November 17, 2022

15.11.2022 (दरभंगा) : जिला प्रशासन दरभंगा के दो पदाधिकारियों की संजीदगी भरी पहल ने बीमार एवं मानसिक रूप से कमजोर एक भूली भटकी वृद्धा को आज उसे उसके परिवार से मिला दिया। प्राप्त जानकारी के अनुसार विगत 2 दिनों से दरभंगा जिला गोपनीय शाखा के समीप सड़क किनारे एक वृद्धा पड़ी हुई थी। गोपनीय शाखा के विशेष कार्य पदाधिकारी सत्यम सहाय को गोपनीय आने जाने के क्रम में वृद्धा पर नजर पड़ी, गौर करने पे उन्हें कुछ संदेह लगा, फिर उन्होंने उस वृद्धा के समीप जाकर उससे बात करने की कोशिश की। बीमार हालत में देखकर उन्होंने उसे थाना की मदद से डीएमसीएच भिजवाया तथा इस संबंध में सहायक निदेशक, सामाजिक सुरक्षा कोषांग को सूचना देते हुए उन्हें इलाज के उपरांत वृद्धा आश्रम में रखवाने का सुझाव दिया। सहायक निदेशक, सामाजिक सुरक्षा सुश्री नेहा ने डीएमसीएच में जाकर वृद्धा से मिलकर थोड़ी जानकारी ली फिर हेल्पलाइन की मदद से उसके घर परिवार का पता लगवाया। हेल्पलाइन की मदद से पता लगा कि वह वृद्धा सहरसा की रहने वाली है तथा विगत 6 महीने से अपने घर से लापता है। उनके बेटों को इस संबंध में सूचना दी गई। आज उसके दोनों बेटे दरभंगा आ गए एवं डीएमसीएच में अपनी वृद्ध मां से मुलाकात की,अपने बेटों को देखकर वृद्धा मां की आंखों से खुसी के आंसू छलक गए। कल बेटे अपने मां को अपने घर ले जाएंगे। इस प्रकार जिला प्रशासन के दो पदाधिकारियों की संजीदगी भरी पहल ने एक भूली विसरी बीमार वृद्ध महिला को आज उसके परिवार एवं बेटे से मिलवा दिया। आज समाज के हर व्यक्ति को ऐसे लोगों की मदद के लिए आगे आन की जरूरत है।
November 17, 2022

15.11.2022 (दरभंगा) : पर्यवेक्षण/बाल गृह परिसर मे बाल अधिकार संरक्षण सप्ताह (14-20 नवंबर) के तहत जिला बाल संरक्षण इकाई, दरभंगा द्वारा कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में मंत्री, समाज कल्याण विभाग मदन सहनी ने भाग ले कर बच्चों का उत्साहवर्धन किया। विशिष्ट अतिथि के रूप में उप विकास आयुक्त महोदया शामिल हुईं।
सर्वप्रथम मंत्री एवं उप विकास आयुक्त महोदया को पाग, अंग वस्त्र, बुके व मिथिला पेंटिंग से स्वागत किया गया। बाल गृह के बच्चों ने अतिथियों के स्वागत में स्वागत गान व देश भक्ति गीत प्रस्तुत किया। बाल गृह एवं पर्यवेक्षण गृह के एक- एक बच्चे ने भाषण दिया। तदुपरांत मंत्री ने पर्यवेक्षण गृह के बच्चों को वोकेशनल कोर्स से जोड़ने के उद्देश्य से सिलाई प्रशिक्षण (किशोर न्याय परिषद के प्रयास से प्रभास दास फाउंडेशन द्वारा) का उद्घाटन करने के बाद जागरुकता रथ को हरी झंडी दिखा कर रवाना किया। यह रथ दरभंगा जिले के सभी प्रखंडों का भ्रमण कर जिला बाल संरक्षण इकाई द्वारा संचालित योजनओं व गतिविधियों के साथ कानूनी रूप से बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया का प्रचार करेगी। इसका एक उद्देश्य सामाजिक कारणों से परित्यक्त नवजात शिशु को फेंकने की बजाय सरकार द्वारा संचालित विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान में बिना अपनी पहचान बताये सौंपने की जानकारी देना भी है। इसके बाद मंत्री जी ने बाल गृह व पर्यवेक्षण गृह के बच्चों द्वारा बनायी गयी पेंटिंग एवं हस्तशिल्प कलाकृतियों की प्रदर्शनी का अवलोकन कर, उनकी सराहना की।
पुनः मंच पर UNCRC, (United Nation Child Right Convention) (बच्चों के अधिकार पर संयुक्त राष्ट्र कंवेंशन ) में अपनाये गये बच्चों के चार मुख्य अधिकार: जीने का अधिकार, विकास का अधिकार, सहभागिता का अधिकार और संरक्षण का अधिकार के साथ बच्चों को नशा के दुष्परिणाम तथा बाल श्रम उन्मूलन के लिए सरकारी प्रावधानों पर नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति की गयी। बाल अधिकार संरक्षण सप्ताह (14-20 नवंबर) के दौरान दोनों गृहों के बच्चों के बीच आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं जैसे कैरम, लूडो, वालीबॉल, कबड्डी, पेंटिंग आदि मे सफल बच्चों को सर्टिफिकेट एवं शील्ड देकर प्रोत्साहित किया गया। मंच का संचालन कर रहे पंकज कुमार सिन्हा ने बचपन पर स्वरचित कविता सुना कर सभी को बचपन की याद दिला दी। मंत्री मदन सहनी ने दोनों गृहों के बच्चों को संबोधित करते हुए उन्हे सही रास्ते पे चलने तथा एक अच्छा नागरिक बनने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने सभी बच्चों को शिक्षा तथा व्यवसायिक प्रशिक्षण से जोड़ कर उन्हे समाज की मुख्य धारा में जोड़ने पर विशेष जोर दिया।
बच्चों द्वारा गृह में रहते हुए अपनी पढाई जारी रखने तथा जिला बाल संरक्षण इकाई द्वारा बच्चों को वोकेशनल कोर्स से जोड़ने के प्रयासों की प्रशंसा की और ऐसे और प्रयास करने की सलाह दी। उन्होंने सभी स्कूलों को शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के बच्चों को 25% आरक्षण का लाभ दिलवाने की कड़ाई से अनुपालन करवाने की आवश्यकता पर जोर दिया। पर्यवेक्षण गृह मे गंभीर व छोटे अपराधों के मामले में आवासित बच्चों के पृथक्करण तथा कम गंभीर मामलों के त्वरित निष्पादन की अपेक्षा व्यक्त की। कार्यक्रम के अंत मे सहायक निदेशक द्वारा धन्यवाद ज्ञापित करते हुए मंत्री का आभार व्यक्त किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता सहायक निदेशक, जिला बाल संरक्षण इकाई श्रीमती नेहा नूपुर ने की। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी समेकित बाल विकास योजनाएं डॉ0 रश्मि वर्मा, सहायक निदेशक, सामाजिक सुरक्षा सुश्री नेहा कुमारी, सदस्य किशोर न्याय परिषद, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष व सभी सदस्यों तथा जिला बाल संरक्षण इकाई, बाल गृह एवं पर्यवेक्षण गृह के सभी कर्मियों ने कार्यक्रम में भाग लिया।
November 17, 2022

15.11.2022 (दरभंगा) : मुख्य सचिव, बिहार, आमिर सुबाहनी की अध्यक्षता में सूबे के अति कुपोषित बच्चों को कुपोषण के दायरे से निकालकर उन्हें स्वस्थ्य करने के लिए पूर्णियाँ जिला द्वारा बनाये गए मॉडल को बिहार के दरभंगा सहित ग्यारह जिले में क्रियान्वयन करवाने हेतु संबंधित विभाग एवं जिलाधिकारियों के साथ बैठक आयोजित की गयी। बैठक में बताया गया कि कुपोषित बच्चों को दो वर्ग में विभाजित किया जा सकता है, एक अति कुपोषित और दूसरा गंभीर रूप से अति कुपोषित।
मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी (जीविका), बिहार, राहुल कुमार ने पावर प्वाइंट प्रस्तुतीकरण के माध्यम से बिहार के विभिन्न जिलों के स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि जन्म के शुरूआती दो-तीन महीने से पाँच वर्ष तक यदि गंभीर रूप से कुपोषित बच्चें को पोषक/दवा देने पर उसे कुपोषण के दायरे से बाहर निकाला जा सकता है। उन्होंने कहा कि पूर्णियाँ जिला में इसका बेहतर प्रयोग किया गया है। इसके लिए सबसे पहले वैसे बच्चों की पहचान कर ली जाए तथा स्वास्थ्य विभाग, बाल विकास परियोजना एवं जीविका के द्वारा संयुक्त रूप से अभियान चलाकर उन बच्चों को कुपोषण के दायरे से निकाला जाए। उन्होंने कहा कि इसके लिए माता एवं शिशु दोनों की निगरानी एवं अनुश्रवण आवश्यक है। नवजात शिशु को कम से कम छः माह तक माँ का दूध मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए एक संवर्धन एप भी बनाया गया है। सर्वप्रथम उनका वजन एवं लम्बाई की माप कर पता लगाया जा सकता है, कि उनकी स्वास्थ्य की स्थिति क्या है।
इसके उपरान्त स्वास्थ्य जाँच तथा सामुदायिक जागरूकता के माध्यम से उनके स्वास्थ्य में सुधार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे गंभीर रूप से अति कुपोषित बच्चों को एमोक्सीलीन, फौलिक एडिट, आई.एफ.एस. सीरफ, जिंग, विटामिन - ए एवं मल्टीविटामिन दिया जाना आवश्यक है। 16 सप्ताह का प्रोटोकॉल कार्यक्रम बनाया गया है। 16 सप्ताह तक उनकी देखभाल तथा पोषक तत्व प्रदान करने पर वे कुपोषण के दायरे से बाहर निकाले जा सकते है। मुख्य सचिव ने कहा कि इसके लिए जिला स्तर पर आवश्यक दवाएँ एवं उपकरण का क्रय जिला स्वास्थ्य समिति की निधि से किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी जिले के पोषण पुनर्वास केन्द्र (एन.आर.सी.) को सुढृढ़ बनाया जाए, वहाँ यदि आवश्यक उपकरण की आवश्यकता हो, तो उसे राज्य स्वास्थ्य समिति आपूर्ति करें तथा पोषण पुनर्वास केन्द्र (एन.आर.सी.) को एम्बुलेंस की सुविधा उपलब्ध रहें, ताकि जरूरत पड़ने पर गंभीर रूप से कुपोषित शिशु को पोषण पुनर्वास केन्द्र (एन.आर.सी.) लाया जा सके।
उन्होंने कहा कि इसके लिए संबंधित कर्मियों को प्रशिक्षित किया जाए तथा भी.एच.एस.एन.डी. का भी उपयोग किया जाए। बैठक में वरीय पदाधिकारी आर.के. महाजन, अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य विभाग प्रत्यय अमृत, अपर मुख्य सचिव शिक्षा विभाग बिहार दीपक कुमार सिंह, कार्यकारी निदेशक स्वास्थ्य विभाग संजय सिंह उपस्थित थे तथा दरभंगा, सीतामढ़ी, अररिया, वैशाली, शेखपुरा, गोपालगंज, किशनगंज, कटिहार, पूर्णियाँ, बेगुसराय एवं गया जिला के डीएम एवं संबंधित पदाधिकरी ऑनलाईन शामिल रहें।
एन.आई.सी., दरभंगा से ऑनलाईन उपस्थित डीएम राजीव रौशन ने बताया कि जिले के कुपोषित बच्चों को कैम्प मॉड में चिन्ह्ति कर उन्हें कुपोषण के दायरे से बाहर निकाला जाएगा तथा जिले में इस कार्यक्रम को शत-प्रतिशत सफल बनाया जाएगा।उन्होंने कहा कि पूर्व में भी उनके द्वारा सभी बाल विकास महिला पर्यवेक्षिका को अपने साथ भार मापक मशीन के साथ आँगनवाड़ी केन्द्रों पर जाकर अपनी उपस्थिति में बच्चों का वजन लेने का निर्देश दिया गया था, जो शत-प्रतिशत सफल रहा। इसे और भी विस्तृत रूप से क्रियान्वित करवाया जाएगा।दरभंगा एन.आई.सी. से उप विकास आयुक्त अमृषा बैंस, उप निदेशक, जन सम्पर्क नागेन्द्र कुमार गुप्ता, जिला प्रोग्राम पदाधिकारी डॉ. रश्मि वर्मा, केयर इण्डिया की जिला समन्वयक डॉ. श्रद्धा झा उपस्थित थे।
November 17, 2022

14.11.2022 (दरभंगा) : लहेरियासराय स्थित बाबू साहेब कॉलोनी में चित्रांश सेवा समिति की ओर से डायबिटीज के प्रति लोगों में जागरूकता लाने के उद्देश्य से निःशुल्क जाँच शिविर का आयोजन किया गया। इसमें लगभग 150 लोगों की निःशुल्क जांच एवं परामर्श दिया गया। उक्त शिविर में डा. मनीष कुमार प्रसाद ने लोगों की विभिन्न प्रकार के जांच निःशुल्क किये तथा दवाई भी दी। डा. मनीष ने कहा की डायबिटीज ऐसी बिमारी है जिससे लकड़ी में लगे घुन की तरह शरीर धीरे धीरे अंदर से खोकला हो जाता है। यह बीमारी लापरवाही के होता है। लोगों को सचेत रहने की आवश्यकता है। उक्त शिविर में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डा. स्वाति शिखा ने भी कई महिलाओं के चिकित्सीय जांच की तथा आवश्यक परामर्श दिए।
November 17, 2022

14.11.2022 (दरभंगा) : उप विकास आयुक्त श्रीमती अमृषा बैंस की अध्यक्षता में उनके कार्यालय कक्ष में फसल अवशेष (पराली) जलाने से उत्पन्न प्रदूषण व मिट्टी उर्वरा क्षति से अवगत कराने व कैसी भी स्थिति में पराली न जलाने के लिए जागरूकता लाने एवं इस पर निगरानी रखने को लेकर बैठक आयोजित की गयी। बैठक में जिला कृषि पदाधिकारी संजय कुमार सिंह ने बताया कि अन्य जिलों की तुलना में दरभंगा जिला में पराली जलाने की घटना नगण्य है। पूर्व में किसी प्रखण्ड में पराली जलाने की घटना हुई है, लेकिन वर्तमान में सभी किसान सलाहकार एवं कृषि समन्वयक किसानों को जागरूक करते हुए इस पर निगरानी रख रहे हुए हैं।
उप विकास आयुक्त ने सरकार के निर्देश के अनुसार इसका व्यापक प्रचार-प्रसार करवाने के निर्देश दिये। उन्होंने बताया कि एक टन पराली जलाने से 03 किलोग्राम पार्टिकुलेट मैटर व 199 किलोग्राम राख निकलता है। इसके साथ ही 60 किलोग्राम कार्बन मोनोऑक्साइड, 1460 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड एवं 02 किलोग्राम सल्फर डाइऑक्साइड गैस का उत्सर्जन होता है, जो मनुष्य के साथ-साथ जीव-जन्तु एवं पक्षियों के स्वास्थ्य व पर्यावरण के लिए अत्यधिक हानिकारक है। इसके साथ ही फसल अवशेष जलाने से मिट्टी के पोषक तत्वों व कार्बनिक पदार्थों की क्षति होती है एवं मिट्टी में मौजूद लाभकारी सुक्ष्म जीवाणु भी नष्ट हो जाते हैं। हानिकारक गैसों के उत्सर्जन से एरोसॉल के कण निकलते हैं, जो हवा को प्रदूषित करते हैं। इस तरह पराली जलाने से एक ओर जहाँ भूमि की उर्वरा शक्ति कम होती है, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण प्रदूषित होता है।
उन्होंने कहा कि सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग द्वारा प्रखण्ड एवं जिला स्तर पर होर्डिग्स के माध्यम से प्रचार-प्रसार करवा जाए। कृषि विभाग द्वारा प्रखंड व पंचायत स्तर पर किसान चौपाल का आयोजन कर इस संबंध में किसानों को जागरूक किया जाए, ताकि वे किसी भी स्थिति में पराली न जलावें। पंचायत स्तर पर माइकिंग करायी जाए। शिक्षा विभाग अपने उच्च विद्यालय के छात्र/छात्राओं के माध्यम से प्रभात फेरी, वाद-विवाद एवं क्यूज प्रतियोगिता का आयोजन कर इस विषय पर किसानों में जागरूकता लाये। जीविका दीदियाँ अपने ग्राम संगठन के माध्यम से महिलाओं के बीच जागरूकता करें।
पंचायती राज विभाग अपने निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के माध्यम से लोगों के बीच जागरूकता लाये। उन्होंने जिला कृषि पदाधिकारी को सभी कम्बाईन्ड हारबेस्टर वालों से इस आशय का शपथ पत्र लेने का निर्देश दिया। साथ ही किसान सलाहकार के माध्यम से फसल अवशेष जलाने वालों के यहाँ छापेमारी करवाते रहने का भी निर्देश दिया और कहा कि कहीं भी फसल अवशेष जलाने की घटना पाये जाने पर संबंधित किसान को चिन्ह्ति कर उसके विरूद्ध कार्रवाई की जाए। उक्त बैठक में उप निदेशक, जन सम्पर्क नागेन्द्र कुमार गुप्ता, जिला कृषि पदाधिकारी संजय कुमार सिंह, प्रभारी पदाधिकारी जिला आपदा प्रबंधन सत्यम सहाय, परियोजना निदेशक, आत्मा पूर्णेन्दु नाथ झा एवं अन्य संबंधित पदाधिकारीगण उपस्थित थे।