November 17, 2022

16.11.2022 (दरभंगा) : 14 नवंबर को देश में बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है, जबकि 20 नवंबर को सम्पूर्ण विश्व में बाल दिवस मनाया जाता रहा है। इस वर्ष 14 नवंबर से 20 नवम्बर की अवधि में सरकार एवं महत्वपूर्ण घटक यूनिसेफ द्वारा Child right week मनाया जा रहा है, जिसमें श्रमायुक्त, बिहार पटना के निदेश के आलोक में आज दिनांक-16 नवम्बर 2022 को बाल दिवस के अवसर पर कार्यक्रम उपश्रमायुक्त दरभंगा के कार्यालय में आयोजित की गयी। कार्यक्रम में सर्वप्रथम सभी श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, चाइल्ड लाइन की टीम, नियोजनालय के पदाधिकारी एवं कर्मी को राकेश रंजन, श्रम अधीक्षक, दरभंगा के द्वारा बाल श्रम नियोजित नहीं करने से सम्बंधित शपथ दिलायी गयी तथा धावा दल और चाइल्ड लाइन की टीम को रवाना किया गया। धावा दल की टीम के द्वारा लहेरियासराय लोहिया चौक से होते हुए दरभंगा टावर चौक से राज कैंपस और बाईपास होते हुए विभिन्न दुकान/प्रतिष्ठान में शपथ पत्र भरवाया गया और चाइल्ड लाइन के द्वारा दोस्ती बैंड और चाइल्ड लाइन बैच 1098 सभी कर्मी और पदाधिकारियों को बाँधा गया तथा सभी बच्चों के अधिकार सुरक्षित रखने हेतु आवश्यक करवाई की गई। राकेश रंजन, श्रम अधीक्षक द्वारा बताया गया कि बच्चे देश के भविष्य हैं। बच्चों का स्थान विद्यालय में और खेल कूद के मैदान में है न कि होटल, ढावा, गैराज में। उनके द्वारा यह भी बताया गया कि बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए पढ़ाई के साथ साथ खेलकूद दोनो आवश्यक है और यह हम सबकी सामूहिक ज़िमेदारी है। देश के विकास के लिए सभी बच्चों को समूचित शिक्षा उपलब्ध कराया जाय। श्रम अधीक्षक द्वारा जिले के सभी नियोजकों से अपील की गयी कि बच्चों को नियोजित नहीं करें। यदि कोइ नियोजक दुकान/प्रतिष्ठान में बच्चों को नियोजित करते हैं तो उनके विरूद्ध कठोर कानूनी करवाई की जाएगी। यदि किसी दुकान /प्रतिष्ठान में बाल श्रम से कार्य लिया जा रहा है तो कोई भी व्यक्तिटोलफ्री नंबर-1098 पर शिकायत कोई भी व्यक्ति कर सकते हैं।
November 17, 2022

16.11.2022 (दरभंगा) : राज्य को फाइलेरिया मुक्त बनाने की दिशा में विभाग की ओर से फाइलेरिया क्लिनिक (एमएमडीपी) का उद्धाटन सिविल सर्जन डॉ.अनिल कुमार सिन्हा, एसीएमओ डॉ. एसएस झा, जिला वैक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. जेपी महतो, डीआईओ डॉ. एके मिश्रा, एन.सी.डी.ओ डॉ. सत्येंद्र कुमार मिश्रा एवं केयर इंडिया के डी.पी.ओ धीरज सिंह द्वारा किया गया। यह क्लिनिक सुबह 10.30 बजे से दोपहर तीन बजे तक चलेगा। इसमे फाइलेरिया रोग के जानकारी व उपचार की जाएगी। साथ ही निःशुल्क दवा भी उपलब्ध कराई जाएगी। इस क्लीनिक के खुल जाने से फाइलेरिया रोगी व परिजनों को सुविधा मिलेगी। इस अवसर पर कंसल्टेंट बबन प्रसाद, भिबीडीसीओ आसुतोष कुमार, एफआई गणेश महासेठ, सीएफएआर के डिविजनल कॉर्डिनेटर मीडिया अजय कुमार, अंकित कुमार, अंज़ार अहमद सहित कई अन्य अधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थे। सिविल सर्जन दरभंगा डॉ ए.के. सिन्हा ने कहा कि जिले में सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) कार्यक्रम के तहत फाइलेरिया संक्रमण को रोकने के लिए दवा खिलाई जाती है। फाइलेरिया के मरीजों को बेहतर सुविधा एवं क्लीनिकल ट्रीटमेंट उपलब्ध कराने को लेकर राज्य सरकार द्वारा बिहार के सभी जिलों में मार्डीबिलिटी मैनेजमेंट एंड डिसेबिलिटी (एमएमडीपी) प्रीवेंशन क्लिनिक खोलने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिया गया था। इसके आलोक में फाइलेरिया क्लिनिक का शुभारंभ किया गया है। फाइलेरिया के प्रति जनमानस को जागरूक करने की आवश्यकता है। जिला वैक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ जेपी महतो ने बताया कि फाइलेरिया (हाथीपांव) मरीजों की देखभाल के लिए जिला स्तरीय रुग्णता प्रबंधन एवं विकलांगता रोकथाम (एमएमडीपी) फाइलेरिया क्लिनिक का शुभारंभ किया गया है। यहां प्रतिदिन सुबह 10:30 बजे से दोपहर 3 बजे तक हाथीपांव के मरीज अपना सलाह, उपचार एवं सफाई को लेकर जानकारी ले सकते हैं। मरीज़ों के सहायता के लिए कर्मी अंज़ार अहमद को प्रतिनियुक्त किया गया है। जो समय से कार्यस्थल पर मौजूद रहेंगे। इसके अलावा एक और कर्मी की ड्यूटी यहाँ लगाई गई है। डॉ. महतो ने कहा कि फाइलेरिया के उपचार व दवा के लिए फाइलेरिया कार्यालय में सम्पर्क कर सकते है। हाथीपांव एवं हाईड्रोसिल दोनों फाइलेरिया के ही लक्षण होते हैं।
November 17, 2022

15.11.2022 (दरभंगा) : जिला प्रशासन दरभंगा के दो पदाधिकारियों की संजीदगी भरी पहल ने बीमार एवं मानसिक रूप से कमजोर एक भूली भटकी वृद्धा को आज उसे उसके परिवार से मिला दिया। प्राप्त जानकारी के अनुसार विगत 2 दिनों से दरभंगा जिला गोपनीय शाखा के समीप सड़क किनारे एक वृद्धा पड़ी हुई थी। गोपनीय शाखा के विशेष कार्य पदाधिकारी सत्यम सहाय को गोपनीय आने जाने के क्रम में वृद्धा पर नजर पड़ी, गौर करने पे उन्हें कुछ संदेह लगा, फिर उन्होंने उस वृद्धा के समीप जाकर उससे बात करने की कोशिश की। बीमार हालत में देखकर उन्होंने उसे थाना की मदद से डीएमसीएच भिजवाया तथा इस संबंध में सहायक निदेशक, सामाजिक सुरक्षा कोषांग को सूचना देते हुए उन्हें इलाज के उपरांत वृद्धा आश्रम में रखवाने का सुझाव दिया। सहायक निदेशक, सामाजिक सुरक्षा सुश्री नेहा ने डीएमसीएच में जाकर वृद्धा से मिलकर थोड़ी जानकारी ली फिर हेल्पलाइन की मदद से उसके घर परिवार का पता लगवाया। हेल्पलाइन की मदद से पता लगा कि वह वृद्धा सहरसा की रहने वाली है तथा विगत 6 महीने से अपने घर से लापता है। उनके बेटों को इस संबंध में सूचना दी गई। आज उसके दोनों बेटे दरभंगा आ गए एवं डीएमसीएच में अपनी वृद्ध मां से मुलाकात की,अपने बेटों को देखकर वृद्धा मां की आंखों से खुसी के आंसू छलक गए। कल बेटे अपने मां को अपने घर ले जाएंगे। इस प्रकार जिला प्रशासन के दो पदाधिकारियों की संजीदगी भरी पहल ने एक भूली विसरी बीमार वृद्ध महिला को आज उसके परिवार एवं बेटे से मिलवा दिया। आज समाज के हर व्यक्ति को ऐसे लोगों की मदद के लिए आगे आन की जरूरत है।
November 17, 2022

15.11.2022 (दरभंगा) : पर्यवेक्षण/बाल गृह परिसर मे बाल अधिकार संरक्षण सप्ताह (14-20 नवंबर) के तहत जिला बाल संरक्षण इकाई, दरभंगा द्वारा कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में मंत्री, समाज कल्याण विभाग मदन सहनी ने भाग ले कर बच्चों का उत्साहवर्धन किया। विशिष्ट अतिथि के रूप में उप विकास आयुक्त महोदया शामिल हुईं।
सर्वप्रथम मंत्री एवं उप विकास आयुक्त महोदया को पाग, अंग वस्त्र, बुके व मिथिला पेंटिंग से स्वागत किया गया। बाल गृह के बच्चों ने अतिथियों के स्वागत में स्वागत गान व देश भक्ति गीत प्रस्तुत किया। बाल गृह एवं पर्यवेक्षण गृह के एक- एक बच्चे ने भाषण दिया। तदुपरांत मंत्री ने पर्यवेक्षण गृह के बच्चों को वोकेशनल कोर्स से जोड़ने के उद्देश्य से सिलाई प्रशिक्षण (किशोर न्याय परिषद के प्रयास से प्रभास दास फाउंडेशन द्वारा) का उद्घाटन करने के बाद जागरुकता रथ को हरी झंडी दिखा कर रवाना किया। यह रथ दरभंगा जिले के सभी प्रखंडों का भ्रमण कर जिला बाल संरक्षण इकाई द्वारा संचालित योजनओं व गतिविधियों के साथ कानूनी रूप से बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया का प्रचार करेगी। इसका एक उद्देश्य सामाजिक कारणों से परित्यक्त नवजात शिशु को फेंकने की बजाय सरकार द्वारा संचालित विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान में बिना अपनी पहचान बताये सौंपने की जानकारी देना भी है। इसके बाद मंत्री जी ने बाल गृह व पर्यवेक्षण गृह के बच्चों द्वारा बनायी गयी पेंटिंग एवं हस्तशिल्प कलाकृतियों की प्रदर्शनी का अवलोकन कर, उनकी सराहना की।
पुनः मंच पर UNCRC, (United Nation Child Right Convention) (बच्चों के अधिकार पर संयुक्त राष्ट्र कंवेंशन ) में अपनाये गये बच्चों के चार मुख्य अधिकार: जीने का अधिकार, विकास का अधिकार, सहभागिता का अधिकार और संरक्षण का अधिकार के साथ बच्चों को नशा के दुष्परिणाम तथा बाल श्रम उन्मूलन के लिए सरकारी प्रावधानों पर नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति की गयी। बाल अधिकार संरक्षण सप्ताह (14-20 नवंबर) के दौरान दोनों गृहों के बच्चों के बीच आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं जैसे कैरम, लूडो, वालीबॉल, कबड्डी, पेंटिंग आदि मे सफल बच्चों को सर्टिफिकेट एवं शील्ड देकर प्रोत्साहित किया गया। मंच का संचालन कर रहे पंकज कुमार सिन्हा ने बचपन पर स्वरचित कविता सुना कर सभी को बचपन की याद दिला दी। मंत्री मदन सहनी ने दोनों गृहों के बच्चों को संबोधित करते हुए उन्हे सही रास्ते पे चलने तथा एक अच्छा नागरिक बनने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने सभी बच्चों को शिक्षा तथा व्यवसायिक प्रशिक्षण से जोड़ कर उन्हे समाज की मुख्य धारा में जोड़ने पर विशेष जोर दिया।
बच्चों द्वारा गृह में रहते हुए अपनी पढाई जारी रखने तथा जिला बाल संरक्षण इकाई द्वारा बच्चों को वोकेशनल कोर्स से जोड़ने के प्रयासों की प्रशंसा की और ऐसे और प्रयास करने की सलाह दी। उन्होंने सभी स्कूलों को शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के बच्चों को 25% आरक्षण का लाभ दिलवाने की कड़ाई से अनुपालन करवाने की आवश्यकता पर जोर दिया। पर्यवेक्षण गृह मे गंभीर व छोटे अपराधों के मामले में आवासित बच्चों के पृथक्करण तथा कम गंभीर मामलों के त्वरित निष्पादन की अपेक्षा व्यक्त की। कार्यक्रम के अंत मे सहायक निदेशक द्वारा धन्यवाद ज्ञापित करते हुए मंत्री का आभार व्यक्त किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता सहायक निदेशक, जिला बाल संरक्षण इकाई श्रीमती नेहा नूपुर ने की। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी समेकित बाल विकास योजनाएं डॉ0 रश्मि वर्मा, सहायक निदेशक, सामाजिक सुरक्षा सुश्री नेहा कुमारी, सदस्य किशोर न्याय परिषद, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष व सभी सदस्यों तथा जिला बाल संरक्षण इकाई, बाल गृह एवं पर्यवेक्षण गृह के सभी कर्मियों ने कार्यक्रम में भाग लिया।
November 17, 2022

15.11.2022 (दरभंगा) : मुख्य सचिव, बिहार, आमिर सुबाहनी की अध्यक्षता में सूबे के अति कुपोषित बच्चों को कुपोषण के दायरे से निकालकर उन्हें स्वस्थ्य करने के लिए पूर्णियाँ जिला द्वारा बनाये गए मॉडल को बिहार के दरभंगा सहित ग्यारह जिले में क्रियान्वयन करवाने हेतु संबंधित विभाग एवं जिलाधिकारियों के साथ बैठक आयोजित की गयी। बैठक में बताया गया कि कुपोषित बच्चों को दो वर्ग में विभाजित किया जा सकता है, एक अति कुपोषित और दूसरा गंभीर रूप से अति कुपोषित।
मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी (जीविका), बिहार, राहुल कुमार ने पावर प्वाइंट प्रस्तुतीकरण के माध्यम से बिहार के विभिन्न जिलों के स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि जन्म के शुरूआती दो-तीन महीने से पाँच वर्ष तक यदि गंभीर रूप से कुपोषित बच्चें को पोषक/दवा देने पर उसे कुपोषण के दायरे से बाहर निकाला जा सकता है। उन्होंने कहा कि पूर्णियाँ जिला में इसका बेहतर प्रयोग किया गया है। इसके लिए सबसे पहले वैसे बच्चों की पहचान कर ली जाए तथा स्वास्थ्य विभाग, बाल विकास परियोजना एवं जीविका के द्वारा संयुक्त रूप से अभियान चलाकर उन बच्चों को कुपोषण के दायरे से निकाला जाए। उन्होंने कहा कि इसके लिए माता एवं शिशु दोनों की निगरानी एवं अनुश्रवण आवश्यक है। नवजात शिशु को कम से कम छः माह तक माँ का दूध मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए एक संवर्धन एप भी बनाया गया है। सर्वप्रथम उनका वजन एवं लम्बाई की माप कर पता लगाया जा सकता है, कि उनकी स्वास्थ्य की स्थिति क्या है।
इसके उपरान्त स्वास्थ्य जाँच तथा सामुदायिक जागरूकता के माध्यम से उनके स्वास्थ्य में सुधार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे गंभीर रूप से अति कुपोषित बच्चों को एमोक्सीलीन, फौलिक एडिट, आई.एफ.एस. सीरफ, जिंग, विटामिन - ए एवं मल्टीविटामिन दिया जाना आवश्यक है। 16 सप्ताह का प्रोटोकॉल कार्यक्रम बनाया गया है। 16 सप्ताह तक उनकी देखभाल तथा पोषक तत्व प्रदान करने पर वे कुपोषण के दायरे से बाहर निकाले जा सकते है। मुख्य सचिव ने कहा कि इसके लिए जिला स्तर पर आवश्यक दवाएँ एवं उपकरण का क्रय जिला स्वास्थ्य समिति की निधि से किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी जिले के पोषण पुनर्वास केन्द्र (एन.आर.सी.) को सुढृढ़ बनाया जाए, वहाँ यदि आवश्यक उपकरण की आवश्यकता हो, तो उसे राज्य स्वास्थ्य समिति आपूर्ति करें तथा पोषण पुनर्वास केन्द्र (एन.आर.सी.) को एम्बुलेंस की सुविधा उपलब्ध रहें, ताकि जरूरत पड़ने पर गंभीर रूप से कुपोषित शिशु को पोषण पुनर्वास केन्द्र (एन.आर.सी.) लाया जा सके।
उन्होंने कहा कि इसके लिए संबंधित कर्मियों को प्रशिक्षित किया जाए तथा भी.एच.एस.एन.डी. का भी उपयोग किया जाए। बैठक में वरीय पदाधिकारी आर.के. महाजन, अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य विभाग प्रत्यय अमृत, अपर मुख्य सचिव शिक्षा विभाग बिहार दीपक कुमार सिंह, कार्यकारी निदेशक स्वास्थ्य विभाग संजय सिंह उपस्थित थे तथा दरभंगा, सीतामढ़ी, अररिया, वैशाली, शेखपुरा, गोपालगंज, किशनगंज, कटिहार, पूर्णियाँ, बेगुसराय एवं गया जिला के डीएम एवं संबंधित पदाधिकरी ऑनलाईन शामिल रहें।
एन.आई.सी., दरभंगा से ऑनलाईन उपस्थित डीएम राजीव रौशन ने बताया कि जिले के कुपोषित बच्चों को कैम्प मॉड में चिन्ह्ति कर उन्हें कुपोषण के दायरे से बाहर निकाला जाएगा तथा जिले में इस कार्यक्रम को शत-प्रतिशत सफल बनाया जाएगा।उन्होंने कहा कि पूर्व में भी उनके द्वारा सभी बाल विकास महिला पर्यवेक्षिका को अपने साथ भार मापक मशीन के साथ आँगनवाड़ी केन्द्रों पर जाकर अपनी उपस्थिति में बच्चों का वजन लेने का निर्देश दिया गया था, जो शत-प्रतिशत सफल रहा। इसे और भी विस्तृत रूप से क्रियान्वित करवाया जाएगा।दरभंगा एन.आई.सी. से उप विकास आयुक्त अमृषा बैंस, उप निदेशक, जन सम्पर्क नागेन्द्र कुमार गुप्ता, जिला प्रोग्राम पदाधिकारी डॉ. रश्मि वर्मा, केयर इण्डिया की जिला समन्वयक डॉ. श्रद्धा झा उपस्थित थे।