधि संकाय के प्रोफेसर डॉ. ओंकार नाथ तिवारी ने सड़क पर रहने वाले बच्चो के प्रति पुलिस के रवैये पर चर्चा की तथा इन बच्चो में पुलिस के प्रति नकारात्मक छवि को कम किये जाने को लेकर कई सुझाव दिए। प्रजाक संस्थान के संस्थापक दीप पुरकायस्था ने गैर सरकारी संस्थानों की इन बच्चो के प्रति जिम्मेवारी तथा इनकी भूमिका से अवगत कराया। सवेरा फाउंडेशन की पूर्व निदेशक डॉ. माला गोस्वामी ने सड़क पर रहने वाले बच्चो की तस्करी से जुड़ी अपराध पर चर्चा की वहीं सेण्टर फॉर साइबर विक्टिम कॉउन्सिलिंग की संस्थापक डॉ. देबरती हलदर ने इन बच्चो द्वारा किये जाने वाले अपराध जैसे चोरी, साइबर से जुड़ी अपराध, छिना झपटी इत्यादि पर चर्चा की।
आई० पी० ई० आर० संस्थान की संस्थापक डॉ. बिजली मल्लिक ने किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 पर चर्चा करते हुए इसे और मजबूती से देश भर में लागु किये जाने पर जोर दिया। बाल कल्याण समिति, दिल्ली की सदस्य मनोज कुमार शर्मा ने बाल कल्याण समिति के कार्यक्षेत्र तथा इनकी भूमिका पर चर्चा की। इस दो दिवसीय ई-संगोष्ठी का आयोजन डॉ. के० एन० मोदी विश्वविद्यालय, राजस्थान के सहयोग से हुआ तथा समापन (CRDO INDIA) के राष्ट्रीय सचिव यशवंत नारायण के उद्वोधन से किया गया। अंत में डॉ. शुभ्रा सान्याल ने इस बात की भी चर्चा की, कि हमें इस कार्यक्रम को यहीं समाप्त नहीं करना बल्कि इस तरह के कार्यक्रम को निरंतर आगे भी करते रहना है जिससे समाज में इन बच्चों के प्रति लोगों के व्यवहार में बदलाव तथा उनके प्रति नकारात्मक भाव कम हो सके जिससे लोग इन बच्चों के मदद के लिए सामने आ सके। उक्त ई-संगोष्ठी में देश भर से करीब 200 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। इस संगोष्ठी में (CRDO INDIA) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष मनीष कुमार सिन्हा, दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष मेघा पांचाल, राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष शुभम गौड़ तथा अन्य माननीय सदस्यगण शामिल हुए।