March 13, 2024
12.03.2024 (पटना) : समाहर्ता-सह-जिलाधिकारी शीर्षत कपिल अशोक ने जिलान्तर्गत सभी अनुमंडल पदाधिकारियों, भूमि सुधार उप समाहर्ताओं तथा लोक शिकायत निवारण पदाधिकारियों को निबंधन अधिनियम, 1908 की धारा 82 एवं भारतीय मुद्रांक अधिनियम की धारा 27 के उल्लंघन के मामले में कार्रवाई करने का निदेश दिया है।
उन्होंने कहा की दस्तावेजों के निबंधन के क्रम में संबंधित दस्तावेजों में गलत साक्ष्य विवरणी, कागजात तथा गलत पहचान-पत्र, भूमि पर अवस्थित संरचना को छुपाकर एवं भूमि को गलत प्रकृति, अवस्थिति को अंकित कर दस्तावेज का निबंधन कराने की प्रवृति पर रोक लगाने हेतु निबंधन अधिनियम, 1908 की धारा-82 एवं भारतीय मुद्रांक अधिनियम की धारा 27 का उल्लंघन करने वाले पक्षकारों के विरूद्ध विहित प्रावधानों के अन्तर्गत प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। डीएम ने संबंधित पदाधिकारियों को निदेश दिया है कि यदि उक्त प्रावधान के उल्लंघन का मामला प्रकाश में आता है या परिवाद-पत्र प्राप्त होता है तो उसकी गहनता से जाँच करते हुए दोषी पदाधिकारी/कर्मी को चिन्हित कर प्रतिवेदन दें।
दोषियों के विरूद्ध कार्रवाई की जाएगी। डीएम ने संबंधित पदाधिकारियों को निदेश दिया है कि यदि उक्त प्रावधान के उल्लंघन का मामला प्रकाश में आता है या परिवाद-पत्र प्राप्त होता है तो उसकी गहनता से जाँच करते हुए दोषी पदाधिकारी/कर्मी को चिन्हित कर प्रतिवेदन दें। दोषियों के विरूद्ध कार्रवाई की जाएगी।
March 13, 2024

12.03.2024 (दरभंगा) : कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में कुलाधिपति राजेन्द्र विश्वनाथ आर्लेकर की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित सीनेट की 47वीं बैठक में वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए कुल चार अरब 80 करोड़ 71 लाख 12 हजार 188 रुपये के घाटे का बजट स्वीकृत कर दिया गया।प्रतिकुलपति प्रो.सिद्धार्थ शंकर सिंह द्वारा सदन के पटल पर रखे बजट को मूल रूप से सात शीर्ष मद में बांटकर तैयार किया गया है।
बजट में छह स्नातकोत्तर विभागों, 31 अंगीभूत महाविद्यालयों, सम्बद्ध 26 शास्त्री व 15 उपशास्त्री महाविद्यालयों यानी कुल 72 महाविद्यालयों के शिक्षक व शिक्षकेतर कर्मचारियों के अलावा मुख्यालय के पदाधिकारियों व कर्मचारियों के लिये खर्चे प्रस्तावित हैं जिसमें वेतन, सेवांत लाभ एवं बकाये की अपेक्षित राशि को समावेशित किया गया है। इसके अतिरिक्त विभिन्न विकास मद, छात्रवृत्ति, सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक कार्यक्रम, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के कार्यान्वयन के लिए भी बजट में प्रावधान किया गया है। विश्वविद्यालय के पीआरओ निशिकांत ने बताया कि विवि के प्रस्तावित बजट में कुल चार अरब 82 करोड़ 82 लाख 30 हजार 583 रुपये के व्यय का अनुमान किया गया है। व्यय मद में शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों के वेतन, सेवांत लाभ, पेंशन, पारिवारिक पेंशन तथा एरियर मद की राशि को रखा गया है। आय मद में आंतरिक स्रोत एवं स्ववित्त पोषित संस्थानों से प्राप्त होने वाली कुल आय को शामिल किया गया है। विवि की कुल अनुमानित आय दो करोड़ 11 लाख 18 हजार 395 रुपये का अनुमान लगाया गया है।
इस प्रकार बजट में दिखाए गए घाटे की प्रतिपूर्ति राज्य सरकार, रुसा एवं अन्य संसाधनों से प्राप्त अनुदान व आंतरिक संसाधनों को विकसित कर किया जाएगा। बजट के अनुसार शिक्षकों के वेतन मद में पीजी विभाग, अंगीभूत कॉलेज, वित्त सहित संबद्ध शास्त्री तथा उपशास्त्री कॉलेजों को मिलाकर कुल 54 करोड़ 24 लाख 12 हजार 734 रुपये के व्यय का अनुमान लगाया गया है, जबकि शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के वेतन मद में 15 करोड़ 16 लाख 76 हजार 402 रुपये का अनुमान है।
इस प्रकार, वेतन मद में एक वर्ष में कुल 69 करोड़ 40 लाख 89 हजार 136 रुपये का व्यय अनुमानित है। सेवांत लाभ, पेंशन एवं पारिवारिक पेंशन मद में वर्ष 2024-25 में एक अरब 41 करोड़ 69 लाख 60 हजार 519 रुपये का अनुमानित व्यय दिखाया गया है। इसी तरह वेतन व पेंशन के एरियर मद में एक अरब 59 करोड़ 88 लाख 34 हजार 613 रुपये के व्यय का अनुमान है। कार्यालय खर्च मद में 85 करोड़ 45 लाख 86 हजार 420 रुपये तथा विभिन्न विकास कार्यों के लिए 26 करोड़ 12 लाख 59 हजार 895 रुपये व्यय प्रस्तावित है।
March 13, 2024

12.03.2024 (दरभंगा) : संस्कृत विश्वविद्यालय में आयोजित सीनेट की बैठक की अध्यक्षता कर रहे कुलाधिपति राजेन्द्र विश्वनाथ आर्लेकर, राजभवन से आये पदाधिकारियों, पूर्व कुलपतियों, बिहार विधान मंडल के मा. सदस्यों, संकायाध्यक्षों, प्रधानाचार्यों, विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों, विश्वविद्यालय के विद्वान शिक्षकों, कर्मचारियों, पदाधिकारियों एवं पत्रकार बन्धुओं का स्वागत करते हुए कुलपति प्रो.लक्ष्मी निवास पांडेय ने संस्कृत के विकास व सम्वर्धन के लिए सभी से सहयोग मांगा और साथ ही भविष्य की पुष्ट कार्य योजना के बल पर विश्वविद्यालय को नई बुलन्दियों के शिखर पर ले जाने का भरोसा भी दिया।विकास के नए रोडमैप का खाका खींचते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के आलोक में इस विश्वविद्यालय में भी बहुविषयक पाठ्यक्रमों को लागू किया जाएगा।
साथ ही, संगणक शिक्षा, योग, क्रीड़ा, प्रशासन, लेखा, परीक्षा समेत अन्य कार्यो में अद्यतन परिवर्धन प्रणालियों को भी अपनाया जाएगा। इतना ही नहीं, समाज मे विस्तार कार्यक्रम के रूप मे संस्कृत व संस्कृति का प्रसार करते हुए सभी के समक्ष अपना अस्तित्व, सार्थकता व गुणवत्ता को भी प्रतिष्ठापित करना है। उक्त जानकारी देते हुए विश्वविद्यालय के पीआरओ निशिकांत ने बताया कि कुलपति प्रो. पांडेय ने विश्वविद्यालय के खास्ता हाल को सुधारने के लिए भी मान्य सदस्यों से सहयोग की अपेक्षा की। उन्होंने साफ कहा कि विश्वविद्यालय की आय का आंतरिक स्रोत अत्यंत ही अल्प है। इस कारण अनेक आवश्यक कार्य बाधित हो जाते हैं।
यहां निःशुल्क शिक्षा के कारण उसकी भरपाई नहीं हो पाती है। संस्कृत के संरक्षण व संवर्धन के लिए छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान करना आवश्यक है और रिक्त पड़े शिक्षकों व अन्य कर्मियों के पदों पर नियुक्ति भी जरूरी है। कुलपति ने स्वागत भाषण में विश्वविद्यालय की प्रगति को भी रेखांकित करते हुए जानकारी दी कि यहां पांडुलिपियों सम्पादन एवं प्रकाशन का कार्य भी निरन्तर जारी है। इसके अलावा विभिन्न तरह के करीब डेढ़ दर्जन ग्रन्थों का भी प्रकाशन किया गया है। राजभवन के निदेशानुसार शैक्षणिक सत्र 2023-27 से चयन आधारित साख प्रणाली यानी च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) आधारित चार वर्षीय शास्त्री का पाठ्यक्रम प्रारम्भ कर दिया गया है।
इसके प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा भी हो चुकी है। कोविड महामारी के दुष्प्रभाव के कारण जो शैक्षणिक गतिविधि प्रभावित हुई है, उसकी पूर्णतः क्षति पूर्ति अभी तक नही हो पाई है। इसकी भरपाई के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास जारी है। उम्मीद की जा रही है कि 2024 में विश्वविद्यालय की सभी परीक्षाएं अद्यतन हो जाएगी। छात्रों को शुभाशीष देते हुए कुलपति प्रो.पांडेय ने आशा जताई कि उनका अध्ययन स्वयं व समाज के लिये हमेशा हितकारी बना रहे और उनका आचरण प्रशंसनीय व अनुकरणीय हो।
March 13, 2024

12.03.2024 (दरभंगा) : कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में मंगलवार को दरबार हॉल में आयोजित सीनेट की 47वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए कुलाधिपति राजेन्द्र विश्ववनाथ आर्लेकर ने सभी मान्य सदस्यों को सम्बोधित करते हुए कहा कि आप सभी विद्वतजन हैं। यह विद्वानों की सभा है। विश्वविद्यालयों का समेकित विकास जिस तरह होना चाहिए वैसा नहीं हो सका है। इसका समाधान कैसे होगा, इस पर हम सभी को सोचना होगा।
विश्वविद्यालय के हित में सीनेटरों का बड़ा कर्तव्य है, इस पर भी विचार आवश्यक है। उन्होंने संस्कृत को पुरातन भाषा कहते हुए जोड़ा कि इसे सभी रोज के व्यवहार में लाएं। तभी इसकी प्रतिष्ठा बढ़ेगी और विश्व स्तर पर इसे मुकम्मल स्थान मिलेगा। इस ओर ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बच्चों को हम हिंदी नहीं भी सिखाते हैं तो वे बोल लेता है। बड़ा होकर ही वे उसमें दक्ष हो पाता है। तो ऐसे में अगर हमलोग संस्कृत में विचारों का रोज आदान-प्रदान करेंगे तो बेशक यह भाषा सर्वसुलभ हो जाएगी। इसका मान भी बढ़ेगा और विलुप्त होने से भी यह बच जाएगी।
संस्कृत को संस्कृति का वाहक बताते हुए मा.कुलाधिपति ने तमाम प्रशासकीय कार्यों को संस्कृत में ही सम्पादित कराने को कहा। यहाँ तक कि आंतरिक संचिकाओं की टिपण्णी व पत्राचार भी संस्कृत में ही करने का उन्होंने आह्वान किया। उन्होंने आगाह किया कि अन्यथा की स्थिति में विपरीत वातावरण ही बना रहेगा। इसी क्रम में उन्होंने खुलासा किया कि जब वे हिमाचलप्रदेश के राज्यपाल थे तो वहाँ के राजभवन कर्मियों के लिए संस्कृत सम्भाषण शुरु कराया गया था। हर्ष का विषय यह रहा कि कुछ दिनों बाद ही वहाँ के कर्मी फाइलों में संस्कृत में ही टिपण्णी करने लगे। तो क्या यहां यह सम्भव नहीं है? जरूरत है इस ओर कदम बढ़ाने की। मा. कुलाधिपति ने कहा कि सीनेट सदस्यों को भी संस्कृत का ज्ञान होना चाहिए। इसके लिए विश्ववविद्यालय में उन्होंने संस्कृत सम्भाषण शिविर का आयोजन करने के लिए कुलपति प्रो.लक्ष्मी निवास पांडेय से कहा, साथ ही उन्होंने कहा कि वे स्वयं इस सम्भाषण शिविर में आएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि संस्कृत विश्वविद्यालय के विकास एवं इसकी गतिविधियों के सम्यक् संचालन का दायित्व यहाँ के पदाधिकारियों के अतिरिक्त सीनेट के सदस्यों का भी है।
परीक्षाओं को ससमय सम्पन्न कराने में उन्हें विश्वविद्यालय प्रशासन को सहयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें नहीं भूलना चाहिए कि भावी पीढ़ी की जिम्मेदारी हम सभी पर है, उनके भविष्य को खराब करने का अधिकार हमें नही है, इसलिए विश्वविद्यालय प्रशासन को आपका सहयोग जरूरी है, बैठक के बाद भी आपका इस ओर कर्तव्य बनता है। कुलाधिपति ने अपने अभिभाषण में यह भी कहा कि विश्वविद्यालय महाविद्यालय नहीं है। इसलिए यहां शोध कार्यों पर विशेष जोर देने की जरूरत है। यहां अनेक न्यास स्थापित हों और बहुविषयक पढ़ाई भी हो।
उक्त जानकारी देते हुए विश्वविद्यालय के पीआरओ निशिकांत ने बताया कि मा.कुलाधिपति ने संस्कृत विश्वविद्यालय के नवनियुक्त कुलपति प्रो.लक्ष्मी निवास पांडेय की काफी सराहना की। उन्होंने कुलपति प्रो. पांडेय को बहुत ही कुशल व दक्ष विद्वान बताते हुए कहा कि चयन समिति ने जो विश्वास व भरोसा इनके ऊपर जताया है, हम उम्मीद करते हैं कि वे उसको अवश्य पूरा करेंगे।
उन्होंने पुनः इसे दोहराया कि सीनेट की दो बैठकें होनी चाहिए। एक बजट सत्र और दूसरा शैक्षणिक सत्र। निकट भविष्य में शैक्षणिक सत्र आयोजित करने के लिए उन्होंने कहा। इसमें शामिल होने के लिए मा. कुलाधिपति ने अपनी सहमति भी प्रदान कर दी। सभी मान्य सदस्यों ने मा. कुलाधिपति के प्रति आभार जताया एवं उनकी उपस्थिति को गौरवपूर्ण बताया।
March 13, 2024

12.03.2024 (दरभंगा) : जिला निर्वाचन अधिकारी सह जिलाधिकारी राजीव रौशन के निर्देश के आलोक में आज डीपीएम जीविका डॉ.ऋचा गार्गी के द्वारा में दरभंगा जिले के विभिन्न प्रखंडों में जहाँ न्यूनतम मतदान वाले केंद्रों पर मतदाताओं को प्रेरित कर मतदान कार्यक्रम में अधिक सहभागिता सुनिश्चित करने के उद्धेश्य से जीविका दीदियों द्वारा जागरूकता अभियान चलाया गया। जीविका दीदियों द्वारा रैली, शपथ कार्यक्रम, रंगोली, मेंहदी प्रतियोगिता, नुक्कड़ नाटक आदि के माध्यम से मतदाता जागरूकता अभियान चलाया गया।
इसी क्रम में मंगलवार को डॉ.ऋचा गार्गी की अध्यक्षता में बहादुरपुर प्रखंड के एकता संकुल संघ अंतर्गत हरपट्टीगाँव में जागरूकता रैली व सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। उन्होंने कहा कि मतदान लोकतंत्र का महापर्व है, इसलिए अपने सारे कार्य को छोड़कर "पहले चलो करें मतदान" की बात की गयी है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को अधिक सशक्त बनाने के लिए शत-प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी भी सुनिश्चित करनी होगी, तभी मजबूत लोकतंत्र का निर्माण होगा। सत्य और ईमानदारी से-सरकार बने मतदान से स्वस्थ जनतंत्र की है पहचान-सबको शिक्षा और मतदान जैसे नारों को बुलंद करती हुई जीविका दीदियां गाँव के गलियों से गुजरी।
जीविका दीदियों ने संकल्प लिया कि हम आगामी चुनावों में सपरिवार वोट डालने जायेंगे और बिना लालच और भय के साथ मतदान करेंगे। जागरूकता कार्यक्रम में बीपीएम सुकेश कुमार मिश्रा, जिला कार्यालय से संचार प्रबंधक राजा सागर, ब्रजेश कुमार, बीपीआईयू के विभिन्न कर्मी, कैडर व जीविका दीदियां उपस्थिति थी।