May 05, 2023

03.05.2023 (दरभंगा) : प्रधान सचिव, श्रम संसाधन विभाग, बिहार सरकार के निर्देशानुसार बाल श्रम उन्मूलन दिवस (30 अप्रैल) से प्रारंभ होकर विश्व बाल श्रम निषेध दिवस (12 जून) तक बाल श्रम के विरुद्ध लगातार आम जनमानस के बीच जन जागरूकता एवं समाज के प्रत्येक वर्ग पर बाल श्रमिकों के विरुद्ध सजगता हेतु सघन निरीक्षण कार्यक्रम एवं प्रचार-प्रसार किए जाने का निर्देश प्राप्त है। इसी क्रम में आज बाल श्रमिकों की विमुक्ति हेतु दरभंगा सदर अनुमंडल क्षेत्र अंतर्गत सिंहवाड़ा एवं भरवाड़ा के विभिन्न दुकानों एवं प्रतिष्ठानों में श्रम अधीक्षक राकेश रंजन के नेतृत्व में धावा दल की टीम के द्वारा सघन जाँच अभियान चलाया गया। जाँच के क्रम में भरवाड़ा स्थित एक प्रतिष्ठान यादगार होटल से एक बाल श्रमिक को विमुक्त कराया गया। विमुक्त बाल श्रमिक को बाल कल्याण समिति, दरभंगा के समक्ष उपस्थापित कर निर्देशानुसार उन्हें बाल गृह में रखा गया है।
बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम -1986 के तहत नियोजक के विरुद्ध संबंधित थाने में प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही है। श्रम अधीक्षक ने बताया कि बाल श्रमिकों से किसी भी दुकान या प्रतिष्ठान में कार्य कराना बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम-1986 के अंतर्गत गैरकानूनी है तथा बाल श्रमिकों से कार्य कराने वाले व्यक्तियों को 20 हजार रुपये से 50 हजार रुपये तक का जुर्माना और दो वर्षों तक के कारावास का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त माननीय सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा एम. सी. मेहता बनाम तमिलनाडु सरकार 1996 में दिए गए आदेश के आलोक में नियोजकों से 20 हजार रुपये प्रति बाल श्रमिक की दर से अलग से राशि की वसूली की जाएगी, जो जिलाधिकारी के पदनाम से संधारित जिला बाल श्रमिक पुनर्वास सह कल्याण कोष में जमा किया जाएगा।
इस राशि को जमा नहीं कराने वाले नियोजक के विरुद्ध एक सर्टिफिकेट केस या नीलाम पत्र वाद अलग से दायर किया जाएगा। धावा दल टीम के सदस्य के रूप में लक्ष्मण कुमार झा श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, सिंहवाड़ा, दिलीप कुमार, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी हायाघाट, बमबम कुमार, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, घनश्यामपुर, सुभम कुमार, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, कुशेश्वरस्थान, मोहन कुमार, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, सदर, चाइल्डलाइन के सदस्य राधे श्याम ठाकुर, आश्रय ट्रस्ट स्वयंसेवी संस्था के सदस्य निवेश कुमार और पुलिस केंद्र दरभंगा से एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट के चार पुलिसकर्मी शामिल थे।
धावा दल की टीम के द्वारा आज दरभंगा शहर के लोहिया चौक, एकमी रोड, शोभन, सिमरी, भरवारा, सिंहवाड़ा स्थित सभी दुकान एवं प्रतिष्ठान में सघन जाँच की गई तथा सभी नियोजको से किसी भी बाल श्रमिक को नियोजित नहीं करने हेतु एक शपथ पत्र भरवाया गया। श्रम अधीक्षक के द्वारा बताया गया कि धावा दल नियमित रूप से प्रत्येक सप्ताह संचालित होगा तथा दरभंगा शहर के साथ-साथ सभी अनुमंडल मुख्यालय एवं प्रखंड मुख्यालयों में भी धावा दल संचालित किया जाएगा तथा बाल श्रमिकों को नियोजित करने वाले नियोजकों के विरूद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
May 05, 2023

02.05.2023 (दरभंगा) : डीएम राजीव रौशन की अध्यक्षता में नेहरू स्टेडियम के विकास को लेकर क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिला खेल संघ व समिति के सचिव जितेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि संस्था के पदेन महासचिव अनुमंडल पदाधिकारी सदर एवं अध्यक्ष जिला पदाधिकारी महोदय स्वयं हैं। समिति के द्वारा नेहरू स्टेडियम की जमीन पर बने 58 दुकानों के मास्क किराया को लेकर विचार विमर्श किया गया, बताया गया कि 2017 में ही समिति द्वारा 2000 रुपये किराया निर्धारित करने का प्रस्ताव पारित है। किराया के संबंध में दुकानदारों के साथ समिति को वार्ता कर निर्णय लेने का निर्देश दिया गया। किराए का पुनर्रनिर्धारण कर किराए की राशि को अनुमंडल पदाधिकारी- सह- महासचिव नेहरू स्टेडियम क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति के नाम से बैंक खाता खोलने का निर्देश दिया गया। नेहरू स्टेडियम में कार्यक्रम के लिए 5000 रुपये किराया निर्धारित है, जिसमें प्रत्येक वर्ष 10 प्रतिशत वृद्धि करने का प्रस्ताव 2011 में ही पारित है।
तदनुसार सरकारी कार्यक्रमों के लिए नई दर निर्धारित करने हेतु अनुमंडल पदाधिकारी सह महासचिव को समीक्षा कर निर्णय लेने का निर्देश दिया गया। स्टेडियम के समीप नाला निर्माण के लिए भवन निर्माण विभाग से प्राक्कलन बनवाने का निर्देश दिया गया। नेहरू स्टेडियम में अवस्थित पार्क जो चाहरदीवारी के बाहर है, के रख-रखाव के संबंध में विचार-विमर्श किया गया, बताया गया कि यह पार्क वुडको द्वारा बनवाया गया है। डीएम ने वन प्रमंडल को या नगर निगम को इसके रख-रखाव एवं संचालन करने हेतु प्राधिकृत करने का निर्देश दिया गया, ताकि पार्क का संचालन नियमित ढंग से हो सके। उन्होंने समिति को तत्काल स्टेडियम के चारों ओर सीसीटीवी कैमरा लगवाने का निर्देश दिया।समिति द्वारा प्रस्ताव दिया गया कि स्टेडियम में प्रवेश के लिए पास की व्यवस्था होनी चाहिए।
डीएम ने खिलाड़ियों को सर्वप्रथम पास उपलब्ध कराने तथा पास की व्यवस्था को प्रोत्साहित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि तत्काल इसे अनिवार्य नहीं बनाया जाए, लेकिन यदि कोई पास बनवाना चाहे तो एक शुल्क निर्धारित कर उन्हें पास उपलब्ध कराया जा सकता है। बैठक के उपरांत विभिन्न चौक-चौराहों पर महापुरुषों की प्रतिमा की रख-रखाव को लेकर भी पिछली बैठकों में दिए गए स्थानीय समिति निर्माण के निर्देश को भी नगर निगम के माध्यम से क्रियान्वित कराने का निर्देश जिला जन संपर्क पदाधिकारी को दिया गया। बैठक में अनुमंडल पदाधिकारी सदर चंद्रिमा अत्री, उप निदेशक जन संपर्क नागेंद्र कुमार गुप्ता, जिला खेल पदाधिकारी परिमल, विशेष कार्य पदाधिकारी सत्यम सहाय, वार्ड पार्षद नवीन सिन्हा एवं खेल संघ के संबंधित पदाधिकारी गण उपस्थित थे।
April 30, 2023

29.04.2023 (दरभंगा) : धरती पुत्री माता सीता के प्राकट्य दिवस जानकी नवमी के उपलक्ष्य में विद्यापति सेवा संस्थान के तत्वावधान में 'मांँ जानकी पूजनोत्सव सह मैथिली दिवस समारोह आयोजित किया गया। संस्थान के प्रधान कार्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन संयुक्त रूप से ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो सुरेंद्र प्रताप सिंह, कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो शशि नाथ झा, सांसद डा गोपाल जी ठाकुर, बेनीपुर के विधायक प्रो विनय कुमार चौधरी, केवटी के विधायक डा मुरारी मोहन झा, पूर्व विधान पार्षद द्वय प्रो विनोद कुमार चौधरी एवं प्रो दिलीप कुमार चौधरी, कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति पं उपेंद्र झा, मैथिली अकादमी के पूर्व अध्यक्ष पं कमलाकांत झा, विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव डा बैद्यनाथ चौधरी बैजू , कार्यकारी अध्यक्ष डा बुचरू पासवान व सखी बहिनपा समूह की संस्थापिका आरती झा ने मिलकर किया।
मौके पर बतौर मुख्य अतिथि अपने संबोधन में सांसद डा गोपाल जी ठाकुर ने कहा कि माँ जानकी मिथिला की बेटी हैं, इस नाते उनका स्वागत और जानकी नवमी मनाना हम सभी मिथिलावासियों का दायित्व और कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि धन्य है मिथिला की धरती जहां मांँ मैथिली ने अवतार लिया। भगवान श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम बनाने में मां सीता की भूमिका अहम है।
बेनीपुर के विधायक प्रो विनय कुमार चौधरी ने कहा कि माँ जानकी का जन्म मिथिला में होना हम सभी का सौभाग्य है। उन्होंने कहा कि मिथिला की भाषा मैथिली यदि समाज का आईना है तो इसकी धरोहर लिपि मिथिलाक्षर माँ जानकी का गहना है। उन्होंने मिथिलाक्षर के संवर्धन एवं संरक्षण के लिए इसे दैनिक प्रयोग में लाने पर बल दिया। साथ ही ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में दूरस्थ शिक्षा को फिर से बहाल करने के लिए विभिन्न स्तरों पर समेकित प्रयास करने का आह्वान किया।
केवटी के विधायक डा मुरारी मोहन झा ने कहा कि दशरथ पुत्र भगवान राम कभी मर्यादा पुरुषोत्तम नहीं कहलाते यदि मां जानकी का उन्हें साथ नहीं मिला होता। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो सुरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि माँ जानकी की मातृभूमि मिथिला विद्वानों की धरती है। यहां की वाणी काफी मधुर है और यहाँ के लोग उससे भी अधिक धैर्यवान हैं। उन्होंने माँ जानकी को त्याग व समर्पण का बेहतर उदाहरण बताते कहा कि एक पत्नी, माँ, बेटी, बहू व भाभी की जो आदर्श छवि उन्होंने कायम की, वह आज भी मिथिला की संस्कृति और संस्कार में कायम है। यह हमारे लिए गौरव की बात है।
मां जानकी को त्याग व समर्पण की देवी बताते हुए कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो शशि नाथ झा ने कहा कि उनके जैसा उदात्त चरित्र संपूर्ण विश्व के इतिहास में मिलना असंभव है। उन्होंने मां जानकी को मैथिल संस्कृति की धरोहर बताते हुए कहा कि जानकी हमारी माता है जिनके प्रति सम्मान का भाव सिर्फ मिथिला के लोगों में ही नहीं, बाहर के लोगों के हृदय में भी धड़कता है। पूर्व विधान पार्षद प्रो विनोद कुमार चौधरी ने कहा कि सीता और राम सदियों से भारतीय जनमानस के लिए आराध्य रहे हैं। उन्होंने जानकी नवमी को अगले साल से राजकीय पर्व के रूप मनाये जाने हेतु प्रयास करने की बात रखी।
पूर्व विधान पार्षद प्रो दिलीप कुमार चौधरी ने कहा कि यह हमारे लिए गौरव की बात है कि मां जानकी का अवतरण मिथिला में हुआ और भगवान राम को मर्यादा पुरूषोत्तम बनाने में उनकी अहम भूमिका को नकारा नहीं जा सकता है। मैथिली अकादमी के पूर्व अध्यक्ष पं कमलाकांत झा ने संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल मैथिली को बिहार में अब तक राजकाज की भाषा का दर्जा नहीं दिए जाने के साथ ही मैथिली भाषा की पूर्व से गठित स्वतंत्र अकादमी को अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के साथ विघटित किए जाने पर सवाल उठाया।
आगत अतिथियों का स्वागत करते हुए विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव डा बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने कहा कि मां जानकी मिथिला के लोगों के रग-रग में बसी हुई है। लेकिन यह सबसे बड़ी त्रासदी है कि मिथिला के लोगों को आज भी मां जानकी की तरह कदम कदम पर अग्निपरीक्षा के दौर से गुजरना पड़ता है। संस्थान की ओर से उन्होंने ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति का नाम पद्म पुरस्कार के लिए एवं मिथिला के सपूत ललित नारायण मिश्र व पूर्व मुख्यमंत्री गुदड़ी के लाल कर्पूरी ठाकुर का नाम भारत रत्न सम्मान के लिए नामित किए जाने का प्रस्ताव रखा। मौके पर मिथिला के शैक्षणिक उन्नयन में उत्कृष्ट योगदान के लिए ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो सुरेंद्र प्रताप सिंह को मिथिला गौरव सम्मानोपाधि एवं नारी सशक्तिकरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट अवदान के लिए सखी बहिनपा समूह की संस्थापिका आरती झा को जानकी सम्मान से सम्मानित किया गया।
मैथिली दिवस समारोह के संयोजक प्रवीण कुमार झा एवं संयोजिका डा सुषमा झा के संयुक्त संचालन में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में पं कुंज बिहारी मिश्र, रामबाबू झा, दुखी राम रसिया, नीरज कुमार झा, अनुपमा मिश्र आदि ने गीत-संगीत के स्वर लहरियों की छटा जमकर बिखेरी। वहीं तबला पर हीरा कुमार झा, इलेक्ट्रॉनिक कैसियो पर नीरज झा, पैड पर मुरारी आदि ने उंगली के जादू का जमकर प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में सखी बहिनपा समूह द्वारा प्रस्तुत कार्यक्रम दर्शकों के विशेष आकर्षण के केन्द्र में रहा। इससे पहले प्रातः कालीन बेला में पूजा पंडाल में माँ जानकी की प्रतिमा का प्राण प्रतिष्ठा कर शास्त्रीय विधि से पूजा-अर्चना की गई।
इसके यजमान डा अमलेन्दु शेखर पाठक बने। पुरोहित के रूप में पं दधीचि की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। पूजा अर्चना के दौरान गंधर्व कुमार झा ने सस्वर वेद ध्वनि की जबकि वरिष्ठ साहित्यकार मणिकांत झा ने स्वरचित जानकी चालीसा का पाठ किया।
कार्यक्रम में विनोद कुमार झा, प्रो चंद्रशेखर झा बूढ़ा भाई, दुर्गा नंद झा, प्रो विजय कांत झा, , डा गणेश कांत झा, डा उदय कांत मिश्र, चौधरी फूर कुमार राय, हरिकिशोर चौधरी, प्रजेश कुमार झा, डा रमेश झा, स्वर्णिम किरण झा, डा उषा चौधरी, रोहिणी झा, सुधा झा, आशीष चौधरी, पुरूषोत्तम वत्स, नवल किशोर झा, बालेंदु झा आदि उपस्थित थे।
April 30, 2023

29.04.2023 (दरभंगा) : दरभंगा के प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञों ने कॉस्मेटिक सर्जरी के गुर सीखे। कार्यक्रम की शुरुआत दरभंगा मेडिकल कॉलेज के नए लेक्चर थिएटर में दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। दरभंगा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ के एन मिश्रा, सुपरिटेंडेंट डॉ अलका झा, विभागाध्यक्ष डॉ सीमा प्रसाद, दरभंगा प्रसुति एवं स्त्री रोग सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ भरत प्रसाद, सेक्रेटरी डॉक्टर माया शंकर प्रसाद, वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर मीना महासेठ, डॉक्टर कुमुदिनी झा, डॉ पूजा महासेठ, डॉ शशि बाला प्रसाद, डॉ रेनू झा, डॉ राजश्री पूर्वे, डॉ प्रशांत कृष्णा गुप्ता ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
अपने उद्घाटन भाषण में डॉक्टर के एन मिश्रा ने कहा कि ज्ञान का वर्धन आवश्यक है। जिन्होंने अपने परिश्रम से कोई स्किल प्राप्त किया है, उसे दूसरे में बांटने से पुण्य होगा। डॉ राजश्री पूर्वे ने कार्यक्रम का संचालन किया। पटना की आस्था अस्पताल की डॉ नीलू प्रसाद ने कॉस्मेटिक सर्जरी के बारे में व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि बिना काट छांट के लेजर के द्वारा स्त्रियों के बहुत सारे रोगों को ठीक किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रसव के उपरांत कई स्त्रियों को पेशाब रोक पाने में दिक्कत होती है। लेजर के द्वारा इन्हें बिना किसी बेहोशी और औजार इस्तेमाल के ढीक किया जा सकता है। लेक्चर थिएटर में व्याख्यान के उपरांत गायनी के आपरेशन थियेटर में अनेक स्त्रियों को लेजर द्वारा सर्जरी कर ठीक किया गया। यह सारे ऑपरेशन फ्री में किए गए।
इस कार्य हेतु सारे औजार डॉ नीलू प्रसाद की आस्था क्लिनिक द्वारा उपलब्ध कराए गए। इस कार्यक्रम में लगभग 50 प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ ने लेजर सर्जरी सीखी। दरभंगा में लेजर सर्जरी का यह पहला प्रदर्शन था और इस में भाग लेकर स्त्री रोग विशेषज्ञों को काफी प्रसन्नता हुई। स्त्री रोग विभाग की पीजी छात्रों ने भी इस कार्यक्रम में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया।
April 30, 2023

28.04.2023 (दरभंगा) : हिन्दी काल- परंपरा अत्यंत लंबी है, जिसमें पहले से ही संगीतात्मकता दिखती है जो भक्तिकाल में ज्यादा बढ़ गई।19वीं सदी के पहले और बाद के हिन्दी काव्य के स्वरूप में काफी बदलाव आया। हिन्दी को प्रारंभ से ही लोकभाषा का बड़ा आधार मिला, जिसमें लोकभाषाओं के शब्दों के आने से गीतात्मकता का आना स्वभाविक ही है। उक्त बातें सी एम कॉलेज, दरभंगा के हिन्दी विभाग के तत्वावधान में "हिन्दी काव्य- परंपरा में संगीतात्मकता" विषयक कार्यशाला ने मुख्य वक्ता के रूप में महाविद्यालय के पूर्व हिन्दी- प्राध्यापक डा अविनाशचन्द्र मिश्र ने कही।
उन्होंने कहा कि हिन्दी- काव्य की काव्यात्मकता एवं संगीतात्मकता व्यक्ति में सकारात्मक परिवर्तन लाने में सक्षम है। विद्यापति, जयदेव, मीरा, सूर व तुलसी आदि के काव्य संगीतात्मकता के कारण ही अधिक प्रसिद्ध हुए हैं। वहीं सूफी संतों की रचनायें गीतात्मकता के कारण ही अधिक प्रभावकारी एवं लोकप्रिय हुआ। उन्होंने कहा कि यदि रामकथा वाचक भी पदों को गाते हैं तो वे अधिक लोकप्रिय हो जाते हैं। अध्यक्षीय संबोधन में प्रधानाचार्य डा अशोक कुमार पोद्दार ने कहा कि कविता के साथ संगीत के जुड़ने से जनमानस में अधिक भावात्मक लगाव उत्पन्न होता है। संगीत के माध्यम से शब्द दिलों कि अधिक गहराई तक पहुंचते हैं। हिन्दी अत्यंत समृद्ध भाषा है, जिसकी स्थिति काफी मजबूत हुई है। ज्ञानार्जन में भाषा कोई बाधक नहीं हो सकती। हमें सिर्फ अंग्रेजी की औपनिवेशिक मानसिकता से बाहर निकलने की जरूरत है।
डॉ पोद्दार ने कार्यशाला आयोजन के लिए हिन्दी विभाग एवं हिन्दी साहित्य परिषद् , सी एम कॉलेज के सदस्यों को बधाई एवं धन्यवाद दिया। विशिष्ट अतिथि के रूप में विश्वविद्यालय संस्कृत विभाग के प्राध्यापक डा आर एन चौरसिया ने कहा कि भक्ति का एक सशक्त माध्यम संगीत हमारे मन- मस्तिष्क तथा व्यवहार को सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। संगीतात्मक हिन्दी- काव्य हर तरह के व्यक्ति को सार्वदेशिक एवं सार्वकालिक रूप से सर्वाधिक प्रभावित करता है। ऐसे काव्यों की रचना एवं श्रवण से सामाजिक समरसता मजबूत होती है और आलस्य, ईर्ष्या, द्वेष, भय, निराशा तथा क्रोध आदि नकारात्मक भाव भी दूर होते हैं। इनमें संप्रेषणीयता की क्षमता अधिक होती है जो एक मानव को दूसरे से जोड़ता है।
विशिष्ट वक्ता के रूप में आकाशवाणी की कलाकार एवं संगीतज्ञ डा रागिनी ने कहा कि हमें ज्ञानार्जन कर उन लोगों तक पहुंचाना चाहिए जो सामर्थ्यवान नहीं हैं। संगीत में गायन, वादन एवं नृत्य समाहित होते हैं। इस अवसर पर उन्होंने तोरे मिलन की आस लगे रे पिया...., बीते दिन कब आने वाले.... तथा तेरे बिना मेरा जग अंधियारा.... आदि अनेक शास्त्रीय एवं लोकगीतों का कर्णप्रिय गायन किया, जिनका तबलावादक के रूप में ऋग्वेद झा ने भरपूर सहयोग किया।
हिन्दी के प्राध्यापक डा अभिषेक सिंह ने कहा कि साहित्य, संगीत व कला के बिना कोई मानव नहीं हो सकता। गीतात्मक कव्यों में रस, आनंद एवं अनुभूति ज्यादा होती है। कालजयी कविता के लिए गीतात्मकता, लोकात्मकता के साथ ही गहरी अनुभूति का होना भी आवश्यक है।
कार्यशाला में डा प्रभात कुमार चौधरी, डा अब्दुल हई, डा रूपेन्द्र झा, डा मीनाक्षी राणा, डा अखिलेश कुमार विभू, प्रो संजीव कुमार, डा सऊद आलम, प्रो विकास कुमार, डा फैजान हैदर, डा तनिमा कुमारी, डा शांभवी, डा इब्राहिम, डा उम्मे सलम, अमरजीत कुमार, जूही झा तथा मनजीत कुमार चौधरी सहित 125 से अधिक व्यक्ति उपस्थित थे, जिन्हें प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। अतिथियों का स्वागत बुके एवं स्मृतिचिह्न से किया गया। कॉलेज के सेमिनार हॉल में आयोजित कार्यशाला में अतिथियों का स्वागत एवं कार्यक्रम का संचालन कार्यशाला की संयोजिका डा रीता दुबे ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन हिन्दी- प्राध्यापक डा आलोक कुमार राय ने किया।