October 11, 2022

10.10.2022 (दरभंगा) : दरभंगा हवाई अड्डा को जिला प्रशासन दरभंगा की ओर से जल्द ही 24 एकड़ जमीन मिल जाएगी इस कड़ी में जिला प्रशासन, दरभंगा द्वारा आज 10 अक्टूबर 2022 को मंत्रीमंडल सचिवालय, बिहार पटना-सह-अधियाची विभाग को दरभंगा हवाई अड्डा के लिए लगभग - 07 एकड़ जमीन हस्तांतरित किया गया। जिसमें ग्राम - बेला, (टुकड़ा नम्बर - 01 एवं 02) थाना - दरभंगा सदर, थाना नम्बर - 516, अंचल - दरभंगा सदर में से 6.65 एकड़ तथा ग्राम - बेलादुल्ला, थाना - दरभंगा सदर, थाना नम्बर - 513, अंचल - दरभंगा सदर में से 0.25 एकड़ जमीन शामिल है, जिसे अधिघोषण संख्या - 387 एवं 389 दिनांक - 09 मई 2022 के द्वारा अधिग्रहित किया गया है। उक्त अवसर पर संयुक्त सचिव, मंत्रीमंडल सचिवालय, बिहार पटना (अधियाची पदाधिकारी), जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, दरभंगा एवं अन्य जिला स्तरीय वरीय पदाधिकारीगण उपस्थित थे।
October 11, 2022

10.10.2022 (दरभंगा) : जिलाधिकारी-सह-प्रधान गणना पदाधिकारी, राजीव रौशन द्वारा आदेश निर्गत करते हुए कहा है कि बिहार जाति आधारित गणना, 2022 के सफलता पूर्वक एवं ससमय निष्पादन हेतु जिला स्तर पर 10 कोषांगों का गठन करते हुए वरीय पदाधिकारी, नोडल/सहायक नोडल पदाधिकारी की प्रतिनियुक्ति की गयी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार बिहार जाति आधारित गणना, 2022 हेतु 10 कोषांग बनाये गये है, जिनमें कार्मिक कोषांग, प्रिटिंग कोषांग, प्रशिक्षण कोषांग, सामग्री वितरण/वापसी कोषांग, गणना किट प्रबंधन कोषांग, आई.टी. कोषांग, विधि-व्यवस्था कोषांग, वित्तीय प्रबंधन कोषांग, अनुश्रवण कोषांग तथा प्रचार-प्रचार कोषांग शामिल है। उन्होंने सभी कोषांग के वरीय पदाधिकारी एवं नोडल पदाधिकारी को अपने-अपने आवंटित कोषांग के कार्य दायित्व को अच्छी तरह से पारदर्शिता के साथ करने का निर्देश दिया। गौरतलब है कि कार्मिक/प्रिटिंग/प्रशिक्षण/वित्तीय प्रबंधन कोषांग का वरीय प्रभारी पदाधिकारी अपर समाहर्त्ता-सह-अपर प्रधान गणना पदाधिकारी, दरभंगा राजेश झा ‘‘राजा’ को बनाया गया है। वहीं सामग्री वितरण-वापसी/गणना किट प्रबंधन/प्रचार-प्रसार कोषांग का वरीय प्रभारी पदाधिकारी अपर समाहर्त्ता (लोक शिकायत)-सह-जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी अजय कुमार तथा आई.टी. कोषांग एवं अनुश्रवण कोषांग का वरीय प्रभारी पदाधिकारी उप विकास आयुक्त अमृषा बैंस को बनाया गया है। उन्होंने आदेश में कहा है कि विधि-व्यवस्था कोषांग सभी अनुमण्डल पदाधिकारी, दरभंगा जिला द्वारा गठित किया जायेगा।
October 11, 2022

09.10.2022 (दरभंगा) : शरद पूर्णिमा के मौके पर तारडीह प्रखण्ड के लगमा स्थित प्रसिद्ध जदगीश नारायण ब्रह्मचर्य आश्रम में मिथिला के विद्वानों का जमावड़ा लगा। इस मौके पर संस्कृत व संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन और वृत्ति निर्माण में इस आश्रम के योगदान पर संगोष्ठि आयोजित की गई। इस कार्यक्रम को बिहार सरकार के जल संसाधन व सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग के मंत्री संजय कुमार झा ने भी संबोधित किया तथा वहाँ अपने ऐच्छिक कोष से निर्मित एक छात्रावास के साथ-साथ चाहरदिवारी और द्वार का लोकार्पण किया।
उन्होंने अपने संबोधन में लगमा आश्रम को विद्यापीठ बनाने के लिए बिहार सरकार से लेकर केन्द्र सरकार तक पहल करने की बात कही है। उन्होंने मैथिल विद्वानों को संबोधित करते हुए संस्कृत को रोजगार से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही उन्होंने शरद पूर्णिमा के महत्व के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि आज हम शरद पूर्णिमा के दिन लगमा के इस पवित्र आश्रम में एकत्रित हुए हैं। हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का काफी महत्व है। विज्ञान भी मानते हैं कि इस दिन पृथ्वी चंद्रमा के सबसे नजदीक होती है। शास्त्रों के मुताबिक चंद्रमा मनुष्य के मन को शांत करता है। पूर्णिमा की रात के चांद के महत्व के बारे में बताते हुए उन्होंने देश के भूतपूर्व राष्ट्रपति और मिसाइलमैन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम से जुड़ी कहानी के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा की ''कलाम साहब कहा करते थे कि वे पूर्णिमा की रात को जरूर 2-3 घंटा खुले आसमान के नीचे में बिताते थे। इस प्रक्रिया से उनका मन काफी शांत रहता था। राष्ट्रपति बनने के बाद भी उनका यह सिलसिला जारी रहा है।
यह सीख कलाम साहब को उनके पिता ने दी थी। उनके पिता को रामेश्वर मंदिर के साधुओं ने पूर्णिमा की रात के चांद के महत्व के बारे में बताया था। कलाम साहब के पूर्वजों को रामेश्वर मंदिर के प्रथम प्रसाद ग्रहण करने का भी अधिकार प्राप्त था "! लगमा आश्रम के योगदान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में भी इस आश्रम ने गुरुकुल की परंपरा को जीवंत रखा है। इस भौतिक युग में भी यह आश्रम वैदिक और संस्कृत की शिक्षा के प्रसार में जुटा हुआ है। आज भी यहां के बटुक भिक्षाटन कर अपनी पढ़ाई पूरी करते हैं। उन्होंने कहा "मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि मैं आज उनके लिए एक छोटा सा प्रयास कर पाया, उनके लिए एक छात्रावास की व्यवस्था की।" संस्कृत को रोजगार से जोड़ने की अपील करते हुए श्री झा ने लोगों से इस भाषा से जुड़े पेशे को लेकर धारणा बदलने की अपील की। उन्होंने कहा, ''हमें यह समझना होगा कि संस्कृत रोजगार की एक भाषा है।
आज के समय में दिल्ली, मुंबई जैसे महानगर हो या फिर कैलिफोर्निया जैसा अमेरिका का शहर, पंडितों के पास रोजगार है। आज का जमाना टेक्नोलॉजी का है। भारत में बैठकर पंडित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए विदेशों में भी पूजा कराते हैं। उनके पास नंबर लगा होता है।'' उन्होंने आगे कहा, ये पंडित कौन हैं? ये हमारे-आपके बीचे के ही लोग हैं। इसलिए हमें इनके प्रति धारणा बदलने की आवश्यकता है। यह रोजगार के एक जरिया है। इसके अलावा संस्कृत के विद्वानों से इस विषय को और भी भिन्न रोजगारों से जोड़ने के लिए मंथन करने की अपील की। उन्होंने इस क्षेत्र में रिसर्च की आवश्यक्ता पर बल दिया। उन्होंने कहा की ''सरकार आती-जाती रहती है, लेकिन विद्वानों की विद्वता स्थाई है। उनकी राय सरकारों के लिए भी काफी महत्व रखती है। अगर कुछ तथ्यात्मक बातें आपकी तरफ से निकलकर आती है तो मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि मैं अपनी शक्ति के मुताबिक इसे सरकार में रखूंगा।'' इस मौके पर उन्होंने कहा की मुझे सांस्कृतिक विरसातों के विकास को लेकर काम करने में एक अलग आनंद की अनुभूति होती है।
जैसे संस्कृत है वैसे ही मैथिली हमारे संस्कृति का एक अहम हिस्सा है। मैंने मिथिलाक्षर को लेकर भारत सरकार में काफी ठोस पहल किया था। कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति पंडित शशिनाथ झा भी इसके साक्षी हैं। मैंने केंद्र सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय से मिथिलाक्षर के संरक्षण और संवर्धन को लेकर एक कमिटि गठित करवायी थी। इसमें मिथिला के चार विद्धानों ने अपनी-अपनी राय दी है। इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सरकार में दे दी है। इस रिपोर्ट पर कार्रवाई का इंतजार है। जल्द ही मैं इस मामले को लेकर इस विभाग के मंत्री से मिलूंगा और इस पर ठोस कार्रवाई की कोशिश करूंगा।
मिथिला की धरती को उर्वर बताते हुए उन्होंने इस मौके पर कई विद्वानों को याद किया। इस धरती पर उदयनाचार्य, मंडन मिश्र, वाचस्पति मिश्र, भारती, कुमारिल भट्ट, गंगेश उपाध्याय, विद्यापति, शंकर मिश्र, पक्षधर मिश्र, खंडवाला राजवंश के पहले महराजा महेश ठाकुर, बच्चा झा जैसे विभूतियों ने जन्म लिया। उनकी विद्वता आज भी हमारे बीच ग्रंथों के रूप में मौजूद हैं। उन्होंने कहा की ये नाम अंतिम नहीं हैं। और भी कई विद्वान इस धरती ने दी है। यहां की जमीन इस मामले में काफी उर्वर है। इसे यहीं नहीं थमने देना चाहिए। आवश्यकता है इसे नई पीढ़ि में ट्रांसफर करने की। संस्कृत विश्वविद्यायल के कुलपति पं. डॉ. शशिनाथ झा, जदगीश नारायण ब्रह्मचर्य आश्रम लगमा के आचार्य और कार्यक्रम के आयोजक श्री कृष्ण मोहन दास ब्रह्मचारी ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।
October 11, 2022

07.10.2022 (दरभंगा) : जिलाधिकारी-सह-जिला दंडाधिकारी राजीव रौशन की अध्यक्षता में माननीय उच्च न्यायालय पटना में दरभंगा जिला के विभिन्न कार्यालयों के लंबित समादेश याचिका (सी.डब्ल्यू.जे.सी) एवं अवमानना वाद (एम.जे.सी) की समीक्षा बैठक आयोजित की गयी। बैठक में कार्यालयवार शमादेश याचिका (सी.डब्ल्यू.जे.सी) के लंबित वादों की समीक्षा की गई। वैसे कार्यालय जहां समादेश याचिका से जुड़े लंबित वादों की संख्या अधिक हैं तथा उनके विरुद्ध शपथ दायर नहीं की गई है, उनसे कारण पृच्छा करते हुए उनके वेतन अगले आदेश तक स्थगित कर दिया गया है। जिनमें अंचलाधिकारी सदर, अंचलाधिकारी बहेड़ी, अंचलाधिकारी घनश्यामपुर, अंचलाधिकारी कुशेश्वरस्थान पूर्वी, अंचलाधिकारी बिरौल, प्रखंड विकास पदाधिकारी बहेड़ी का वेतन स्थगित किया गया है। प्रखंड विकास पदाधिकारी बेनीपुर का लगातार बैठक से अनुपस्थित रहने को गंभीरता से लिया गया है तथा उनसे कारणपृच्छा की गई है। इसके साथ ही अपर समाहर्ता कार्यालय, जिला प्रोग्राम कार्यालय, समेकित बाल विकास योजनाएं, दरभंगा, जिला भू-अर्जन कार्यालय दरभंगा, जिला पंचायत कार्यालय दरभंगा, अनुमंडल कार्यालय सदर, बेनीपुर एवं बिरौल, डीसीएलआर कार्यालय सदर, बिरौल एवं बेनीपुर, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल कार्यालय, पीएचईडी कार्यालय दरभंगा, नगर निगम कार्यालय, दरभंगा, नगर परिषद बेनीपुर, राज्य खाद्य निगम, सिविल सर्जन कार्यालय, जिला खनन कार्यालय, डीएमसीएच कार्यालय, बिहार राज्य आवास बोर्ड कार्यालय, जिला कृषि कार्यालय दरभंगा, कोषागार कार्यालय दरभंगा एवं जिला भविष्य निधि कार्यालय के लंबित वादों की समीक्षा की गई तथा सभी संबंधित पदाधिकारी को एक सप्ताह के अंदर समादेश याचिका (सी.डब्ल्यू.जे.सी) के लंबित मामले में जिले के किसी विद्वान अधिवक्ता से जवाब तैयार करवा कर माननीय उच्च न्यायालय में दायर कर शपथ संख्या उपलब्ध कराने का आदेश दिया गया। जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि किसी भी विद्वान अधिवक्ता से जवाब तैयार करवाया जा सकता है। इसके लिए 1500 रुपये मानदेय निर्धारित है।
बैठक में अनुमंडल पदाधिकारी सदर स्पर्श गुप्ता, अपर समाहर्ता राजेश झा राजा, उप निदेशक जन संपर्क नागेंद्र कुमार गुप्ता, सिविल सर्जन अनिल कुमार, डीसीएलआर सदर राकेश कुमार रंजन, अनुमंडल पदाधिकारी बिरौल संजीव कुमार कापर, अनुमंडल पदाधिकारी बेनीपुर शंभू नाथ झा, प्रभारी पदाधिकारी विधि शाखा ललित राही, जिला पंचायती राज पदाधिकारी आलोक राज एवं संबंधित पदाधिकारी गण उपस्थित थे।
October 01, 2022

30.09.2022 (दरभंगा) : ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के प्रति कुलपति प्रोफेसर डॉली सिन्हा के प्रति कुलपति के रूप में 2 वर्ष पूरा होने पर कुलपति कार्यालय में आयोजित संक्षिप्त स्वागत- सम्मान समारोह में विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों एवं कर्मियों के द्वारा पाग- चादर, मखान- माला, पुष्पगुच्छ, फूल- माला व स्मृति- चिह्न आदि से उनका स्वागत एवं सम्मान किया गया। इस अवसर पर प्रति कुलपति ने केक काटकर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सभी उपस्थित व्यक्तियों का मुंह मीठा कराया। वहीं विश्वविद्यालय दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के निदेशक प्रो अशोक कुमार मेहता के नेतृत्व में कर्मियों ने स्मृतिचिह्न के रूप में बुद्ध का छायाचित्र प्रदान कर प्रति कुलपति का सम्मान किया। इस अवसर पर कुलपति प्रोफेसर सुरेन्द्र प्रताप सिंह ने प्रति कुलपति प्रोफेसर डॉली सिन्हा को 2 वर्षों का कार्यकाल पूरा करने हेतु बधाई एवं शुभकामना देते हुए उनके द्वारा संपादित कार्यों की सराहना की। उन्होंने कोरोना काल में ऑनलाइन वर्ग- व्यवस्था तथा स्नातक व स्नातकोत्तर छात्र- छात्राओं के लिए केन्द्रीय कृत ऑनलाइन वर्ग व्यवस्था, नैक की तैयारी तथा परीक्षा संचालन आदि कार्यों हेतु प्रति कुलपति का धन्यवाद किया। कुलपति ने प्रति कुलपति सहित सभी पदाधिकारियों से इसी तरह अपनी पूरी क्षमता एवं उत्साह से विश्वविद्यालय के कार्यों में सहयोग देने की बात कही। कुलपति सहित सभी पदाधिकारियों का धन्यवाद करते हुए प्रति कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय के कुलपति के निर्देशानुसार 2 वर्षों की तरह ही हमलोग आगे भी बेहतरीन कार्य करने का संकल्प व्यक्त किया। उन्होंने कुलसचिव को कर्मठ एवं अच्छे कार्यों के कर्ता के रूप में प्रकाश डालते हुए अपने 2 वर्षों के कार्यकाल में संपादित शैक्षणिक कार्यों, स्नातक तृतीय खण्ड के जीएस वर्ग संचालन तथा केन्द्रीयकृत ऑनलाइन वर्ग व्यवस्था की विस्तार से चर्चा की। कुलसचिव प्रोफेसर मुश्ताक अहमद ने सबके सार्थक सहयोग से विश्वविद्यालय के विभिन्न क्षेत्रों में प्राप्त उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए विश्वविद्यालय में बेहतरीन कार्यों के सम्पादन हेतु सबको बधाई एवं धन्यवाद दिया। कार्यक्रम का संचालन दूरस्थ शिक्षा के निदेशक प्रो अशोक कुमार मेहता ने किया। इस अवसर पर वित्त पदाधिकारी सह वित्तीय सलाहकार कैलाश राम, कुलानुशासक प्रो अजयनाथ झा, डॉ अब्दुल कलाम महिला प्रौद्योगिकी संस्थान के निदेशक प्रो बिमलेन्दु शेखर झा, डॉ अवनि रंजन सिंह, आइक्यूएसी के निदेशक डा जिया हैदर, परीक्षा नियंत्रक डा आनंद मोहन मिश्र, विकास पदाधिकारी प्रो सुरेन्द्र प्रसाद, प्रेस एवं मीडिया प्रभारी डा आर एन चौरसिया, मानविकी संकाय के डीन प्रो ए के बच्चन, पेंशन पदाधिकारी डा सुरेश पासवान, सीसीडीसी डा महेश प्रसाद सिन्हा, चिकित्सा पदाधिकारी डा गीतेन्द्र ठाकुर, उप कुलसचिव प्रथम डा कामेश्वर पासवान, अभियंता मो इकबाल, कुलपति के निजी सचिव मो अली अशरफ जमाल, प्रति कुलपति के निजी सहायक प्रणव कुमार तथा मुरारी झा सहित अनेक व्यक्ति उपस्थित थे। तत्पश्चात उप कुलसचिव प्रथम डा कामेश्वर पासवान के नेतृत्व में स्थापना शाखा के कर्मी- प्रमोद कुमार ठाकुर, सुरेश कुमार मंडल, डा नरेश राम, डा नरेश कुमार महतो, विश्वनाथ ठाकुर, माधव नारायण झा, शंकर पासवान, सुरेन्द्र मंडल, चन्द्र कुमार, सुमित कुमार तथा राजा कुमार आदि ने प्रति कुलपति कार्यालय जाकर उन्हें पुष्पगुच्छ, फूल- माला आदि से सम्मानित करते हुए प्रसन्नता व्यक्त किया तथा प्रति कुलपति के कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें अपने कार्यकाल का 2 वर्ष पूरा करने हेतु बधाई दिया।